संवादाताः कोटो न्यूज़ नेटवर्क (KNN) | नई दिल्ली। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग ने आज एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए निपमैन फाउंडेशन और यंग लीडर्स फॉर एक्टिव सिटिजनशिप (वाईएलएसी) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इस साझेदारी के अंतर्गत ‘ब्रेकिंग बैरियर्स फ़ेलोशिप’ की शुरुआत की गई है। इस पहल का उद्देश्य दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण, नीतिगत सहयोग और कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन को नई दिशा देना है। समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के निदेशक श्री आशीष ठाकरे, निपमैन फाउंडेशन के संस्थापक श्री निपुण मल्होत्रा, और वाईएलएसी के सह-संस्थापक श्री रोहित कुमार ने किए। इस अवसर पर विभाग के सचिव श्री राजेश अग्रवाल तथा अतिरिक्त सचिव सुश्री मनमीत कौर नंदा भी मौजूद रहे। यह समझौता एक वर्ष के लिए मान्य रहेगा, जिसे आपसी सहमति से आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
ब्रेकिंग बैरियर्स फ़ेलोशिप के माध्यम से योग्य युवा पेशेवरों को मंत्रालय एवं विभागीय कार्यालयों में नियुक्त किया जाएगा। ये फ़ेलोज़ न केवल नीतिगत सुझाव देंगे, बल्कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के प्रभावी अनुपालन को भी सुनिश्चित करेंगे। इस दौरान फ़ेलोज़ को सरकारी तंत्र के साथ कार्य करने का अनुभव, मार्गदर्शन और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का अवसर मिलेगा। इस फ़ेलोशिप की प्रमुख विशेषताओं में पारदर्शिता, मेरिट-आधारित चयन प्रक्रिया, तिमाही रिपोर्टिंग और आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, 1923 का अनुपालन शामिल है। विभाग और साझेदार संगठन इस पहल को युवाओं के लिए एक नेतृत्व मंच के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं, जिससे न केवल दिव्यांगजन सशक्तिकरण बल्कि समावेशी शासन की दिशा में भी ठोस प्रगति हो सकेगी।
ब्रेकिंग बैरियर्स फ़ेलोशिप का नेतृत्व सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत आने वाला दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (DEPwD) कर रहा है। यह विभाग देश में दिव्यांगजन कल्याण और अधिकारों के संवर्धन के लिए प्रमुख सरकारी निकाय है, जो शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और समान अवसरों की दिशा में निरंतर कार्य करता है। निपमैन फाउंडेशन – एक गैर-सरकारी संगठन जो दिव्यांगजनों के अधिकारों, नीतिगत सुधार और समावेशी समाज निर्माण के लिए लंबे समय से सक्रिय है। इसके संस्थापक श्री निपुण मल्होत्रा स्वयं दिव्यांग अधिकारों के क्षेत्र में प्रमुख कार्यकर्ता और नीति-विशेषज्ञ माने जाते हैं वाईएलएसी– यह संगठन युवाओं को नेतृत्व, नीति-निर्माण और नागरिक भागीदारी में प्रशिक्षित करता है। इसका उद्देश्य युवाओं को सामाजिक मुद्दों के समाधान में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना है। यह फ़ेलोशिप केवल एक वर्ष के लिए मान्य है, लेकिन यदि इसके परिणाम सकारात्मक रहे तो इसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है। भविष्य में यह मॉडल अन्य मंत्रालयों और विभागों में भी लागू किया जा सकता है, ताकि युवाओं को शासन व्यवस्था से जोड़कर नवाचार आधारित नीतिगत तंत्र तैयार किया जा सके।
भारत में दिव्यांगजन सशक्तिकरण को लेकर कई वर्षों से प्रयास किए जा रहे हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार देश में लगभग 2.68 करोड़ दिव्यांगजन हैं। ऐसे में उनकी शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और समान अवसर सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसी दिशा में वर्ष 2016 में दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम (RPwD Act, 2016) पारित किया गया, जिसने दिव्यांगजन अधिकारों को कानूनी सुरक्षा प्रदान की।
हालांकि, अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन और इसके तहत बनाए गए कार्यक्रमों की निगरानी हमेशा एक चुनौती रही है। मंत्रालय का मानना है कि यदि योग्य और प्रशिक्षित युवा पेशेवरों को नीतिगत प्रक्रिया में शामिल किया जाए तो न केवल योजनाओं की कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि उनमें नई दृष्टि और नवाचार भी आएगा।
इस फ़ेलोशिप का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि युवा पेशेवर सीधे तौर पर नीतिगत प्रक्रिया का हिस्सा बनें और अपनी विशेषज्ञता, शोध व नवीन सोच से दिव्यांगजन सशक्तिकरण के कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। इसके साथ ही, यह पहल युवाओं को शासन व्यवस्था का व्यावहारिक अनुभव, नेतृत्व कौशल और सामाजिक उत्तरदायित्व की गहरी समझ प्रदान करेगी। फ़ेलोशिप की प्रारंभिक अवधि एक वर्ष निर्धारित की गई है। यदि इसके परिणाम सकारात्मक और प्रभावशाली रहे, तो इसे आपसी सहमति से भविष्य में आगे भी बढ़ाया जा सकता है। चयन प्रक्रिया निष्पक्ष और योग्यता-आधारित होगी, ताकि सही उम्मीदवारों को अवसर मिल सके।
हर तीन महीने में फ़ेलोज़ की प्रगति का आकलन किया जाएगा और विभाग के साथ साझा किया जाएगा। आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, 1923 का सभी फ़ेलोज़ को सरकारी नियमों, गोपनीयता और आधिकारिक प्रावधानों का कड़ाई से पालन करना होगा। फ़ेलोज़ को अनुभवी अधिकारियों और विशेषज्ञों से निरंतर मार्गदर्शन मिलेगा। नीतिगत सहयोग और नवाचार : फ़ेलोज़ मंत्रालय को नई नीतियाँ बनाने, मौजूदा योजनाओं में सुधार और कार्यान्वयन की गति बढ़ाने में मदद करेंगे। दिव्यांगजन समुदाय – उनकी आवश्यकताओं और समस्याओं पर अधिक ध्यान दिया जाएगा, जिससे शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में ठोस सुधार संभव होगा। युवा पेशेवर – उन्हें शासन व्यवस्था से सीधा जुड़ने का अवसर मिलेगा। इससे उनकी लीडरशिप स्किल्स, प्रशासनिक समझ और नीति-निर्माण का व्यावहारिक अनुभव बढ़ेगा। सरकारी तंत्र – मंत्रालय को नई दृष्टि, नवाचार और दक्षता प्राप्त होगी, जिससे कार्यक्रमों का असर ज़मीनी स्तर पर और अधिक प्रभावशाली होगा।
1. ब्रेकिंग बैरियर्स फ़ेलोशिप क्या है?
यह एक विशेष पहल है जिसे सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (DEPwD) ने निपमैन फाउंडेशन और वाईएलएसी के साथ मिलकर शुरू किया है। इसका उद्देश्य दिव्यांगजन सशक्तिकरण, नीतिगत सहयोग और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को बढ़ावा देना है।
2. यह फ़ेलोशिप क्यों शुरू की गई है?
दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के प्रभावी अनुपालन और दिव्यांगजनों के लिए बेहतर नीतियाँ बनाने में युवा पेशेवरों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए। इससे शासन व्यवस्था में नई दृष्टि, नवाचार और दक्षता आएगी।
3. फ़ेलोशिप की अवधि कितनी होगी?
प्रारंभिक अवधि एक वर्ष निर्धारित की गई है। यदि परिणाम अच्छे रहे तो इसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
4. इस फ़ेलोशिप में कौन-कौन साझेदार हैं?
दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (DEPwD) – सरकारी सहयोग और ढांचा प्रदान करेगा।
निपमैन फाउंडेशन – दिव्यांग अधिकारों और नीतिगत सुधार पर काम करता है।
वाईएलएसी (YLAC) – युवाओं को नेतृत्व और नीति-निर्माण में प्रशिक्षित करता है।
5. इस फ़ेलोशिप के अंतर्गत क्या कार्य होंगे?
योग्य युवा पेशेवर मंत्रालय और विभागीय कार्यालयों में नियुक्त किए जाएंगे।
वे नीतिगत सुझाव देंगे और कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में सहयोग करेंगे।
वे दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुपालन को सुनिश्चित करेंगे।
फ़ेलोज़ को प्रशासनिक अनुभव, मार्गदर्शन और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का अवसर मिलेगा।
6. चयन प्रक्रिया कैसी होगी?
चयन पारदर्शी और मेरिट-आधारित होगा। योग्य उम्मीदवारों को ही अवसर दिया जाएगा।
7. फ़ेलोज़ की प्रगति कैसे आंकी जाएगी?
हर तीन महीने (तिमाही) में उनकी प्रगति का आकलन होगा और विभाग के साथ साझा किया जाएगा।
8. फ़ेलोज़ को किन नियमों का पालन करना होगा?
सभी फ़ेलोज़ को आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, 1923 का पालन करना होगा और सरकारी नियमों के अनुसार कार्य करना होगा।
9. इस फ़ेलोशिप से किसे लाभ होगा?
दिव्यांगजन समुदाय : उनकी आवश्यकताओं और समस्याओं का समाधान तेज़ी से होगा।
युवा पेशेवर : उन्हें शासन प्रणाली का अनुभव, नेतृत्व और नीति-निर्माण की समझ मिलेगी।
सरकारी तंत्र : मंत्रालय को नई सोच, नवाचार और दक्षता प्राप्त होगी।
10. फ़ेलोशिप का सबसे बड़ा प्रभाव क्या होगा?
यह पहल न केवल दिव्यांगजन अधिकारों को मजबूत करेगी, बल्कि युवाओं को शासन में सक्रिय भागीदारी का अवसर देकर समावेशी और उत्तरदायी शासन की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगी।
रिपोर्ट : कोटो न्यूज़ नेटवर्क (KNN)

