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रक्षावापर पिपराइच विधानसभा क्षेत्र में मिट्टी खनन और फंड की बं*दर*बांट पर उठे सवाल

संवादाताः कोटो न्यूज़ नेटवर्क (KNN) | गोरखपुर ज़िले के पिपराइच विधानसभा क्षेत्र में अवै*ध मिट्टी खनन और सरकारी फंड के दुरु*पयोग के आरोपों ने एक बार फिर स्थानीय राजनीति को गर्मा दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम रक्षावापर और ग्राम उनौला में विकास कार्यों की बजाय खनन और संदिग्ध गतिविधियों पर ज़्यादा ध्यान…

रक्षावापर पिपराइच विधानसभा

संवादाताः कोटो न्यूज़ नेटवर्क (KNN) | गोरखपुर ज़िले के पिपराइच विधानसभा क्षेत्र में अवै*ध मिट्टी खनन और सरकारी फंड के दुरु*पयोग के आरोपों ने एक बार फिर स्थानीय राजनीति को गर्मा दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम रक्षावापर और ग्राम उनौला में विकास कार्यों की बजाय खनन और संदिग्ध गतिविधियों पर ज़्यादा ध्यान दिया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, पंचायत और प्रशासन के कुछ प्रतिनिधियों पर खनन मा*फिया को शरण देने के आरोप भी लग रहे हैं। हालांकि संबंधित पक्षों की ओर से अभी तक किसी भी तरह की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

पिपराइच विधानसभा क्षेत्र लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक रूप से संवेदनशील माना जाता रहा है। गोरखनाथ मंदिर से निकटता और राजनीतिक रूप से सक्रिय माहौल ने यहां की हर घटना को बड़े मुद्दे में बदलने की परंपरा बनाई है। हाल के दिनों में ग्राम उनौला और रक्षावापर के नाम लगातार सामने आने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि खनन से न केवल पर्यावरण को नुकसान हो रहा है बल्कि इससे ग्रामीण सड़कों की हालत भी खराब होती जा रही है। कई ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि शिकायत करने पर भी प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही।

स्थानीय स्तर पर चर्चा यह भी है कि रक्षावापर ग्राम सभा के विकास कार्यों में सरकार द्वारा दिए गए फंड का पूरा उपयोग नहीं हुआ। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पंचायत में कई योजनाएँ सिर्फ कागजों पर चल रही हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना, शौचालय निर्माण और सड़क मरम्मत जैसे प्रोजेक्ट पर सवाल उठ रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि फंड का बंट*वारा बराबरी से करने की बजाय “बं*दर*बांट” जैसी स्थिति उत्पन्न हुई है। हालांकि पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि सभी योजनाएँ निर्धारित मानक के अनुसार चल रही हैं और आरोप बेबुनियाद हैं।

ग्राम प्र*धान और उनके परि*वार पर भी सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि ग्राम रक्षावापर के वर्तमान प्र*धान के परि*वार के कुछ सदस्यों का नाम कथित रूप से अवै*ध गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। इनमें आपरा*धिक गतिवि*धियों को शरण देने के आरोप लगाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह स्थिति गाँव के माहौल और सुरक्षा के लिए खतरनाक हो सकती है। वहीं, कुछ लोग इसे राजनीति से प्रेरित दुष्प्रचार भी मानते हैं। उनका कहना है कि पंचायत चुनावों में प्रतिद्वंद्विता अक्सर इस तरह के आरोपों को जन्म देती है।

खनन का मुद्दा गोरखपुर ज़िले में नया नहीं है। बीते कई वर्षों से अवै*ध खनन को लेकर प्रशासन और माफि*याओं के बीच बिल्ली-चूहे का खेल चलता रहा है। स्थानीय खनन से न केवल पर्यावरण बल्कि ज़मीन और जलस्तर पर भी असर पड़ता है। अनियंत्रित खनन से खेती की ज़मीन धीरे-धीरे बंजर हो सकती है। ग्राम उनौला और आस-पास के इलाकों में लगातार मिट्टी उठने से खेतों का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि इसका सीधा असर उनकी आजीविका पर पड़ रहा है।

पंचा*यती राज व्यवस्था के तहत ग्राम प्र*धान का मुख्य दायित्व गाँव के विकास और कल्याणकारी योजनाओं का सही क्रियान्वयन करना होता है। परंतु जब प्र*धान और उनके परि*वार पर सवाल उठने लगें, तो स्वाभाविक रूप से ग्रामीणों का भरोसा डगमगाने लगता है। सूत्रों के अनुसार, ग्राम रक्षावापर में कई ऐसे विकास कार्य अधूरे पड़े हैं जिनके लिए पहले ही भुगतान हो चुका है। उदाहरण के लिए नाली निर्माण, सड़क की मरम्मत और जलापूर्ति योजना। ग्रामीणों का कहना है कि वे बार-बार पंचायत और प्रशासनिक अधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला।

विधानसभा स्तर पर भी इस मामले ने ध्यान खींचा है। पिपराइच से जुड़े राजनीतिक दल और सामाजिक संगठन इस मुद्दे को उठाने लगे हैं। विपक्षी दलों के कुछ नेताओं का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह लोकतंत्र और विकास दोनों के लिए खतरा है। वहीं सत्तारूढ़ पक्ष के प्रतिनिधि कहते हैं कि हर आरोप की जाँच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई होगी।

गोरखपुर प्रशासन ने भी हाल ही में अवै*ध खनन के खिलाफ कई अभियान चलाए हैं। जिलाधिकारी और पुलिस विभाग ने चेतावनी दी है कि किसी भी प्रकार की गैर-कानूनी गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि अभियान केवल “दिखावा” बनकर रह जाते हैं, क्योंकि कुछ दिन के बाद सब कुछ फिर पहले जैसा हो जाता है। इस वजह से ग्रामीण अब मीडिया और सामाजिक संगठनों की ओर देख रहे हैं।

सूत्रों का कहना है कि गाँव में कई बार तनावपूर्ण स्थितियाँ भी उत्पन्न हुईं। ग्रामीणों और कथित खनन माफि*याओं के बीच झगड़े की घटनाएँ सामने आई हैं। कई बार पुलिस को भी मौके पर पहुँचकर स्थिति संभालनी पड़ी। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इन आरोपों की निष्पक्ष जाँच नहीं हुई तो भविष्य में यह स्थिति और गंभीर हो सकती है।

ग्राम रक्षावापर और उनौला के ग्रामीणों की सबसे बड़ी माँग यही है कि पारदर्शिता लाई जाए। सरकारी फंड का सही उपयोग हो, खनन की जाँच हो और गाँव में सुरक्षा का माहौल कायम किया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन और सरकार ने अब भी कदम नहीं उठाए, तो उन्हें आंदोलन करना पड़ेगा।

 

पिपराइच विधानसभा क्षेत्र में खनन और विकास कार्यों पर उठे सवाल

पिपराइच विधानसभा क्षेत्र पिछले कई महीनों से अवै*ध मिट्टी खनन और पंचायत स्तर पर विकास कार्यों की पारदर्शिता को लेकर सुर्ख़ियों में है।

ग्राम उनौला और ग्राम रक्षावापर में ग्रामीणों का आरोप है कि खनन माफि*याओं को स्थानीय स्तर पर शरण मिल रही है, जिससे अवै*ध गतिविधियाँ बढ़ी हैं।

ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया कि सरकार द्वारा भेजे गए विकास फंड का उपयोग ज़मीनी स्तर पर सही तरीके से नहीं हुआ। कई योजनाएँ कागज़ों पर पूरी दिख रही हैं, जबकि वास्तविकता में काम अधूरा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि नाली निर्माण, सड़क मरम्मत, पेयजल व्यवस्था और आवास योजना जैसे काम अपेक्षित ढंग से पूरे नहीं किए गए।

कई ग्रामीणों ने खुलकर कहा कि “गाँव के लिए जो पैसा आया था, उसका लाभ गाँववासियों तक नहीं पहुँचा। यह सिर्फ कागज़ों में दिखाई देता है।”

फिलहाल जाँच के बिना कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है, लेकिन गाँव में असंतोष का माहौल लगातार बढ़ता जा रहा है।

पिपराइच विधानसभा क्षेत्र की स्थिति और मुख्य जानकारी

ज़िला: गोरखपुर (उत्तर प्रदेश का प्रमुख जिला, धार्मिक और राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र)।

विधानसभा क्षेत्र: पिपराइच विधानसभा, जो गोरखपुर जिले के उत्तर-पूर्वी हिस्से में आता है। यह क्षेत्र अपनी भौगोलिक और सामाजिक विविधता के लिए जाना जाता है।

मुख्य गाँव:

ग्राम रक्षावापर: पंचायत स्तर पर चर्चाओं के केंद्र में रहने वाला गाँव, जहाँ पर विकास कार्यों और फंड के उपयोग को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

ग्राम उनौला: यह गाँव हाल ही में अवै*ध मिट्टी खनन की वजह से चर्चा में आया है। ग्रामीणों का कहना है कि यहाँ खनन से खेतों और पर्यावरण को नुकसान हो रहा है।

प्रमुख मुद्दे:

अवै*ध खनन: मिट्टी और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के अवै*ध उत्खनन की घटनाएँ सामने आ रही हैं, जिससे पर्यावरण और खेती पर असर पड़ रहा है।

विकास कार्यों की पारदर्शिता: पंचायत को दिए गए फंड का उपयोग ठीक से हुआ या नहीं, इस पर ग्रामीण लगातार सवाल उठा रहे हैं।

पंचायत पर आरोप: ग्राम प्र*धान और उनके परिवार पर आरोप लग रहे हैं कि विकास कार्य अधूरे हैं और सरकारी योजनाएँ सिर्फ कागजों पर पूरी दिख रही हैं।

ग्रामीणों का असंतोष: गाँव में असंतोष बढ़ रहा है, लोग कहते हैं कि यदि पारदर्शिता और कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करेंगे।

 

रिपोर्ट : कोटो न्यूज़ नेटवर्क (KNN) 

 

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