जीवन साहानी निषाद
संवादाताः कोटो न्यूज़ नेटवर्क (KNN) | नेपाल निषाद परिषद् के लुम्बिनी प्रदेश अध्यक्ष जीवन साहानी निषाद ने दशहरा और दीपावली के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों सहित सम्पूर्ण नेपाली जनता को हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। जीवन साहानी ने अपने सन्देश में देश की सामाजिक एकता, समरसता, और आर्थिक प्रगति पर विशेष ध्यान केंद्रित किया। दशहरा और दीपावली जैसे पर्व सामाजिक एकता के प्रतीक हैं, जिनके माध्यम से हम बुराई पर अच्छाई की जीत और अंधकार पर प्रकाश की विजय का उत्सव मनाते हैं। जीवन साहानी ने कहा कि इन पावन अवसरों पर हमे देश की विभिन्न जातीय, धार्मिक और सामाजिक विविधताओं के बीच सामंजस्य स्थापित करने का प्रयास करना चाहिए।
अध्यक्ष साहानी ने अपने संदेश में यह भी बताया कि निषाद समाज को विशेष रूप से आत्मसम्मान, शिक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़ना है। उन्होंने कहा कि निषाद समाज का प्रत्येक सदस्य अपने अधिकारों को पहचानते हुए समाज के विकास में योगदान देने का संकल्प लें। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे सामाजिक समरसता के साथ प्रदेश और राष्ट्र के विकास में अपना योगदान दें। नेपाल निषाद परिषद् लुम्बिनी प्रदेश अध्यक्ष जीवन साहानी निषाद ने दशहरा व दीपावली के अवसर पर प्रदेशवासियों को एक भावपूर्ण सन्देश दिया। उन्होंने पर्वों की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता के साथ-साथ सामाजिक सद्भावना की आवश्यकता पर जोर दिया। जीवन साहानी ने कहा कि दशहरा बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है, जबकि दीपावली अंधकार पर प्रकाश की जीत का उत्सव है। ये पर्व हमें आपसी प्रेम, भाईचारा और सहयोग की भावना से जोड़ते हैं।
अध्यक्ष साहानी ने विशेष रूप से निषाद समाज के उत्थान की बात की। उन्होंने कहा कि निषाद समाज ने हमेशा देश के सामाजिक और आर्थिक विकास में अपनी भूमिका निभाई है, लेकिन आज भी समाज के कई वर्ग सामाजिक एवं आर्थिक रूप से पिछड़े हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा, स्वरोजगार और सामाजिक न्याय की दिशा में कई सकारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। जीवन साहानी ने देशवासियों से आह्वान किया कि वे जाति, धर्म, क्षेत्र और भाषा की सीमाओं से परे उठकर देश की प्रगति हेतु मिलकर कार्य करें। उन्होंने कहा, “हमारा देश तभी प्रगति करेगा, जब हम आपसी मतभेद भूलकर एकता के साथ विकास की ओर अग्रसर होंगे।” उन्होंने बताया कि निषाद परिषद् ऐसे सभी कार्यक्रमों में हिस्सा लेगी जो समाज के सशक्तिकरण में सहायक हों। अध्यक्ष साहानी ने अपने सन्देश में यह भी कहा कि प्रदेश में सामाजिक असमानता को समाप्त करने के लिए निषाद परिषद् हर संभव प्रयास करेगी। उन्होंने सभी नागरिकों से आग्रह किया कि वे इस पर्व पर अपने घरों में केवल दीपक जलाएँ नहीं, बल्कि अपने हृदय में भी आपसी सद्भाव और प्रेम के दीपक प्रज्वलित करें। उन्होंने आशा व्यक्त की कि आने वाला वर्ष निषाद समाज सहित सम्पूर्ण प्रदेश के लिए समृद्धि, शांति और सुख-समृद्धि लेकर आए।
दशहरा व दीपावली का सामाजिक महत्व
दशहरा और दीपावली भारतीय उपमहाद्वीप विशेष रूप से नेपाल में मनाए जाने वाले प्रमुख पर्व हैं, जो न केवल धार्मिक विश्वास का प्रतीक हैं, बल्कि सामाजिक सद्भाव, समरसता, एकता और मानवीय मूल्यों के उज्ज्वल उदाहरण भी हैं। ये पर्व समय के साथ-साथ केवल पारंपरिक उत्सव नहीं रह गए हैं, बल्कि समाज के हर वर्ग के बीच प्रेम, भाईचारा, समानता और सहयोग की भावना को स्थापित करने का माध्यम बन गए हैं।
दशहरा का सामाजिक संदेश
दशहरा, जिसे विजयादशमी भी कहा जाता है, बुराई पर अच्छाई की विजय का पर्व है। यह त्योहार हमें यह सिखाता है कि अंधकार चाहे जितना भी गहरा क्यों न हो, एक दिन प्रकाश की किरणें उसमें प्रवेश कर उसे दूर कर देती हैं। धार्मिक दृष्टिकोण से इसे रावण वध का पर्व कहा जाता है, लेकिन इसका सामाजिक महत्व इससे कहीं अधिक गहरा है। जीवन साहानी निषाद ने दशहरा के अवसर पर विशेष रूप से यह बात कही कि यह पर्व हमें आपसी मतभेद भूलकर सामाजिक सौहार्द का संदेश देता है।
समाज में व्याप्त जातिवाद, क्षेत्रवाद और अन्य प्रकार की भेदभाव की दीवारें केवल व्यक्ति विशेष के प्रयास से नहीं टूटतीं, बल्कि सामाजिक चेतना और सामूहिक प्रयास से ही इन दीवारों को गिराया जा सकता है। दशहरा के दिन हम रावण वध के रूप में बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक मानते हैं। यह पर्व हमें यह प्रेरणा देता है कि समाज के हर वर्ग को समान अवसर मिले, हर व्यक्ति को सम्मान मिले, और कोई भी वर्ग पिछड़ा न रहे।
दीपावली का सामाजिक संदेश
दीपावली या दिवाली को प्रकाश का पर्व कहा जाता है। यह अंधकार पर प्रकाश की जीत का पर्व है। धार्मिक दृष्टि से यह श्रीरामचंद्रजी के अयोध्या लौटने का उत्सव है, लेकिन इसका सामाजिक अर्थ इससे कहीं व्यापक है। दीपावली का पर्व एकता, सद्भाव, प्रेम और सौहार्द का संदेश देता है। यह पर्व हमें यह याद दिलाता है कि चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ क्यों न आएं, मिल-जुलकर और प्रेमपूर्वक जीवन की चुनौतियों का सामना करना संभव है।
जीवन साहानी निषाद ने दीपावली के अवसर पर यह विशेष रूप से कहा कि दीपक जलाना केवल अपने घर को रोशन करने की क्रिया नहीं, बल्कि अपने हृदय में भी प्रेम, समझदारी और सामाजिक समरसता का दीपक जलाने की प्रेरणा देता है। दीपावली के दिन हम एक-दूसरे को मिठाइयाँ बाँटते हैं, नए कपड़े पहनते हैं, और सामूहिक रूप से उत्सव मनाते हैं। यह समरसता का पर्व है, जो जाति, धर्म, भाषा, क्षेत्र आदि के भेदभाव को भुलाकर सभी को समान भाव से जोड़ता है।
सामाजिक समरसता का संदेश
दशहरा और दीपावली का सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश यही है कि समाज में विभिन्नता को स्वीकार करके, सहयोग की भावना से हम सब एक मजबूत और प्रगतिशील राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं। आज के समय में जहाँ वैश्विक और सामाजिक चुनौतियाँ लगातार बढ़ती जा रही हैं, ऐसे में यह आवश्यक हो जाता है कि हम अपने पर्वों का अर्थ समझें और उन्हें केवल परंपरा के तौर पर न मनाएं, बल्कि समाज में प्रेम, समानता और न्याय की भावना को फैलाने का अवसर बनाएं।
जीवन साहानी निषाद ने यह स्पष्ट किया कि निषाद समाज सहित समस्त समाज के प्रत्येक वर्ग को मिल-जुलकर आगे बढ़ने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि सामाजिक असमानता और भेदभाव को समाप्त करने के लिए केवल सरकारी योजनाओं पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि हर नागरिक को अपने स्तर पर प्रयास करना चाहिए। शिक्षा, स्वरोजगार, स्वास्थ्य सेवा और सामाजिक जागरूकता ऐसे माध्यम हैं, जिनके जरिए हम सामाजिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा सकते हैं।
समाज के पिछड़े तबकों का उत्थान
दशहरा व दीपावली केवल पर्व नहीं, बल्कि समाज के पिछड़े वर्गों के उत्थान का माध्यम भी बन सकते हैं। जीवन साहानी निषाद ने इस बात पर बल दिया कि समाज के कमजोर वर्गों को सशक्त बनाने हेतु निषाद परिषद् निरंतर कार्यरत है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में विशेष छात्रवृत्ति योजनाएँ लागू की जा रही हैं, ताकि समाज के हर व्यक्ति को समान अवसर मिल सके। साथ ही स्वरोजगार कार्यक्रमों के माध्यम से आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में भी पहल की जा रही है।
अध्यक्ष साहानी ने अपने संदेश में यह भी स्पष्ट किया कि सामाजिक न्याय का अधिकार प्रत्येक व्यक्ति का है। यह केवल अधिकार नहीं, बल्कि समाज में जिम्मेदारी का भी प्रतीक है। जब तक समाज के सभी वर्ग समान अधिकारों और सम्मान के साथ नहीं जुड़ेंगे, तब तक असली सामाजिक विकास संभव नहीं।
आगे का दृष्टिकोण
जीवन साहानी निषाद ने अपने सन्देश के अंत में यह अपील की कि आने वाले समय में हर नागरिक को अपने भीतर प्रेम, भाईचारा, सहयोग और समानता की भावना का दीप जलाए रखना चाहिए। उन्होंने यह विश्वास व्यक्त किया कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने स्तर पर यह संकल्प लेता है कि वे सामाजिक भेदभाव को दूर करेंगे और समाज के विकास में योगदान देंगे, तो निश्चित ही हमारा लुम्बिनी प्रदेश और समग्र नेपाल एक सुखी, समृद्ध और प्रगतिशील राष्ट्र के रूप में उभर कर सामने आएगा।
रिपोर्ट : कोटो न्यूज़ नेटवर्क (KNN)