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नेपाल फॉरेस्ट टेन्योर कॉन्फ्रेंस 2026: वन अधिकार, सामुदायिक वन प्रबंधन और जलवायु

नेपाल की राजधानी काठमांडू में आयोजित नेपाल फॉरेस्ट टेन्योर कॉन्फ्रेंस 2026 के उद्घाटन सत्र में एफएओ के प्रतिनिधि, नेपाल सरकार के अधिकारी, सामुदायिक वन उपभोक्ता समूहों, आदिवासी समुदायों, विकास साझेदारों, शिक्षाविदों और नागरिक समाज के प्रतिनिधि वन अधिकार, जलवायु अनुकूल कृषि-खाद्य प्रणाली और समावेशी वन शासन पर चर्चा करते हुए।

काठमांडू में आयोजित नेपाल फॉरेस्ट टेन्योर कॉन्फ्रेंस 2026 के उद्घाटन सत्र में वन अधिकार, सामुदायिक वन प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन और टिकाऊ कृषि-खाद्य प्रणाली पर विचार साझा करते एफएओ प्रतिनिधि केन शिमिजु तथा सम्मेलन में उपस्थित विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि।

काठमांडू। नेपाल में वन अधिकारों को मजबूत बनाकर कृषि-खाद्य प्रणाली (एग्रीफूड सिस्टम) को अधिक टिकाऊ, समावेशी और जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीला बनाने के उद्देश्य से आयोजित नेपाल फॉरेस्ट टेन्योर कॉन्फ्रेंस 2026 का शुभारंभ काठमांडू में हुआ। सम्मेलन में नेपाल सरकार के प्रतिनिधियों, सामुदायिक वन उपभोक्ता समूहों, आदिवासी समुदायों, अंतरराष्ट्रीय विकास साझेदारों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य वन शासन (फॉरेस्ट गवर्नेंस) को अधिक उत्तरदायी, समावेशी और प्रभावी बनाना है ताकि वन संसाधनों का संरक्षण करते हुए ग्रामीण आजीविका, खाद्य सुरक्षा और जलवायु अनुकूल विकास को बढ़ावा दिया जा सके। उद्घाटन सत्र में वक्ताओं ने कहा कि सुरक्षित और न्यायसंगत वन अधिकार केवल प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा का विषय नहीं हैं, बल्कि यह करोड़ों लोगों की आजीविका, सामाजिक न्याय और सतत विकास से भी सीधे जुड़े हुए हैं।


नेपाल का सामुदायिक वन मॉडल दुनिया के लिए उदाहरण

सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में भूटान और नेपाल के लिए संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के प्रतिनिधि केन शिमिजु ने नेपाल की सामुदायिक वन प्रबंधन प्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि यह मॉडल पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने बताया कि नेपाल में वर्तमान समय में 23 हजार से अधिक सामुदायिक वन उपभोक्ता समूह (Community Forest User Groups) लगभग 24 लाख हेक्टेयर वन क्षेत्र का प्रबंधन कर रहे हैं। इन समूहों से 1 करोड़ 60 लाख से अधिक लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले तीन दशकों में नेपाल ने सामुदायिक वन प्रबंधन के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। इससे वन क्षेत्र का संरक्षण हुआ है, ग्रामीण समुदायों की भागीदारी बढ़ी है और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है। केन शिमिजु ने कहा कि भविष्य में जलवायु परिवर्तन, भूमि क्षरण और खाद्य संकट जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए समुदाय आधारित वन प्रबंधन की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी।


सुरक्षित वन अधिकार से मजबूत होगी कृषि और खाद्य सुरक्षा

सम्मेलन में विशेषज्ञों ने कहा कि यदि स्थानीय समुदायों को वन संसाधनों पर स्पष्ट सुरक्षित और न्यायसंगत अधिकार दिए जाएं तो कृषि-खाद्य प्रणाली अधिक मजबूत और टिकाऊ बन सकती है। वक्ताओं ने कहा कि नेपाल के अधिकांश ग्रामीण समुदाय अपनी आजीविका के लिए वनों पर निर्भर हैं। वन केवल लकड़ी या ईंधन का स्रोत नहीं बल्कि पशुओं के चारे, औषधीय पौधों, जल स्रोतों, जैव विविधता और स्थानीय खाद्य सुरक्षा का भी महत्वपूर्ण आधार हैं। विशेषज्ञों के अनुसार सुरक्षित वन अधिकार मिलने से समुदाय प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण अधिक जिम्मेदारी के साथ करते हैं। इससे अवैध कटाई में कमी आती है, वन क्षेत्र बढ़ता है और पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिलता है। सम्मेलन में इस बात पर भी जोर दिया गया कि वन संरक्षण और कृषि विकास को अलग-अलग नहीं बल्कि एकीकृत दृष्टिकोण से देखने की आवश्यकता है।


जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता संरक्षण पर विशेष जोर

सम्मेलन के दौरान जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों पर भी गंभीर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि नेपाल हिमालयी क्षेत्र का देश होने के कारण जलवायु परिवर्तन से सबसे अधिक प्रभावित देशों में शामिल है। बढ़ते तापमान, अनियमित वर्षा, बाढ़, भूस्खलन और सूखे जैसी प्राकृतिक आपदाएं ग्रामीण समुदायों और कृषि उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही हैं। ऐसे में वन संरक्षण जलवायु अनुकूलन की महत्वपूर्ण रणनीति बन सकता है। विशेषज्ञों ने कहा कि स्वस्थ वन वातावरण में कार्बन अवशोषण बढ़ाते हैं, जल स्रोतों की रक्षा करते हैं और जैव विविधता को संरक्षित रखते हैं। इसलिए वन शासन को मजबूत बनाना जलवायु परिवर्तन से निपटने की वैश्विक रणनीति का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। सम्मेलन में आदिवासी समुदायों और स्थानीय लोगों के पारंपरिक ज्ञान को वन प्रबंधन में शामिल करने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।


समावेशी भागीदारी,साझेदारी से मिलेगा दीर्घकालिक समाधान

सम्मेलन में भाग लेने वाले प्रतिनिधियों ने कहा कि वन संरक्षण की सफलता तभी संभव है जब सरकार, स्थानीय समुदाय, महिला समूह, आदिवासी समुदाय, निजी क्षेत्र, विकास साझेदार और नागरिक समाज मिलकर कार्य करें। एफएओ ने नेपाल सरकार के साथ अपनी साझेदारी को दोहराते हुए कहा कि संस्था जिम्मेदार वन अधिकार व्यवस्था को मजबूत करने, स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाने तथा टिकाऊ प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए सहयोग जारी रखेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य की विकास नीतियों में वन, कृषि और पर्यावरण को एकीकृत रूप से शामिल करना होगा। इससे न केवल खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होगी बल्कि रोजगार, ग्रामीण विकास और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को भी नई दिशा मिलेगी। सम्मेलन के समापन तक वन अधिकार, सामुदायिक वन प्रबंधन, जलवायु वित्त, भूमि अधिकार, महिला नेतृत्व तथा सतत कृषि से जुड़े अनेक तकनीकी सत्र आयोजित किए जाने हैं, जिनमें विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ अपने अनुभव साझा करेंगे।

काठमांडू में नेपाल फॉरेस्ट टेन्योर कॉन्फ्रेंस 2026 का शुभारंभ :  नेपाल की राजधानी काठमांडू में आयोजित नेपाल फॉरेस्ट टेन्योर कॉन्फ्रेंस 2026 में वन अधिकार, सामुदायिक वन प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन, कृषि-खाद्य प्रणाली और समावेशी विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों ने विचार-विमर्श किया। सम्मेलन में नीति निर्माण और टिकाऊ प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन को नई दिशा देने पर विशेष जोर दिया गया।

सरकार, एफएओ और विभिन्न हितधारकों की व्यापक भागीदारी सम्मेलन में नेपाल सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ), सामुदायिक वन उपभोक्ता समूहों, आदिवासी समुदायों, विकास साझेदारों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, नागरिक समाज संगठनों तथा पर्यावरण विशेषज्ञों ने भाग लिया। सभी प्रतिभागियों ने वन शासन को अधिक पारदर्शी, समावेशी और जवाबदेह बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

23 हजार से अधिक सामुदायिक वन उपभोक्ता समूह निभा रहे महत्वपूर्ण भूमिका : सम्मेलन में बताया गया कि नेपाल में वर्तमान समय में 23,000 से अधिक सामुदायिक वन उपभोक्ता समूह सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। ये समूह स्थानीय समुदायों की भागीदारी के साथ वन संरक्षण, संसाधनों के सतत उपयोग और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं। नेपाल का सामुदायिक वन मॉडल आज वैश्विक स्तर पर एक सफल उदाहरण माना जाता है।

24 लाख हेक्टेयर से अधिक वन क्षेत्र का सामुदायिक प्रबंधन : सामुदायिक वन उपभोक्ता समूह देश के लगभग 24 लाख हेक्टेयर वन क्षेत्र का संरक्षण और प्रबंधन कर रहे हैं। इस व्यवस्था के माध्यम से वनों की अवैध कटाई में कमी आई है, हरित क्षेत्र का विस्तार हुआ है तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भागीदारी मजबूत हुई है।

1.6 करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका से जुड़ी है सामुदायिक वन प्रणाली :  सम्मेलन में बताया गया कि नेपाल की सामुदायिक वन व्यवस्था से 1 करोड़ 60 लाख से अधिक लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित हो रहे हैं। वन संसाधन ग्रामीण परिवारों के लिए ईंधन, चारा, औषधीय पौधे, जल संरक्षण, लघु वन उपज और आय के महत्वपूर्ण स्रोत हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।

सुरक्षित वन अधिकार को सतत विकास की आधारशिला बताया गया : विशेषज्ञों ने कहा कि स्थानीय समुदायों को सुरक्षित और न्यायसंगत वन अधिकार उपलब्ध कराना केवल वन संरक्षण का विषय नहीं है, बल्कि यह कृषि उत्पादकता, खाद्य सुरक्षा, जलवायु अनुकूलन, जैव विविधता संरक्षण और ग्रामीण विकास की मजबूत नींव भी है। स्पष्ट वन अधिकार मिलने से समुदाय प्राकृतिक संसाधनों का अधिक जिम्मेदारी के साथ संरक्षण करते हैं।

जलवायु परिवर्तन से निपटने में सामुदायिक वन मॉडल की अहम भूमिका : वक्ताओं ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के बीच सामुदायिक वन प्रबंधन कार्बन अवशोषण बढ़ाने, जल स्रोतों की रक्षा करने, भूमि क्षरण रोकने और जैव विविधता के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। भविष्य की पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए स्थानीय समुदायों को केंद्र में रखकर वन नीति तैयार करने की आवश्यकता बताई गई।

समावेशी वन शासन और स्थानीय समुदायों की भागीदारी पर विशेष जोर :सम्मेलन में यह सहमति बनी कि वन प्रबंधन की सफलता तभी संभव है जब महिलाओं, आदिवासी समुदायों, स्थानीय निकायों, युवाओं और सामुदायिक संगठनों को निर्णय प्रक्रिया में समान भागीदारी मिले। विशेषज्ञों ने वन शासन को अधिक लोकतांत्रिक, पारदर्शी और सहभागी बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

एफएओ ने सहयोग जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई : एफएओ ने नेपाल सरकार और विभिन्न साझेदार संस्थाओं के साथ मिलकर जिम्मेदार वन अधिकार व्यवस्था को मजबूत करने, समावेशी भागीदारी को बढ़ावा देने तथा जलवायु-अनुकूल और टिकाऊ प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। संगठन ने कहा कि भविष्य में भी नेपाल के सामुदायिक वन मॉडल को सुदृढ़ बनाने और ग्रामीण समुदायों के सशक्तिकरण के लिए तकनीकी एवं नीतिगत सहयोग जारी रहेगा।

रिपोर्ट : कोटो न्यूज़ नेटवर्क (KNN) |

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