भारत ,23 जनवरी 2026 | बसंत पंचमी के पावन अवसर पर आज चारपानी स्थित निषादधाम मंदिर परिसर में ज्ञान, साहित्य, कला और संस्कृति की देवी मां सरस्वती के अवतार दिवस के उपलक्ष्य में भव्य एवं गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर ऋतुराज बसंत के आगमन पर्व की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक छटा देखते ही बन रही थी। पीले वस्त्रों से सुसज्जित श्रद्धालु, बच्चों की मधुर वाणी में सरस्वती वंदना, और मंदिर परिसर में गूंजते मंत्रोच्चार ने वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया। इस विशेष आयोजन का नेतृत्व समाजसेवी श्री दिनेश निषाद ने किया, जिनके मार्गदर्शन में निषाद एजुकेशन सेंटर द्वारा संचालित निःशुल्क शिक्षा अभियान को समाज के हर वर्ग से अपार समर्थन प्राप्त हुआ। कार्यक्रम में शिक्षा, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक जागरूकता का अद्भुत संगम देखने को मिला।

बसंत पंचमी को भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व प्राप्त है। यह पर्व न केवल ऋतुओं के परिवर्तन का संकेत देता है, बल्कि ज्ञान, विवेक और सृजनशीलता के आरंभ का भी प्रतीक है। मां सरस्वती को ज्ञान, वाणी, संगीत और कला की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। इसी विश्वास के साथ निषादधाम मंदिर चारपानी में आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत विधिवत पूजा-अर्चना और सरस्वती वंदना से हुई। वैदिक मंत्रों के बीच श्रद्धालुओं ने मां सरस्वती से जीवन में विद्या, विवेक और सद्बुद्धि की कामना की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता, स्थानीय ग्रामीण और बुद्धिजीवी वर्ग के लोग उपस्थित रहे। पीले फूलों, आम की पत्तियों और रंग-बिरंगी सजावट से मंदिर परिसर बसंत के उल्लास से सराबोर नजर आया।

इस अवसर पर समाजसेवी श्री दिनेश निषाद ने अपने संबोधन में कहा कि “मां सरस्वती केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वह समाज के हर उस प्रयास में विराजमान हैं, जहां अज्ञान से ज्ञान की ओर यात्रा होती है।” उन्होंने निषाद एजुकेशन सेंटर के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर, वंचित और पिछड़े वर्ग के बच्चों को निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना ही इस संस्था का मुख्य लक्ष्य है उन्होंने बताया कि निषाद एजुकेशन सेंटर अब तक सैकड़ों बच्चों को निःशुल्क शिक्षा, पुस्तकें, कॉपी, पेन और मार्गदर्शन उपलब्ध करा चुका है। शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे सशक्त माध्यम बताते हुए उन्होंने युवाओं से आगे आकर इस अभियान से जुड़ने की अपील की।

कार्यक्रम के दौरान बच्चों द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना, कविता पाठ, नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने सभी का मन मोह लिया। विशेष रूप से ग्रामीण पृष्ठभूमि से आए बच्चों की प्रस्तुति ने यह सिद्ध कर दिया कि यदि सही मंच और मार्गदर्शन मिले तो प्रतिभा किसी संसाधन की मोहताज नहीं होती। शिक्षकों और अतिथियों ने बच्चों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से बच्चों में आत्मविश्वास, संस्कार और सामाजिक चेतना का विकास होता है। इस अवसर पर कई मेधावी छात्रों को प्रतीकात्मक रूप से सम्मानित भी किया गया, जिससे उनके उत्साह में और वृद्धि हुई।
बसंत पंचमी के इस आयोजन ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि धार्मिक आस्था और सामाजिक उत्तरदायित्व एक-दूसरे के पूरक हैं। निषादधाम मंदिर केवल पूजा स्थल नहीं, बल्कि शिक्षा, सेवा और सामाजिक उत्थान का केंद्र बनकर उभर रहा है। स्थानीय ग्रामीणों ने इस पहल की खुले दिल से सराहना की और कहा कि ऐसे आयोजन समाज को सकारात्मक दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं कार्यक्रम के समापन पर सामूहिक प्रसाद वितरण किया गया, जिसमें सभी वर्गों के लोगों ने समान रूप से भाग लिया। वातावरण में आपसी भाईचारे, सौहार्द और एकता की भावना स्पष्ट रूप से देखने को मिली।

निषाद एजुकेशन सेंटर : शिक्षा, संस्कार और सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम
निषाद एजुकेशन सेंटर केवल एक शिक्षण संस्था नहीं, बल्कि समाज के उस वर्ग के लिए आशा की किरण है, जो आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक रूप से लंबे समय से वंचित रहा है। यह केंद्र इस विश्वास के साथ कार्य कर रहा है कि शिक्षा ही वह माध्यम है, जो किसी भी समाज को अज्ञान, असमानता और पिछड़ेपन से निकालकर विकास और सम्मान की राह प0र ले जा सकता है।
समाज के वंचित वर्ग के बच्चों के लिए निःशुल्क शिक्षा
निषाद एजुकेशन सेंटर का प्रमुख उद्देश्य समाज के वंचित, गरीब, पिछड़े और ग्रामीण परिवेश से आने वाले बच्चों को पूर्णतः निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है। ऐसे बच्चे, जिनके माता-पिता आर्थिक मजबूरियों के कारण शिक्षा का खर्च उठाने में असमर्थ हैं, उनके लिए यह केंद्र एक सुरक्षित और प्रेरणादायक शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराता है। यहां बच्चों को बिना किसी भेदभाव के समान अवसर दिए जाते हैं, जिससे वे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें।
निःशुल्क पुस्तकें, स्टेशनरी एवं शैक्षणिक मार्गदर्शन
कई बार बच्चों की पढ़ाई केवल फीस के अभाव में ही नहीं, बल्कि किताबों, कॉपियों और स्टेशनरी जैसी बुनियादी आवश्यकताओं की कमी के कारण भी बाधित हो जाती है। निषाद एजुकेशन सेंटर इस समस्या को गंभीरता से समझते हुए विद्यार्थियों को निःशुल्क पुस्तकें, कॉपी, पेन और अन्य आवश्यक शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराता है।
इसके साथ-साथ बच्चों को विषय-विशेष का मार्गदर्शन, परीक्षा की तैयारी, भविष्य की योजना और करियर से जुड़ी सलाह भी दी जाती है, ताकि वे केवल पढ़ाई तक सीमित न रहें, बल्कि जीवन के प्रति एक स्पष्ट दृष्टिकोण विकसित कर सकें।
नैतिक शिक्षा और संस्कारों पर विशेष जोर
निषाद एजुकेशन सेंटर मानता है कि शिक्षा केवल डिग्री या अंकों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। नैतिक शिक्षा, संस्कार, अनुशासन, ईमानदारी, परस्पर सम्मान और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे मूल्य भी उतने ही आवश्यक हैं।
इसी उद्देश्य से यहां बच्चों को नैतिक कथाएं, प्रेरक प्रसंग, महापुरुषों के जीवन चरित्र और सामाजिक मूल्यों की शिक्षा दी जाती है, जिससे वे एक अच्छे विद्यार्थी के साथ-साथ एक अच्छे नागरिक भी बन सकें।
ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा के प्रति जागरूकता अभियान
ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी शिक्षा को लेकर कई प्रकार की सामाजिक और आर्थिक चुनौतियां मौजूद हैं। निषाद एजुकेशन सेंटर इन चुनौतियों को दूर करने के लिए शिक्षा जागरूकता अभियान चलाता है।
इन अभियानों के माध्यम से अभिभावकों को यह समझाया जाता है कि शिक्षा केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि समाज के संपूर्ण विकास की नींव है। बाल शिक्षा, बालिका शिक्षा और स्कूल छोड़ चुके बच्चों को दोबारा शिक्षा से जोड़ने के लिए केंद्र निरंतर प्रयासरत है।
समाजसेवी श्री दिनेश निषाद के नेतृत्व में संचालित
निषाद एजुकेशन सेंटर का संचालन समाजसेवी श्री दिनेश निषाद के नेतृत्व में किया जा रहा है, जिनका मानना है कि “जब तक समाज का अंतिम व्यक्ति शिक्षित नहीं होगा, तब तक वास्तविक विकास अधूरा रहेगा।”
उनकी दूरदृष्टि, सामाजिक प्रतिबद्धता और सेवा भावना ने इस केंद्र को केवल एक संस्था नहीं, बल्कि एक जनआंदोलन का रूप दे दिया है। उनके नेतृत्व में यह केंद्र निरंतर आगे बढ़ रहा है और समाज में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
बसंत पंचमी का सांस्कृतिक महत्व : ज्ञान, सृजन और नवचेतना का पर्व
भारतीय संस्कृति में बसंत पंचमी का विशेष और पावन स्थान है। यह पर्व ज्ञान, विद्या, कला और संगीत की देवी मां सरस्वती की आराधना का दिन माना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन मां सरस्वती प्रकट हुई थीं और उन्होंने संसार को ज्ञान, वाणी और विवेक का वरदान दिया।
ज्ञान और विद्या की देवी ,मां सरस्वती की आराधना
बसंत पंचमी के दिन विद्यालयों, मंदिरों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। विद्यार्थी अपनी पुस्तकों, वाद्ययंत्रों और लेखन सामग्री को मां के चरणों में रखकर विद्या, बुद्धि और सफलता की कामना करते हैं। यह दिन विद्यार्थियों के लिए विशेष प्रेरणा का स्रोत माना जाता है।
ऋतुराज बसंत का स्वागत
बसंत पंचमी के साथ ही ऋतुराज बसंत का आगमन माना जाता है। प्रकृति में हरियाली, फूलों की सुगंध, खेतों में लहलहाती फसलें और वातावरण में उल्लास इस ऋतु की पहचान हैं। पीले वस्त्र, पीले फूल और आनंदमय माहौल बसंत पंचमी की सुंदरता को और बढ़ा देते हैं।
कला, संगीत और साहित्य के आरंभ का पर्व
बसंत पंचमी को कला, संगीत और साहित्य के क्षेत्र में नई शुरुआत के लिए शुभ माना जाता है। अनेक कलाकार, लेखक और विद्यार्थी इस दिन अपने रचनात्मक कार्यों की शुरुआत करते हैं। यह पर्व सृजनशीलता, कल्पनाशीलता और सांस्कृतिक चेतना को प्रोत्साहित करता है।
भारतीय संस्कृति में शुभ कार्यों की शुरुआत का दिन
भारतीय परंपरा में बसंत पंचमी को शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए अत्यंत मंगलकारी माना गया है। शिक्षा प्रारंभ, विवाह, गृह प्रवेश और नए कार्यों की योजना इस दिन विशेष रूप से की जाती है। यह पर्व जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, आशा और नवीनता का संदेश देता है।
रिपोर्ट : कोटो न्यूज़ नेटवर्क (KNN) |