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रोजगार, महंगाई और कानून-व्यवस्था पर भासपा का बीजेपी सरकार पर हमला, 2027 चुनाव को लेकर बड़ा दावा

चौरी चौरा, गोरखपुर |भारतीय सर्वजन पार्टी (भासपा) उत्तर प्रदेश के प्रभारी एडवोकेट श्रवण कुमार निषाद ने 26 अगस्त 2026 को चौरी चौरा स्थित कैंप कार्यालय से जारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर कई गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने रोजगार, शिक्षा, महंगाई, कानून-व्यवस्था, निजी स्कूलों की फीस तथा सामाजिक एवं संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए।

प्रेस विज्ञप्ति में एडवोकेट श्रवण कुमार निषाद ने कहा कि प्रदेश में युवाओं और छात्रों के सामने रोजगार तथा शिक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल हैं। उनके अनुसार, सरकार से रोजगार और शिक्षा की मांग करने वाले युवाओं के साथ पुलिस कार्रवाई किए जाने की घटनाओं से लोगों में असंतोष है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को युवाओं की मांगों को सुनने और उनके समाधान की दिशा में प्रभावी कदम उठाने चाहिए, न कि आंदोलन कर रहे लोगों पर बल प्रयोग का रास्ता अपनाना चाहिए।

श्री निषाद ने महंगाई के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि रसोई गैस, चीनी, प्याज, डीजल, पेट्रोल, लहसुन तथा रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी वस्तुओं की कीमतों को लेकर आम परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ा है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि जब परिवारों की आय और रोजगार से जुड़ी समस्याएं बनी हुई हैं, तब लगातार बढ़ती घरेलू जरूरतों की लागत का सामना आम नागरिक किस प्रकार कर रहा है।

उन्होंने कहा कि महंगाई केवल बाजार का मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर परिवार के बजट, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, आवागमन और भोजन पर पड़ता है। उनके मुताबिक, सरकार को आम नागरिक की आर्थिक परेशानियों को प्राथमिकता देते हुए ऐसे कदम उठाने चाहिए, जिनसे रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों का दबाव कम हो और मध्यम एवं निम्न आय वाले परिवारों को राहत मिल सके।

रोजगार और शिक्षा को लेकर सरकार पर निशाना

भासपा प्रदेश प्रभारी ने युवाओं के रोजगार के सवाल को प्रदेश की राजनीति का महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि युवा शिक्षा प्राप्त करने के बाद रोजगार की तलाश में हैं और सरकार से अवसरों की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि रोजगार की मांग को लेकर आवाज उठाने वाले युवाओं के प्रति सरकार का रवैया संवेदनशील होना चाहिए। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई। श्री निषाद ने कहा कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था के साथ-साथ निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों पर भी आर्थिक दबाव है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई निजी स्कूलों में फीस, कॉपी-किताब, ड्रेस और अन्य मदों के नाम पर अभिभावकों से अधिक राशि ली जाती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा प्रत्येक परिवार के लिए महत्वपूर्ण आवश्यकता है और बच्चों की पढ़ाई का खर्च इतना अधिक नहीं होना चाहिए कि गरीब एवं मध्यम वर्गीय परिवार अपने बच्चों की शिक्षा को लेकर परेशान हो जाएं। उन्होंने सरकार से निजी विद्यालयों की फीस तथा अन्य शुल्कों से जुड़े नियमों की प्रभावी निगरानी की मांग की।

महंगाई को लेकर सरकार से जवाब की मांग

श्री निषाद ने महंगाई के मुद्दे पर सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि आम आदमी के लिए रसोई चलाना लगातार चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। उनके अनुसार, खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतों में होने वाले बदलाव का प्रभाव सीधे घरेलू बजट पर पड़ता है।उन्होंने कहा कि किसी परिवार की आय का बड़ा हिस्सा यदि भोजन, ईंधन, बच्चों की पढ़ाई और अन्य आवश्यकताओं में खर्च हो जाए तो बचत और अन्य जरूरतों के लिए बहुत कम राशि बचती है। ऐसे में सरकार को महंगाई के कारणों और उसके प्रभावों पर गंभीरता से काम करना चाहिए। श्री निषाद ने कहा कि राजनीतिक दलों और सरकारों की प्राथमिकता में आम नागरिक की बुनियादी जरूरतें होनी चाहिए। उन्होंने रोजगार के अवसर बढ़ाने, शिक्षा को सुलभ बनाने तथा रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए ठोस नीतिगत कदम उठाने की मांग की।

कानून-व्यवस्था पर भी सवाल

प्रेस विज्ञप्ति में भासपा प्रदेश प्रभारी ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार के कार्यकाल में मारपीट और हत्या जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं और आम नागरिकों में सुरक्षा को लेकर चिंता है। हालांकि, इन आरोपों के संबंध में प्रेस विज्ञप्ति में किसी विशिष्ट घटना, मुकदमे या आधिकारिक आंकड़े का उल्लेख नहीं किया गया है। श्री निषाद ने राजनीतिक स्तर पर सरकार से कानून-व्यवस्था को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों को अपने घर, परिवार और सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षित महसूस करना चाहिए। सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि कानून का पालन सुनिश्चित किया जाए तथा अपराध की घटनाओं पर प्रभावी कार्रवाई हो। उन्होंने यह भी कहा कि कानून-व्यवस्था को लेकर जनता के बीच विश्वास बनाए रखने के लिए पुलिस और प्रशासन को निष्पक्ष तथा पारदर्शी तरीके से काम करना चाहिए।

संविधान और भोजन की स्वतंत्रता का मुद्दा

प्रेस विज्ञप्ति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा सामाजिक एवं संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा रहा। एडवोकेट श्रवण कुमार निषाद ने कहा कि भारतीय संविधान नागरिकों को विभिन्न मौलिक स्वतंत्रताएं प्रदान करता है। उन्होंने विशेष रूप से व्यक्ति की पसंद, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, देश में आने-जाने तथा धार्मिक आस्था एवं उपासना से जुड़े अधिकारों का उल्लेख किया। उन्होंने निषाद समाज के खान-पान और पारंपरिक जीवनशैली का उल्लेख करते हुए कहा कि केवट, मल्लाह, बिंद, माझी और तुरैहा सहित निषाद समाज से जुड़े अनेक परिवारों की आजीविका और जीवनशैली का मछली पालन तथा मछली पकड़ने से पुराना संबंध रहा है। श्री निषाद ने कहा कि जहां निषाद समाज की पर्याप्त उपस्थिति है, वहां मछली-भात-रोटी जैसे भोजन को समाज के पारंपरिक खान-पान का हिस्सा माना जाता है। उन्होंने कहा कि किसी समुदाय की भोजन संबंधी परंपराओं को समझने के लिए उसके सामाजिक और आर्थिक संदर्भ को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि संविधान नागरिकों को अपनी व्यक्तिगत पसंद और जीवनशैली के संबंध में अधिकार देता है। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति या समूह को निषाद समाज के पारंपरिक भोजन से आपत्ति है तो वह निषाद समाज से दूरी बना सकता है। इस बयान के माध्यम से श्री निषाद ने सामाजिक विविधता और खान-पान की स्वतंत्रता के मुद्दे को राजनीतिक विमर्श से जोड़ने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग समुदायों की अपनी परंपराएं, जीवनशैली और भोजन की आदतें होती हैं और लोकतांत्रिक समाज में एक-दूसरे की विविधता का सम्मान किया जाना चाहिए।

सामाजिक पहचान और अधिकारों पर जोर

श्री निषाद ने कहा कि निषाद समाज की सामाजिक पहचान केवल राजनीतिक प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके साथ परंपरागत व्यवसाय, आजीविका और सामाजिक अधिकार भी जुड़े हुए हैं। उन्होंने मछली पालन और मछली पकड़ने को समाज के अनेक परिवारों की आजीविका का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि समाज के परंपरागत काम से जुड़े लोगों को आर्थिक अवसर, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सम्मान मिलना चाहिए। उनके अनुसार, सरकार की नीतियों का उद्देश्य समाज के सभी वर्गों को समान अवसर उपलब्ध कराना होना चाहिए।उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी समुदाय की सामाजिक एवं सांस्कृतिक पहचान का सम्मान लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए आवश्यक है। उनके मुताबिक, समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संवाद और संवैधानिक मूल्यों के प्रति सम्मान को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

2027 विधानसभा चुनाव को लेकर भासपा की तैयारी

प्रेस विज्ञप्ति के अंतिम हिस्से में एडवोकेट श्रवण कुमार निषाद ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भारतीय सर्वजन पार्टी की राजनीतिक रणनीति का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक निषाद के नेतृत्व में आगामी विधानसभा चुनाव पूरी मजबूती के साथ लड़ेगी। श्री निषाद ने दावा किया कि भारतीय सर्वजन पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव में प्रभावी भूमिका निभाएगी और गठबंधन की सरकार बनाने की दिशा में काम करेगी। हालांकि, उन्होंने इस प्रेस विज्ञप्ति में किसी संभावित गठबंधन के सहयोगी दलों या सीटों के बंटवारे को लेकर कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से संगठन को मजबूत करने और जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर लोगों के बीच जाने का आह्वान किया। उनके अनुसार, आने वाले समय में रोजगार, शिक्षा, महंगाई, सामाजिक अधिकार और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे राजनीतिक बहस के केंद्र में रहेंगे।उन्होंने कहा कि भारतीय सर्वजन पार्टी जनता के बीच अपनी राजनीतिक विचारधारा और नीतियों को लेकर जाएगी तथा आगामी विधानसभा चुनाव में अपनी ताकत का प्रदर्शन करेगी।

जनता के मुद्दों को राजनीतिक एजेंडे में शामिल करने का दावा

एडवोकेट श्रवण कुमार निषाद ने कहा कि राजनीतिक दलों को चुनाव के दौरान केवल वादों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जनता की वास्तविक समस्याओं को समझकर उनके समाधान की स्पष्ट योजना प्रस्तुत करनी चाहिए। उन्होंने रोजगार, शिक्षा और महंगाई को आम नागरिक से जुड़े बुनियादी मुद्दे बताते हुए कहा कि इन विषयों पर राजनीतिक दलों को अपनी नीतियां स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगार, छात्रों को बेहतर शिक्षा और परिवारों को आर्थिक राहत उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में होना चाहिए। उनके अनुसार, लोकतंत्र में जनता ही अंतिम निर्णयकर्ता होती है और चुनाव के दौरान जनता अपने अनुभवों तथा सरकार के कामकाज के आधार पर राजनीतिक दलों का मूल्यांकन करती है।

बयान के राजनीतिक मायने

भारतीय सर्वजन पार्टी की ओर से जारी यह प्रेस विज्ञप्ति ऐसे समय में आई है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की गतिविधियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं। छोटे और क्षेत्रीय दल सामाजिक समूहों के बीच अपनी राजनीतिक पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। भासपा प्रदेश प्रभारी का बयान भी इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में देखा जा सकता है। पार्टी ने एक तरफ बीजेपी सरकार पर रोजगार, शिक्षा, महंगाई और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों को लेकर निशाना साधा है, वहीं दूसरी तरफ निषाद समाज तथा उससे जुड़े पारंपरिक व्यवसायों और सामाजिक अधिकारों को अपने राजनीतिक विमर्श में प्रमुखता दी है। पार्टी के लिए आगामी चुनाव में सबसे बड़ी चुनौती अपने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करना, जनता के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ाना और राजनीतिक गठबंधन की संभावनाओं को स्पष्ट करना हो सकती है।

श्री निषाद के बयान से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि भारतीय सर्वजन पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी राजनीतिक गतिविधियों को तेज करने की तैयारी में है। पार्टी का दावा है कि वह राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक निषाद के नेतृत्व में चुनाव मैदान में मजबूती से उतरेगी।

रिपोर्ट : कोटो न्यूज़ नेटवर्क (KNN) |  

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