बलिया, 26 अगस्त। जस्टिस मोर्चा की ओर से निकाली जा रही जेन ज़ी कनेक्ट यात्रा अपने सातवें दिन विभिन्न ग्रामीण एवं कस्बाई क्षेत्रों से होते हुए सिकंदरपुर पहुँची। यात्रा की शुरुआत बेलथरा रोड से हुई, जिसके बाद उभांव, हल्दी, मालदा, नवानगर और नवरतनपुर में नुक्कड़ सभाओं का आयोजन किया गया। इस दौरान यात्रा से जुड़े लोगों ने युवाओं, छात्रों और स्थानीय नागरिकों से संवाद कर शिक्षा, रोजगार तथा सरकारी व्यवस्थाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।
यात्रा के दौरान जस्टिस मोर्चा की ओर से घोषित 10 सूत्रीय मांगों को भी लोगों के बीच रखा गया। आयोजकों का कहना है कि जेन ज़ी कनेक्ट यात्रा का उद्देश्य केवल राजनीतिक या प्रशासनिक सवाल उठाना नहीं, बल्कि गांव और कस्बों तक पहुंचकर युवाओं एवं छात्रों की वास्तविक समस्याओं को समझना और उन्हें व्यापक जनमुद्दे के रूप में सामने लाना है।
यात्रा के सातवें दिन बेलथरा रोड से आगे बढ़ते हुए अलग-अलग स्थानों पर नुक्कड़ सभाएं की गईं। उभांव, हल्दी, मालदा, नवानगर और नवरतनपुर में आयोजित सभाओं में युवाओं तथा छात्रों से शिक्षा और रोजगार को लेकर उनकी समस्याओं के बारे में बातचीत की गई। यात्रा से जुड़े साथियों ने कहा कि प्रदेश के युवाओं के सामने रोजगार, भर्ती प्रक्रिया, प्रतियोगी परीक्षाओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई सवाल हैं, जिन पर लगातार सार्वजनिक चर्चा की आवश्यकता है।नुक्कड़ सभाओं के माध्यम से युवाओं को यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि शिक्षा और रोजगार की समस्याओं को केवल व्यक्तिगत परेशानी मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। आयोजकों के अनुसार, बड़ी संख्या में युवा सरकारी नौकरियों की तैयारी करते हैं और भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी अनिश्चितताओं का सामना करते हैं। ऐसे मुद्दों को सामूहिक रूप से उठाने के लिए युवाओं को एकजुट करने का प्रयास किया जा रहा है।
जेन ज़ी कनेक्ट यात्रा के दौरान सरकारी विद्यालयों और अस्पतालों की स्थिति का भी जायजा लिया गया। यात्रा में शामिल लोगों ने रास्ते में आने वाले सरकारी संस्थानों का निरीक्षण करते हुए वहां उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं और व्यवस्थाओं की स्थिति को देखा। स्थानीय नागरिकों से बातचीत कर उनसे विद्यालयों और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी समस्याओं के बारे में जानकारी भी ली गई।
जस्टिस मोर्चा के अनुसार, यात्रा के दौरान जिन सरकारी विद्यालयों की स्थिति चिंताजनक दिखाई दी, उनकी सूची तैयार की जा रही है। सूची में विद्यालयों की स्थिति और स्थानीय स्तर पर सामने आई समस्याओं को दर्ज किया जा रहा है। यात्रा बलिया पहुंचने के बाद यह सूची जिलाधिकारी को सौंपे जाने की बात कही गई है। आयोजकों का कहना है कि सरकारी स्कूल और अस्पताल आम जनता के लिए बेहद महत्वपूर्ण संस्थान हैं। इसलिए इन संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं की वास्तविक स्थिति को सामने लाना जरूरी है। उनका उद्देश्य है कि जमीनी स्तर पर सामने आने वाली समस्याओं को संबंधित प्रशासन के समक्ष रखा जाए और उनके समाधान की दिशा में कार्रवाई की मांग की जाए।
सिकंदरपुर पहुंचने पर यात्रा के साथियों ने युवाओं और स्थानीय नागरिकों से संवाद जारी रखा। इस दौरान शिक्षा और रोजगार के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया। जस्टिस मोर्चा की ओर से युवाओं के लिए भर्ती कैलेंडर जारी करने, खाली सरकारी पदों पर तत्काल भर्ती करने और लंबित भर्तियों को पूरा करने की मांग रखी गई। इसके साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता, नॉर्मलाइजेशन समाप्त करने और अभ्यर्थियों को स्कोर कार्ड उपलब्ध कराने जैसे मुद्दे भी उठाए गए। यात्रा से जुड़े लोगों ने शिक्षा एवं भर्ती व्यवस्था से संबंधित अन्य मांगों के साथ NTA को समाप्त करने की मांग भी सामने रखी।
जस्टिस मोर्चा का कहना है कि युवाओं की समस्याओं को लेकर केवल सरकार से सवाल करना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए युवाओं और छात्रों को अपने मुद्दों के प्रति जागरूक होकर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठानी होगी। इसी उद्देश्य से यात्रा के माध्यम से अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर संवाद किया जा रहा है। यात्रा के साथियों ने युवाओं से 2 अक्टूबर को लखनऊ में 10 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रस्तावित बड़े आंदोलन में शामिल होने का आह्वान किया। आयोजकों के मुताबिक, इस आंदोलन के माध्यम से शिक्षा, रोजगार और भर्ती व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को व्यापक स्तर पर उठाने की तैयारी है।
जेन ज़ी कनेक्ट यात्रा का अगला चरण भी युवाओं और छात्रों के बीच संवाद पर केंद्रित रहेगा। यात्रा के दौरान सरकारी विद्यालयों, अस्पतालों और जनकल्याणकारी योजनाओं की जमीनी स्थिति का निरीक्षण किए जाने की बात कही गई है। इसके साथ ही स्थानीय लोगों से प्राप्त शिकायतों और समस्याओं को संकलित कर प्रशासन के सामने रखने की योजना है। जस्टिस मोर्चा से जुड़े लोगों का कहना है कि यात्रा का मकसद गांव-कस्बों में जाकर आम लोगों की आवाज सुनना और स्थानीय समस्याओं को दस्तावेज के रूप में सामने लाना है। सरकारी संस्थानों की स्थिति से संबंधित तैयार की जा रही सूची को भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है। यात्रा के दौरान सामने आए मुद्दों को लेकर अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित प्रशासन इन शिकायतों और मांगों पर किस प्रकार संज्ञान लेता है। सरकारी स्कूलों और अस्पतालों की वास्तविक स्थिति, उपलब्ध सुविधाएं तथा स्थानीय नागरिकों की शिकायतें प्रशासन के सामने रखे जाने के बाद उनकी जांच और समाधान की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है।
रिपोर्ट : कोटो न्यूज़ नेटवर्क (KNN) |

