अतिपिछड़ा एकीकरण महाअभियान की खाप पंचायत-2 में संवैधानिक संरक्षण और संयुक्त आंदोलन की रणनीति...
गोरखपुर। प्रदेश की 17 अतिपिछड़ी जातियों के संवैधानिक संरक्षण, शिक्षा में भेदभाव समाप्त करने और सामाजिक एकजुटता को मजबूत करने के उद्देश्य से रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को गोरखपुर के अंबिका मैरेज हॉल में अतिपिछड़ा एकीकरण महाअभियान (रजि.) की ओर से खाप पंचायत-2 का आयोजन किया गया। बैठक में विभिन्न जातीय संगठनों से जुड़े प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों और अधिवक्ताओं ने हिस्सा लिया। पंचायत में पिछली बैठक में उठाए गए मुद्दों पर चर्चा करते हुए प्रदेशव्यापी संयुक्त आंदोलन को आगे बढ़ाने, संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने और कानूनी पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक के अंत में आंदोलन की आगामी रणनीति तय करने तथा आजमगढ़ में संयुक्त आंदोलन की घोषणा के लिए तिथि और स्थान निर्धारित करने का निर्णय लिया गया।

सामाजिक एकता और आंदोलन की रणनीति
खाप पंचायत-2 की अध्यक्षता अतिपिछड़ा एकीकरण महाअभियान (रजि.) के संस्थापक अनिल कुमार प्रजापति ने की। आयोजकों के अनुसार, इससे पहले 4 अक्टूबर को संतकबीरनगर में हुई बैठक में जिन विषयों पर चर्चा हुई थी और जो बिंदु अनसुलझे रह गए थे, उन पर गोरखपुर की पंचायत में विस्तार से विचार किया गया। बैठक में उपस्थित बुद्धिजीवियों और प्रतिनिधियों ने सामाजिक एकता को आंदोलन की सफलता का महत्वपूर्ण आधार बताया। वक्ताओं ने जातिगत गुटबाजी और राजनीतिक दलों के प्रति अलग-अलग झुकाव से ऊपर उठकर साझा मुद्दों पर एकजुट होने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना था कि आपसी विघटन से समाज की सामूहिक शक्ति कमजोर होती है, इसलिए संवैधानिक अधिकारों और शिक्षा से जुड़े विषयों पर एक साझा मंच बनाकर आगे बढ़ना जरूरी है।
विधिक पक्ष पर अधिवक्ता ने दी जानकारी
बैठक में संगठन के विधिक सलाहकार एडवोकेट दीपक कुमार प्रजापति ने संवैधानिक और कानूनी पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, उन्होंने अनुच्छेद 341 के अनुपालन से जुड़े विषयों, 15 दिसंबर 2025 को दाखिल राज्य स्तरीय अपील, लखनऊ बेंच तथा इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेशों और सुप्रीम कोर्ट में आगे की कानूनी कार्रवाई की तैयारी के संबंध में अपनी बात रखी। उन्होंने संबंधित मामलों की प्रक्रिया और संगठन की ओर से किए जा रहे प्रयासों को बिंदुवार प्रस्तुत किया। आयोजकों का कहना है कि विधिक पक्ष की जानकारी मिलने के बाद उपस्थित लोगों ने संतोष व्यक्त किया। हालांकि, संबंधित अपीलों, न्यायालयों के आदेशों और प्रस्तावित कानूनी कार्रवाई की स्वतंत्र पुष्टि के लिए आधिकारिक दस्तावेजों का अवलोकन आवश्यक होगा।
कोर कमेटी के पुनर्गठन का निर्णय
पंचायत में संगठनात्मक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर भी चर्चा हुई। बैठक में निर्णय लिया गया कि प्रस्तावित कोर कमेटी में शामिल निष्क्रिय सदस्यों की भूमिका की समीक्षा की जाएगी और आंदोलन के प्रति सक्रिय तथा समर्पित लोगों को जिम्मेदारी देने पर विचार किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार, इसका उद्देश्य आंदोलन को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाना और निर्णय प्रक्रिया में जिम्मेदार प्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित करना है।
इसके साथ ही आजमगढ़ में संयुक्त आंदोलन की घोषणा को लेकर जल्द ही तिथि और स्थान तय करने का निर्णय लिया गया। इसके बाद आरक्षण समर्थकों और संबंधित संगठनों को सूचना देने की बात कही गई। बैठक में यह भी चर्चा हुई कि जो जातीय संगठन या राजनीतिक दल अपनी स्वतंत्र पहचान बनाए रखते हुए इस आंदोलन से जुड़ना चाहते हैं, उनके लिए विधिक और संगठनात्मक विकल्पों पर विचार किया जाएगा। हालांकि, कोर कमेटी में निष्पक्ष विचारधारा वाले लोगों को शामिल करने पर विशेष जोर दिया गया। इन निर्णयों को आंदोलन के भावी स्वरूप और समन्वय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया।

विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने रखे सुझाव
पंचायत में कई सामाजिक कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों और बुद्धिजीवियों ने अपने विचार तथा सुझाव रखे। इनमें राजेश तुरैहा, राजेश कुमार प्रजापति, कमलेश निषाद, रामनारायण प्रजापति, अल्हा प्रसाद मझवार, एडवोकेट मनोज प्रजापति, मनीष निषाद, एडवोकेट भोलानाथ प्रजापति, विनोद निषाद (प्रधान), पृथ्वीनाथ प्रजापति, मनोहर निषाद (प्रधान), रामभवन प्रजापति, जे.पी. साहनी, हीरालाल प्रजापति, रामजतन राजभर, कृष्णा प्रजापति, विमलेश राजभर, दिलीप प्रजापति, अनिल गोंड, बनवारी प्रजापति, सत्यपाल साहनी, पिंटू राजभर, अभय साहनी, रामतेरस कश्यप, अखिलेश गोंड, अमरेश निषाद, राजेन्द्र तुरैहा, रामबृक्ष निषाद, कैलाश बिंद, जितेन्द्र निषाद, भुलई कश्यप और भीम मल्लाह सहित अन्य लोग शामिल रहे।
बैठक के दौरान प्रदेश की राजनीति पर भी चर्चा हुई। आयोजकों के अनुसार, कुछ प्रतिभागियों ने विचार व्यक्त किया कि यदि विभिन्न अतिपिछड़ी जातियां साझा मुद्दों पर संगठित होती हैं, तो इसका प्रदेश की राजनीतिक परिस्थितियों पर प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल, संयुक्त आंदोलन की औपचारिक घोषणा, उसकी रूपरेखा और आगामी कार्यक्रमों की जानकारी संगठन की ओर से बाद में दिए जाने की बात कही गई है।
अंत में अतिपिछड़ा एकीकरण महाअभियान के संस्थापक अनिल कुमार प्रजापति ने पंचायत में शामिल सभी गणमान्य व्यक्तियों, प्रबंधन समिति के सदस्यों और पत्रकारों के प्रति आभार व्यक्त किया। आयोजकों के मुताबिक, शाम करीब छह बजे बैठक का समापन हुआ। अब सभी की नजरें आजमगढ़ में प्रस्तावित संयुक्त आंदोलन की तिथि, स्थान और घोषित कार्यक्रम पर टिकी हैं।
Report: Koto News Network