भारत, 1 फरवरी 2026| गोरखपुर जनपद के थाना बड़हलगंज क्षेत्र अंतर्गत ग्राम रजौरी से सामने आया एक गंभीर आपराधिक मामला अब पुलिस की कार्यशैली पर बड़ा सवाल बनता जा रहा है। गांव की रहने वाली पीड़िता सुशीला साहनी ने गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान स्थानीय पुलिस पर लापरवाही, मिलीभगत और भ्रष्टाचार जैसे गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि उनके पति और बेटे पर जानलेवा हमला किए जाने के कई दिन बाद भी पुलिस ने एक भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया है, जिससे दबंगों के हौसले बुलंद हैं और उनका परिवार भय के साये में जीने को मजबूर है।
प्रेस वार्ता के दौरान सुशीला साहनी ने बताया कि 25 जनवरी 2026 को गांव के ही कुछ दबंग और प्रभावशाली लोगों ने उनके पति और बेटे अजय पर जान से मारने की नीयत से हमला किया। यह हमला अचानक और सुनियोजित तरीके से किया गया, जिसमें हमलावर लाठी-डंडों से लैस थे। हमले में उनके बेटे अजय के सिर पर गंभीर चोट आई, जिसके बाद उसे तत्काल अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। पीड़िता के अनुसार यदि समय रहते ग्रामीणों ने हस्तक्षेप न किया होता, तो कोई बड़ी अनहोनी हो सकती थी।
पीड़िता ने हमलावरों के नाम सार्वजनिक करते हुए बताया कि इस हमले में देव प्र*काश शुक्ला, गणना*यक शुक्ला, धर्म*देव यादव, मि*ठाई लाल यादव समेत अन्य लोग शामिल थे। उन्होंने आरोप लगाया कि सभी आरोपी गांव के दबंग हैं और स्थानीय स्तर पर उनका प्रभाव है। सुशीला साहनी ने कहा कि घटना के बाद उन्होंने थाना बड़हलगंज में तहरीर दी, जिस पर मुकदमा तो दर्ज कर लिया गया, लेकिन इसके बाद पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। कई दिन बीत जाने के बावजूद एक भी आरोपी की गिरफ्तारी न होना पुलिस की मंशा पर सवाल खड़े करता है।
सुशीला साहनी का आरोप है कि पुलिस आरोपियों के साथ सांठगांठ कर मामले को कमजोर करने में जुटी है। उन्होंने प्रेस वार्ता में दावा किया कि पुलिस पर रिश्वत लेकर केस को खत्म कराने का दबाव बनाया जा रहा है। पीड़िता ने यह भी कहा कि गिरफ्तारी न होने से आरोपियों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि वे खुलेआम उनके परिवार को जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। इस कारण पूरा परिवार मानसिक तनाव और भय में जी रहा है।
पीड़िता ने बताया कि न्याय की उम्मीद में उन्होंने स्थानीय पुलिस अधिकारियों से लेकर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, जिलाधिकारी और मुख्यमंत्री कार्यालय तक गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही सभी नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई और उनके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई, तो किसी भी अप्रिय घटना की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। सुशीला साहनी ने साफ शब्दों में कहा कि यदि प्रशासन ने अब भी आंखें मूंदे रखीं, तो वे न्याय के लिए आंदोलन करने को मजबूर होंगी।
पीड़िता की मांग
प्रेस वार्ता के दौरान पीड़िता सुशीला साहनी ने प्रशासन के समक्ष अपनी मांगों को बेहद स्पष्ट और दो टूक शब्दों में रखा। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल उनके परिवार की सुरक्षा का नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था और न्याय व्यवस्था की साख से जुड़ा हुआ है। यदि ऐसे गंभीर मामलों में भी दोषियों को संरक्षण मिलता रहा, तो आम नागरिक का भरोसा शासन-प्रशासन से पूरी तरह उठ जाएगा।
सबसे पहली और प्रमुख मांग रखते हुए सुशीला साहनी ने कहा कि मामले में नामजद सभी आरोपियों को बिना किसी देरी के तत्काल गिरफ्तार किया जाए। उन्होंने कहा कि घटना के दिन से लेकर अब तक आरोपियों की गिरफ्तारी न होना यह दर्शाता है कि या तो पुलिस दबाव में काम कर रही है या फिर जानबूझकर कार्रवाई से बच रही है। पीड़िता का कहना था कि आरोपी खुलेआम गांव में घूम रहे हैं, जिससे पीड़ित परिवार में भय और असुरक्षा की भावना लगातार बढ़ती जा रही है।
दूसरी महत्वपूर्ण मांग के रूप में उन्होंने पीड़ित परिवार को तत्काल पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराए जाने की अपील की। सुशीला साहनी ने बताया कि आरोपियों द्वारा लगातार जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं और कभी भी कोई अप्रिय घटना घट सकती है। उन्होंने कहा कि उनका परिवार गरीब और कमजोर वर्ग से आता है, ऐसे में दबंगों के सामने वे खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। पीड़िता ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा न मिलने की स्थिति में किसी भी अनहोनी की जिम्मेदारी सीधे प्रशासन की होगी।
तीसरी मांग में सुशीला साहनी ने मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग उठाई। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय स्तर पर जांच को प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है और साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका भी बनी हुई है। पीड़िता ने कहा कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो सच कभी सामने नहीं आ पाएगा। उन्होंने मांग की कि मामले की जांच किसी निष्पक्ष और वरिष्ठ अधिकारी से कराई जाए, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके।
चौथी और अहम मांग के तौर पर पीड़िता ने दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ पुलिसकर्मी आरोपियों से मिलीभगत कर मामले को कमजोर करने में लगे हैं। सुशीला साहनी का कहना था कि यदि पुलिस के भीतर बैठे जिम्मेदार लोग ही न्याय में बाधा बनेंगे, तो आम जनता कहां जाएगी। उन्होंने मांग की कि लापरवाही बरतने वाले और भ्रष्टाचार में संलिप्त पुलिसकर्मियों की जांच कर उनके खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाए।
रिपोर्ट : कोटो न्यूज़ नेटवर्क (KNN) |

