Site icon Koto News

नेपाल में आपदा के दौरान NCD मरीजों की स्वास्थ्य सेवाएं जारी रखने पर राष्ट्रीय राउंडटेबल

काठमांडू में आयोजित राष्ट्रीय राउंडटेबल चर्चा के दौरान नेपाल रेड क्रॉस सोसाइटी, स्वास्थ्य मंत्रालय, WHO, IFRC तथा विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं के प्रतिनिधि आपदा के समय नॉन-कम्युनिकेबल बीमारियों के मरीजों को निरंतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की रणनीति पर विचार-विमर्श करते हुए।

काठमांडू में आयोजित राष्ट्रीय राउंडटेबल चर्चा में नेपाल रेड क्रॉस सोसाइटी, स्वास्थ्य मंत्रालय और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि आपदा के दौरान NCD मरीजों के लिए निर्बाध स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने पर चर्चा करते हुए।

काठमांडू। नेपाल में आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक प्रभावी, समावेशी तथा स्वास्थ्य-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत नेपाल रेड क्रॉस सोसाइटी द्वारा संचालित रेजिलिएंस NCDs प्रोजेक्ट के अंतर्गत “आपदा के समय नॉन-कम्युनिकेबल बीमारियों (NCDs) की आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक रिस्पॉन्स पैकेज” विषय पर राष्ट्रीय स्तर का राउंडटेबल चर्चा कार्यक्रम काठमांडू में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, कैंसर, अस्थमा तथा अन्य गैर-संचारी रोगों से पीड़ित मरीजों को बिना किसी बाधा के उपचार और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की रणनीति तैयार करना था। नेपाल रेड क्रॉस सोसाइटी के महासचिव ऋषिरमन खनाल की मेजबानी में आयोजित इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्रालय, विभिन्न सरकारी विभागों, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठनों, विश्वविद्यालयों, स्थानीय सरकारों तथा विकास साझेदार संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि आपदा की स्थिति में केवल राहत एवं बचाव कार्य ही पर्याप्त नहीं होते, बल्कि पहले से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों तक समय पर दवाएं, उपचार और चिकित्सा सेवाएं पहुंचाना भी समान रूप से महत्वपूर्ण है।

कार्यक्रम के प्रथम चरण में स्वास्थ्य एवं जनसंख्या मंत्रालय के अंतर्गत स्वास्थ्य सेवा विभाग के नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज एंड मेंटल हेल्थ सेक्शन की प्रमुख डॉ. पोमावती थापा ने “नेपाल में नॉन-कम्युनिकेबल बीमारियों की वर्तमान स्थिति, उपलब्धियां तथा वर्ष 2030 तक की राष्ट्रीय कार्ययोजना” विषय पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि नेपाल में तेजी से बढ़ रही गैर-संचारी बीमारियां सार्वजनिक स्वास्थ्य के सामने बड़ी चुनौती बन चुकी हैं। यदि प्राकृतिक आपदा के समय इन मरीजों की नियमित चिकित्सा बाधित होती है, तो मृत्यु दर और जटिलताएं बढ़ सकती हैं। इसलिए आपदा जोखिम न्यूनीकरण रणनीतियों के साथ NCD सेवाओं का प्रभावी एकीकरण समय की आवश्यकता है।

नेपाल रेड क्रॉस सोसाइटी के आपदा प्रबंधन विभाग के निदेशक सागर श्रेष्ठ ने कार्यक्रम का उद्देश्य स्पष्ट करते हुए कहा कि किसी भी आपदा के दौरान गैर-संचारी रोगों से पीड़ित लोगों को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं निरंतर उपलब्ध कराना सरकार, स्वास्थ्य संस्थानों, स्थानीय निकायों और मानवीय संगठनों की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि इसके लिए बहु-क्षेत्रीय सहयोग, प्रभावी नीति समन्वय तथा संसाधनों के उचित प्रबंधन की आवश्यकता है। इसी सत्र में डेनिश रेड क्रॉस की कार्यक्रम समन्वयक नीरू प्रधान तथा नेपाल रेड क्रॉस सोसाइटी के कार्यक्रम समन्वयक प्रमोद अधिकारी ने रेजिलिएंस NCDs परियोजना के अंतर्गत प्राप्त उपलब्धियों, अनुभवों और चुनौतियों को साझा किया। उन्होंने बताया कि परियोजना का मुख्य उद्देश्य आपदाओं के समय मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग एवं अन्य गैर-संचारी रोगों से पीड़ित मरीजों के उपचार और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित करना है।

नेपाल रेड क्रॉस सोसाइटी के स्वास्थ्य सेवा विभाग के कार्यक्रम समन्वयक अनिल महारजन ने परियोजना के अंतर्गत किए गए विभिन्न अध्ययनों और अनुसंधानों के निष्कर्ष प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि स्थानीय समुदायों में NCD मरीजों की पहचान, उनके स्वास्थ्य रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण, आवश्यक दवाओं का भंडारण तथा सामुदायिक स्वास्थ्य स्वयंसेवकों का प्रशिक्षण आपदा तैयारी का अभिन्न हिस्सा होना चाहिए। कार्यक्रम के प्रथम चरण का संचालन नेपाल रेड क्रॉस सोसाइटी के आपदा प्रबंधन विभाग की कार्यक्रम समन्वयक पल्लवी सिंह ने किया। उन्होंने प्रतिभागियों के बीच विभिन्न विषयों पर संवाद स्थापित करते हुए आपदा प्रबंधन और स्वास्थ्य सेवाओं के बीच समन्वय को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम के दूसरे चरण में आयोजित राउंडटेबल चर्चा में प्रतिभागियों ने आपदा के दौरान NCD सेवाओं के व्यावहारिक क्रियान्वयन, नीति निर्माण, संसाधन प्रबंधन, स्वास्थ्य प्रणाली में प्रभावी एकीकरण तथा दीर्घकालिक संस्थागत व्यवस्था पर विस्तृत विचार-विमर्श किया। चर्चा के दौरान आवश्यक दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ NCD सेवाओं का समन्वय, स्थानीय सरकारों की भूमिका, “Pen-D” मॉडल के संस्थागत विकास, शोध आधारित नीति निर्माण, अंतरराष्ट्रीय अनुभवों के आदान-प्रदान तथा विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं के बीच समन्वय को मजबूत बनाने जैसे विषय प्रमुख रूप से सामने आए।

नेपाल में बढ़ती NCD की चुनौती

विशेषज्ञों के अनुसार नेपाल में मधुमेह, उच्च रक्तचाप, कैंसर, हृदय रोग, स्ट्रोक तथा दीर्घकालिक श्वसन रोगों के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ये बीमारियां नियमित दवाओं, जांच और चिकित्सकीय निगरानी की मांग करती हैं। यदि भूकंप, बाढ़, भूस्खलन या अन्य प्राकृतिक आपदाओं के कारण स्वास्थ्य सेवाएं बाधित होती हैं तो ऐसे मरीजों के लिए गंभीर स्वास्थ्य संकट उत्पन्न हो सकता है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए आपदा प्रबंधन योजनाओं में NCD सेवाओं को शामिल करने पर बल दिया गया।

स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता 

विशेषज्ञों ने कहा कि किसी भी आपदा के दौरान निम्नलिखित सेवाएं बाधित नहीं होनी चाहिए—

मधुमेह रोगियों के लिए इंसुलिन एवं दवाओं की उपलब्धता।
उच्च रक्तचाप के मरीजों के लिए नियमित दवा वितरण।
कैंसर मरीजों के उपचार की निरंतरता।
डायलिसिस एवं हृदय रोगियों के लिए आपातकालीन सेवाएं।
मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता।
ऑक्सीजन एवं जीवन रक्षक दवाओं की आपूर्ति।
नीति निर्माण और संसाधन प्रबंधन पर चर्चा

राउंडटेबल में प्रतिभागियों ने सुझाव दिया कि भविष्य में आपदा प्रबंधन योजनाओं में NCD मरीजों की अलग सूची तैयार की जाए। आवश्यक दवाओं का जिला स्तर पर सुरक्षित भंडारण हो तथा डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड तैयार किए जाएं ताकि किसी भी आपदा के दौरान मरीजों की पहचान और उपचार में कठिनाई न हो। इसके अलावा स्थानीय स्वास्थ्य संस्थानों को आपदा के समय अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराने तथा सामुदायिक स्वास्थ्य स्वयंसेवकों को विशेष प्रशिक्षण देने की भी सिफारिश की गई।

स्थानीय सरकारों की भूमिका

कार्यक्रम में लालझड़ी ग्रामीण नगरपालिका के अध्यक्ष निर्मल राणा सहित स्थानीय सरकारों के प्रतिनिधियों ने कहा कि आपदा के समय सबसे पहले स्थानीय प्रशासन ही प्रभावित नागरिकों तक पहुंचता है। इसलिए स्थानीय स्तर पर दवा भंडारण, स्वास्थ्य स्वयंसेवकों का प्रशिक्षण, सामुदायिक जागरूकता और आपदा तैयारी योजनाओं को मजबूत करना अत्यंत आवश्यक है।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग की अहम भूमिका

कार्यक्रम में IFRC, डेनिश रेड क्रॉस, कैनेडियन रेड क्रॉस, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), काठमांडू विश्वविद्यालय, नेपाल हेल्थ रिसर्च काउंसिल, राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण, स्वास्थ्य मंत्रालय तथा अनेक सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

विशेषज्ञों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग, तकनीकी सहायता और अनुभवों का आदान-प्रदान नेपाल की आपदा स्वास्थ्य प्रणाली को अधिक मजबूत बना सकता है।

भविष्य की रणनीति

कार्यक्रम के समापन अवसर पर नेपाल रेड क्रॉस सोसाइटी की कार्यवाहक कार्यकारी निदेशक मोना आर्यल ने कहा कि सरकार, रेड क्रॉस, विकास साझेदारों तथा स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े सभी हितधारकों के बीच सहयोग और अधिक मजबूत किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शोध आधारित नीतियां, आधुनिक स्वास्थ्य प्रणाली और प्रभावी समन्वय के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि किसी भी आपदा के दौरान NCD मरीजों को उपचार और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित न होना पड़े।

रिपोर्ट : कोटो न्यूज़ नेटवर्क (KNN) |

Exit mobile version