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जल संरक्षण को लेकर पानी बचाओ महासंघ का बड़ा अभियान

कोटो महासंघ देश संवाददाता, 21 मई 2026 | देवरिया जनपद में लगातार बढ़ रहे जलसंकट, भूजल दोहन और जलप्रदूषण जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर सामाजिक संगठन पानी बचाओ महासंघ एक बार फिर सक्रिय दिखाई दे रहा है। संगठन की महिला मोर्चा की मासिक बैठक दिनांक 22 मई 2026, शुक्रवार को कैम्प कार्यालय देवरिया खास में…

कोटो महासंघ देश संवाददाता, 21 मई 2026 | देवरिया जनपद में लगातार बढ़ रहे जलसंकट, भूजल दोहन और जलप्रदूषण जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर सामाजिक संगठन पानी बचाओ महासंघ एक बार फिर सक्रिय दिखाई दे रहा है। संगठन की महिला मोर्चा की मासिक बैठक दिनांक 22 मई 2026, शुक्रवार को कैम्प कार्यालय देवरिया खास में आयोजित की जाएगी। बैठक में जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, नदियों और तालाबों के संरक्षण तथा आमजन में जागरूकता फैलाने जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा होगी। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि समय रहते जल संरक्षण को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में स्थिति और भयावह हो सकती है।

पानी बचाओ महासंघ के पदाधिकारी विजय जुआठा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि महिला मोर्चा की यह मासिक बैठक समाज में जल संरक्षण के प्रति चेतना जगाने के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है। बैठक में विशेष रूप से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में तेजी से घटते भूजल स्तर, हैंडपंपों के सूखने, नदियों में प्रदूषण और अवैध जल दोहन पर चर्चा की जाएगी। संगठन का मानना है कि जल संकट केवल पर्यावरण का विषय नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुका है।

बैठक में महिला कार्यकर्ताओं को गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करने की जिम्मेदारी भी सौंपी जाएगी। संगठन का कहना है कि महिलाएं जल संरक्षण अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं क्योंकि घरेलू स्तर पर पानी के उपयोग और बचत में उनका सीधा योगदान होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए महिला मोर्चा की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, बैठक में जलदोहन और जलप्रदूषण के बढ़ते मामलों पर चिंता व्यक्त की जाएगी। पिछले कुछ वर्षों में भूजल का अत्यधिक दोहन होने के कारण कई इलाकों में पानी का स्तर तेजी से नीचे गया है। वहीं, औद्योगिक कचरे, प्लास्टिक और रासायनिक पदार्थों के कारण नदियों और तालाबों का पानी भी दूषित होता जा रहा है।

संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि शहरों और कस्बों में बिना योजना के हो रहे निर्माण कार्य, पेड़ों की कटाई और प्राकृतिक जलस्रोतों के अतिक्रमण ने समस्या को और गंभीर बना दिया है। यदि प्रशासन और समाज मिलकर प्रयास नहीं करेगा तो आने वाले वर्षों में पीने के पानी की भारी किल्लत पैदा हो सकती है। बैठक में इस दिशा में जनजागरण अभियान चलाने की रणनीति भी बनाई जाएगी।

महिला मोर्चा की बैठक में वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जाएगा। विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि घरों, सरकारी भवनों और विद्यालयों में वर्षा जल संचयन की व्यवस्था की जाए तो भूजल स्तर को काफी हद तक सुधारा जा सकता है। इसके अलावा गांवों में पुराने तालाबों और कुओं का पुनर्जीवन भी जल संरक्षण की दिशा में प्रभावी कदम माना जा रहा है।

संगठन की ओर से यह भी कहा गया कि वर्तमान समय में लोग पानी के महत्व को समझने के बजाय उसका अत्यधिक दुरुपयोग कर रहे हैं। कई स्थानों पर पाइपलाइन लीकेज, खुले नलों और अनावश्यक पानी बहाने जैसी समस्याएं आम हो चुकी हैं। बैठक में इन मुद्दों पर चर्चा कर लोगों को जिम्मेदार नागरिक बनने का संदेश दिया जाएगा।

पानी बचाओ महासंघ की महिला मोर्चा की यह बैठक केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं बल्कि जल संरक्षण आंदोलन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। संगठन का उद्देश्य है कि समाज के हर वर्ग तक जल बचाने का संदेश पहुंचे और लोग अपने स्तर पर छोटे-छोटे प्रयास शुरू करें। बैठक में महिला कार्यकर्ताओं के साथ-साथ सामाजिक कार्यकर्ता, पर्यावरण प्रेमी और स्थानीय नागरिक भी भाग लेंगे।

संगठन के पदाधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे जल संरक्षण को अपनी दैनिक आदतों में शामिल करें। पेड़ लगाना, वर्षा जल संचयन करना, पानी की बर्बादी रोकना और जलस्रोतों की सफाई में सहयोग देना जैसे कदम भविष्य को सुरक्षित बना सकते हैं। विजय जुआठा ने कहा कि “जल ही जीवन है और यदि आज पानी नहीं बचाया गया तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी।”

जल संरक्षण के लिए संगठन की प्रमुख अपीलें

देश और समाज के सामने तेजी से गहराते जलसंकट को देखते हुए पानी बचाओ महासंघ ने आमजन से जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की अपील की है। संगठन का कहना है कि यदि वर्तमान समय में जल के महत्व को नहीं समझा गया तो आने वाले वर्षों में स्थिति अत्यंत गंभीर हो सकती है। इसी उद्देश्य से महिला मोर्चा की मासिक बैठक में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी तथा लोगों को जागरूक करने का संकल्प लिया जाएगा।

वर्षा जल संचयन को अपनाएं

संगठन ने लोगों से अपील की है कि वे अपने घरों, विद्यालयों, सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक भवनों में वर्षा जल संचयन प्रणाली को अनिवार्य रूप से अपनाएं। हर वर्ष लाखों लीटर वर्षा का पानी बिना उपयोग के बह जाता है, जबकि यही पानी भविष्य में पेयजल संकट को कम कर सकता है। यदि प्रत्येक परिवार अपने घर की छत से वर्षा जल को संरक्षित करे तो भूजल स्तर को बढ़ाने में बड़ी सहायता मिल सकती है। संगठन का मानना है कि वर्षा जल संचयन केवल सरकारी योजना नहीं बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी बननी चाहिए।

घरों में पानी की बर्बादी रोकें

महासंघ ने कहा कि जल संरक्षण की शुरुआत घर से ही होती है। खुले नल छोड़ना, जरूरत से ज्यादा पानी बहाना, वाहन धोने में अत्यधिक पानी का प्रयोग और पाइपलाइन लीकेज जैसी छोटी लापरवाहियां भी बड़े जल संकट का कारण बनती हैं। संगठन ने लोगों से अपील की कि वे दैनिक जीवन में पानी का सीमित और जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग करें। बच्चों और युवाओं को भी पानी बचाने की आदत सिखाई जाए ताकि आने वाली पीढ़ियां जल के महत्व को समझ सकें।

तालाब, कुएं और नदियों को बचाएं

बैठक में पारंपरिक जलस्रोतों के संरक्षण पर विशेष जोर दिया जाएगा। संगठन का कहना है कि गांवों और शहरों में स्थित पुराने तालाब, कुएं और नदियां कभी जल संरक्षण का मुख्य आधार हुआ करते थे, लेकिन आज अतिक्रमण, गंदगी और उपेक्षा के कारण ये समाप्त होते जा रहे हैं। यदि इन जलस्रोतों का पुनर्जीवन किया जाए तो जल संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है। संगठन ने प्रशासन से भी मांग की है कि तालाबों और नदियों पर हो रहे अवैध कब्जों को तत्काल हटाया जाए।

भूजल के अत्यधिक दोहन पर रोक लगे

पानी बचाओ महासंघ ने भूजल के अंधाधुंध दोहन पर चिंता व्यक्त की है। लगातार बोरिंग और ट्यूबवेल के अत्यधिक प्रयोग से कई क्षेत्रों में भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है। कई गांवों में हैंडपंप सूखने लगे हैं और लोगों को पीने के पानी के लिए दूर-दूर तक भटकना पड़ रहा है। संगठन का कहना है कि यदि भूजल का संतुलित उपयोग नहीं किया गया तो भविष्य में पेयजल का गंभीर संकट पैदा हो सकता है। इस विषय पर सरकार और प्रशासन को सख्त नीति बनाने की आवश्यकता है।

जलप्रदूषण फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई हो

महासंघ ने नदियों, तालाबों और अन्य जलस्रोतों में बढ़ते प्रदूषण पर भी चिंता जताई है। औद्योगिक कचरा, प्लास्टिक, रासायनिक पदार्थ और घरेलू गंदगी जलस्रोतों को लगातार दूषित कर रही है। इससे न केवल जल की गुणवत्ता खराब हो रही है बल्कि लोगों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। संगठन ने मांग की कि जलप्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और स्वच्छ जल अभियान को मजबूती दी जाए।

हर गांव और वार्ड में जल जागरूकता अभियान चलाया जाए

संगठन का मानना है कि केवल सरकारी योजनाओं से जल संकट का समाधान संभव नहीं है, बल्कि समाज की भागीदारी भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से हर गांव, कस्बे और वार्ड में जल जागरूकता अभियान चलाने की योजना बनाई जा रही है। महिला मोर्चा की कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को जल संरक्षण का संदेश देंगी। स्कूलों और सामाजिक कार्यक्रमों के माध्यम से भी लोगों को जागरूक किया जाएगा ताकि जल बचाने की सोच समाज का हिस्सा बन सके।

अधिक से अधिक पेड़ लगाए जाएं

बैठक में पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण पर भी जोर दिया जाएगा। संगठन का कहना है कि पेड़-पौधे प्राकृतिक जल संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पेड़ों की कटाई से वर्षा प्रभावित होती है और जलस्तर लगातार गिरता है। इसलिए प्रत्येक नागरिक को अधिक से अधिक पेड़ लगाने और उनकी देखभाल करने का संकल्प लेना चाहिए। वृक्षारोपण को जल संरक्षण अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जाएगा।

रिपोर्ट : कोटो न्यूज़ नेटवर्क (KNN) |

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