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गोरखपुर: 5 साल से लापता महिला के नाम पर पंचायत सहायक की ड्यूटी महराजी पंचायत में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर

भारत, 23 जनवरी 2026| जनपद गोरखपुर के थाना पिपराईच क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत महराजी में पंचायत सहायक पद पर की गई एक महिला की नियुक्ति को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों और स्थानीय सूत्रों का आरोप है कि संबंधित महिला पिछले लगभग पाँच वर्षों से “लापता/मिसिंग” बताई जा रही है, बावजूद इसके…

भारत, 23 जनवरी 2026| जनपद गोरखपुर के थाना पिपराईच क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत महराजी में पंचायत सहायक पद पर की गई एक महिला की नियुक्ति को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों और स्थानीय सूत्रों का आरोप है कि संबंधित महिला पिछले लगभग पाँच वर्षों से “लापता/मिसिंग” बताई जा रही है, बावजूद इसके पंचायत सहायक पद पर उसके नाम से नियमित कार्य, उपस्थिति और भुगतान दिखाया जा रहा है। यह मामला केवल एक नियुक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पूरी पंचायत व्यवस्था, सरकारी भर्ती प्रक्रिया और प्रशासनिक निगरानी पर सवाल उठने लगे हैं। यदि महिला वास्तव में वर्षों से अनुपस्थित है, तो यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि पंचायत के दैनिक कार्यों का निष्पादन कौन कर रहा है और किस आधार पर सरकारी धन का उपयोग किया जा रहा है।

मिसिंग” महिला के नाम पर पंचायत कार्य

ग्रामीणों के अनुसार पंचायत सहायक पद पर नियुक्त महिला को गांव में पिछले कई वर्षों से किसी ने देखा ही नहीं। कुछ ग्रामीणों का कहना है कि महिला के परिवार ने ही कभी-कभार यह बताया कि वह “कहीं बाहर” है, जबकि कुछ का दावा है कि उसकी गुमशुदगी को लेकर मौखिक चर्चाएं पहले से चलती आ रही हैं। इसके बावजूद पंचायत कार्यालय में उपस्थिति रजिस्टर, ऑनलाइन पोर्टल और अन्य अभिलेखों में उसका नाम सक्रिय रूप से दर्ज है।
ग्रामीणों का आरोप है कि किसी अन्य व्यक्ति द्वारा महिला के नाम पर पंचायत सहायक का कार्य किया जा रहा है, जो नियमों का घोर उल्लंघन है। यदि यह सही पाया गया तो यह मामला फर्जीवाड़ा, कूटरचना और सरकारी धन के दुरुपयोग की श्रेणी में आएगा।

नियमों की अनदेखी या प्रशासनिक मिलीभगत

पंचायत सहायक की नियुक्ति शासन द्वारा निर्धारित स्पष्ट नियमों और प्रक्रियाओं के तहत होती है। नियुक्त व्यक्ति का नियमित रूप से पंचायत में उपस्थित रहना, सरकारी पोर्टल पर कार्य करना, अभिलेख संधारण और जनसेवा कार्य अनिवार्य होता है। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति वर्षों से अनुपस्थित है और फिर भी उसके नाम से कार्य और मानदेय चल रहा है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि— क्या पंचायत स्तर पर जानबूझकर नियमों की अनदेखी की जा रही है क्या ग्राम सचिव, प्रधान या अन्य जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे प्रकरण से अवगत हैं क्या यह सब किसी प्रशासनिक मिलीभगत का परिणाम है
ग्रामीणों का कहना है कि इस मामले की अब तक कोई औपचारिक जांच नहीं की गई, जिससे संदेह और गहराता जा रहा है।

पंचायत की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल

ग्राम पंचायत महराजी में यह मामला सामने आने के बाद आम जनता में रोष है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत सहायक जैसे महत्वपूर्ण पद पर यदि फर्जी तरीके से कार्य दिखाया जा रहा है, तो यह केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की विफलता को दर्शाता है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि पंचायत से जुड़े कई कार्य—जैसे जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, सरकारी योजनाओं के आवेदन, ऑनलाइन प्रविष्टियां—सब कुछ किसी अनधिकृत व्यक्ति द्वारा किया जा रहा है, जिससे भविष्य में बड़े कानूनी और प्रशासनिक विवाद खड़े हो सकते हैं।

प्रशासन से उच्चस्तरीय जांच की मांग

ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी गोरखपुर, मुख्य विकास अधिकारी और पंचायत राज विभाग से इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। मांग की जा रही है कि— पंचायत सहायक की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए उपस्थिति रजिस्टर और भुगतान अभिलेखों की जांच हो यदि फर्जीवाड़ा पाया जाए तो दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए पंचायत व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इस मामले पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे जन आंदोलन और विधिक रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।

पंचायत सहायक पद की नियुक्ति उत्तर प्रदेश पंचायत राज विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों एवं शासनादेशों के अंतर्गत की जाती है। इन नियमों के अनुसार पंचायत सहायक का स्वयं ग्राम पंचायत में नियमित रूप से उपस्थित रहना अनिवार्य होता है। पंचायत सहायक को ग्राम सचिवालय में बैठकर पंचायत से संबंधित सभी प्रशासनिक, तकनीकी एवं ऑनलाइन कार्य स्वयं करने होते हैं।

नियम स्पष्ट रूप से यह भी कहते हैं कि पंचायत सहायक अपने कार्यों को किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से नहीं करवा सकता। प्रॉक्सी के माध्यम से कार्य कराना या किसी दूसरे व्यक्ति को अपने स्थान पर बैठाकर कार्य कराना पूरी तरह अवैध है और इसे सेवा शर्तों का गंभीर उल्लंघन माना जाता है।

इसके अतिरिक्त, पंचायत सहायक की उपस्थिति की पुष्टि ऑनलाइन पोर्टल, उपस्थिति रजिस्टर, कार्य रिपोर्ट और भुगतान अभिलेखों के माध्यम से की जाती है। यदि इन अभिलेखों में जानबूझकर गलत जानकारी दर्ज की जाती है या फर्जी उपस्थिति दर्शाई जाती है, तो यह केवल अनुशासनहीनता नहीं बल्कि आपराधिक कृत्य की श्रेणी में आता है।

शासनादेशों के अनुसार, यदि पंचायत सहायक लंबे समय तक अनुपस्थित रहता है और इसके बावजूद उसके नाम से कार्य एवं मानदेय का भुगतान किया जाता है, तो संबंधित पंचायत सहायक के साथ-साथ पंचायत स्तर के जिम्मेदार अधिकारियों की भी जवाबदेही तय की जाती है।

फर्जी उपस्थिति पर क्या है कार्रवाई का प्रावधान

नियमों के तहत यदि यह सिद्ध हो जाता है कि पंचायत सहायक की उपस्थिति फर्जी है या उसके नाम पर कोई अन्य व्यक्ति कार्य कर रहा है, तो सबसे पहले उसकी सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त की जा सकती है। इसके साथ-साथ उसे प्राप्त किए गए मानदेय की वसूली का भी प्रावधान है।

इसके अतिरिक्त, मामला गंभीर पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इस प्रकार के मामलों में प्रशासन द्वारा पुलिस और विभागीय जांच दोनों कराई जाती हैं, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि सरकारी धन का दुरुपयोग तो नहीं हुआ है।

संभावित धाराएं

यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो इस प्रकरण में भारतीय दंड संहिता अथवा भारतीय न्याय संहिता (BNSS) के तहत कई धाराएं लागू हो सकती हैं। इनमें प्रमुख रूप से धोखाधड़ी की धारा लग सकती है, क्योंकि सरकारी पद और धन का गलत तरीके से लाभ उठाया गया है।

इसके अलावा, कूटरचना और फर्जी दस्तावेज तैयार करने की धाराएं भी लागू हो सकती हैं, यदि उपस्थिति रजिस्टर, ऑनलाइन रिकॉर्ड या अन्य सरकारी दस्तावेजों में जानबूझकर गलत प्रविष्टियां की गई हों।

यदि यह प्रमाणित होता है कि फर्जी उपस्थिति के आधार पर मानदेय का भुगतान हुआ है, तो यह सरकारी धन के दुरुपयोग की श्रेणी में आएगा, जो एक गंभीर आर्थिक अपराध माना जाता है।

साथ ही, इस पूरे प्रकरण में यदि ग्राम सचिव, प्रधान या अन्य संबंधित अधिकारी लापरवाही के दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जा सकती है। इसमें निलंबन, वेतन रोकना या सेवा नियमों के तहत अन्य दंड शामिल हो सकते हैं।

रिपोर्ट : कोटो न्यूज़ नेटवर्क (KNN) |

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