प्रयागराज की खुशबू निषाद नंदा ने रचा इतिहास
प्रयागराज, 19 दिसम्बर 2025 |भारत की खेल इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज की बेटी खुशबू निषाद नंदा ने लेबनान के एलमेह शहर में आयोजित एशियन एमएमए (मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स) चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर न केवल भारत का नाम रोशन किया, बल्कि यह उपलब्धि हासिल करने वाली भारत की पहली महिला एमएमए खिलाड़ी बनकर इतिहास रच दिया।
यह जीत केवल एक पदक भर नहीं है, बल्कि यह उस संघर्ष, अनुशासन और आत्मविश्वास की कहानी है, जो एक साधारण परिवार की बेटी को अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का गौरव बना देती है। खुशबू की इस ऐतिहासिक सफलता से पूरे देश, विशेषकर उत्तर प्रदेश और प्रयागराज में उत्साह और गर्व की लहर दौड़ गई है।
संघर्ष से सफलता तक का सफर
खुशबू निषाद नंदा का जन्म और पालन-पोषण प्रयागराज में हुआ। एक सामान्य सामाजिक परिवेश में पली-बढ़ी खुशबू ने बचपन से ही खेलों में गहरी रुचि दिखाई। जब अधिकांश लड़कियां पारंपरिक खेलों तक सीमित रहती हैं, तब खुशबू ने मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स जैसे कठिन और चुनौतीपूर्ण खेल को अपने करियर के रूप में चुना।
एमएमए एक ऐसा खेल है, जिसमें शारीरिक ताकत के साथ-साथ मानसिक दृढ़ता, रणनीति और अनुशासन की अत्यंत आवश्यकता होती है। खुशबू ने शुरुआती दिनों में संसाधनों की कमी, सामाजिक सोच और आर्थिक चुनौतियों का सामना किया, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।
दिन-रात की कड़ी मेहनत, कठिन अभ्यास और आत्मविश्वास के बल पर उन्होंने अपने खेल को लगातार निखारा। यही संघर्ष आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बना।

एशियन एमएमए चैंपियनशिप में ऐतिहासिक जीत
लेबनान के एलमेह में आयोजित एशियन एमएमए चैंपियनशिप में एशिया के कई देशों की शीर्ष महिला फाइटर्स ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता का स्तर अत्यंत कठिन था और हर मुकाबला चुनौतीपूर्ण।
खुशबू निषाद नंदा ने शुरुआती राउंड से ही आक्रामक लेकिन संतुलित खेल का प्रदर्शन किया। उनकी फुर्ती, तकनीक और रणनीति ने विरोधी खिलाड़ियों को चौंका दिया। सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबलों में उन्होंने जिस आत्मविश्वास और धैर्य का परिचय दिया, उसने दर्शकों और निर्णायकों दोनों को प्रभावित किया।
फाइनल मुकाबले में निर्णायक जीत के साथ जब खुशबू के हाथों में स्वर्ण पदक आया और भारतीय तिरंगा लहराया, तो वह क्षण पूरे देश के लिए गर्व का प्रतीक बन गया। यह पहली बार था जब किसी भारतीय महिला एमएमए खिलाड़ी ने एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा।
परिवार और संस्कारों की अहम भूमिका
खुशबू निषाद नंदा, प्रयागराज के पूर्व पार्षद एवं वरिष्ठ सामाजिक-राजनीतिक नेता नंद लाल निषाद नंदा की पुत्री हैं। उनके पिता ने हमेशा शिक्षा, खेल और आत्मनिर्भरता को महत्व दिया।
परिवार का सहयोग खुशबू के करियर की सबसे बड़ी ताकत रहा। जब समाज में कई लोग लड़कियों के लिए इस तरह के खेल को अनुचित मानते थे, तब उनके परिवार ने उन्हें पूरा समर्थन दिया।
नंद लाल निषाद नंदा का कहना है कि खुशबू की यह जीत केवल उनके परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जीत है। यह साबित करती है कि यदि बेटियों को समान अवसर और विश्वास मिले, तो वे किसी भी क्षेत्र में देश का नाम रोशन कर सकती हैं।
बेटियों के लिए प्रेरणा बनी खुशबू
खुशबू निषाद नंदा की यह उपलब्धि आज लाखों युवाओं, विशेषकर बेटियों, के लिए प्रेरणा बन चुकी है। उनकी कहानी उन तमाम लड़कियों को नया आत्मविश्वास देती है, जो सीमित संसाधनों या सामाजिक दबावों के कारण अपने सपनों को दबा देती हैं।
खुशबू का मानना है कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मअनुशासन, आत्मरक्षा और आत्मसम्मान का जरिया है। वे चाहती हैं कि अधिक से अधिक लड़कियां एमएमए, बॉक्सिंग, कुश्ती और अन्य खेलों में आगे आएं और अपनी पहचान बनाएं।
उनकी जीत ने यह संदेश दिया है कि भारत की बेटियां किसी भी वैश्विक मंच पर कमजोर नहीं हैं, बल्कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर वे इतिहास रच सकती हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान और बधाइयों का सिलसिला
खुशबू की जीत के बाद देशभर से उन्हें बधाइयां मिल रही हैं। खेल जगत, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक नेताओं ने उनकी सफलता की सराहना की है। उत्तर प्रदेश में उन्हें राज्य की खेल प्रतिभाओं का प्रतीक माना जा रहा है।
स्थानीय स्तर पर प्रयागराज में उनके स्वागत की तैयारियां की जा रही हैं। खेल प्रेमियों और युवाओं में उनकी उपलब्धि को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है।
खुशबू निषाद नंदा, एक ऐसी भारतीय महिला खिलाड़ी हैं जिन्होंने अपनी मेहनत, साहस और आत्मविश्वास के बल पर अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर भारत का नाम रोशन किया है। वे आज देश की उभरती हुई महिला खेल प्रतिभाओं में अग्रणी स्थान रखती हैं।
निवास:
खुशबू निषाद नंदा उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक शहर प्रयागराज की निवासी हैं। संगम नगरी की इस बेटी ने स्थानीय स्तर से निकलकर एशिया तक अपनी पहचान बनाई और अपने शहर को गर्व का अवसर दिया।
खेल:
खुशबू का खेल क्षेत्र मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (एमएमए) है, जो शारीरिक शक्ति, तकनीकी कौशल, रणनीति और मानसिक दृढ़ता का संगम माना जाता है। इस चुनौतीपूर्ण खेल में उन्होंने कठिन प्रशिक्षण और अनुशासन के माध्यम से खुद को एक मजबूत और कुशल फाइटर के रूप में स्थापित किया।
उपलब्धि:
उन्होंने लेबनान के एलमेह में आयोजित एशियन एमएमए चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। यह जीत भारत के लिए ऐतिहासिक रही और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय महिला खिलाड़ियों की क्षमता का सशक्त प्रमाण बनी।
विशेष उपलब्धि:
खुशबू निषाद नंदा एशियन एमएमए चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारत की पहली महिला खिलाड़ी बन गई हैं। उनकी यह उपलब्धि न केवल व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि यह भारतीय महिला खेल इतिहास में एक मील का पत्थर मानी जा रही है।
पिता:
खुशबू के पिता नंद लाल निषाद नंदा प्रयागराज के पूर्व पार्षद एवं वरिष्ठ सामाजिक-राजनीतिक नेता हैं। उनके मार्गदर्शन, संस्कार और समर्थन ने खुशबू को आगे बढ़ने की प्रेरणा दी और हर चुनौती में उनका संबल बने रहे।
प्रेरणा:
खुशबू निषाद नंदा आज लाखों युवाओं, विशेषकर बेटियों, के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उनका उद्देश्य है कि लड़कियां आत्मनिर्भर बनें, स्वयं की रक्षा करने में सक्षम हों और समाज की सीमाओं को तोड़कर अपने सपनों को साकार करें। वे मानती हैं कि खेल महिला सशक्तिकरण का सबसे मजबूत माध्यम है।
रिपोर्ट : कोटो न्यूज़ नेटवर्क (KNN) |