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राष्ट्रीय सूचना दिवस 2025 पीएम ओली का संदेश, सोशल मीडिया नीति

सूचना का अधिकार

सूचना का अधिकार

संवादाताः कोटो न्यूज़ नेटवर्क (KNN) |  काठमांडू में आयोजित 19वें राष्ट्रीय सूचना दिवस पर नेपाल के प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली ने सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को मज़बूत बनाना और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कई योजनाओं और नीतियों के क्रियान्वयन में अब भी ‘implementation gap’ मौजूद है, जिसे दूर करना आवश्यक है। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ओली ने विशेष रूप से सोशल मीडिया के अनियंत्रित प्रसार और उसके दुष्प्रभावों का ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि एक ओर यह मंच सूचना के आदान-प्रदान और नागरिक भागीदारी का सशक्त साधन बना है, वहीं दूसरी ओर इससे अफवाहें, फेक न्यूज़ और सामाजिक असंतोष भी फैल रहा है। इसलिए सरकार जल्द ही सोशल मीडिया कंपनियों और प्लेटफ़ॉर्म्स को पंजीकरण और कराधान के दायरे में लाने के लिए ठोस नीतियाँ बनाएगी।

पीएम ओली ने कहा कि सूचना का अधिकार केवल कागज़ों पर दर्ज रहने से काम नहीं चलेगा, बल्कि इसे धरातल पर लागू करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। इसके लिए उन्होंने सरकारी संस्थाओं में पारदर्शिता, सूचना प्रवाह में सरलता और नागरिकों की सहभागिता को मज़बूत करने पर बल दिया। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र की सफलता केवल चुनाव कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नागरिकों की आवाज़ सुनने और उन्हें नीतिगत फैसलों में शामिल करने से ही संभव है। उन्होंने सरकारी तंत्र में डिजिटल गवर्नेंस को मज़बूत करने, प्रेस की स्वतंत्रता को सुनिश्चित करने और मीडिया की जवाबदेही तय करने का भी संकल्प व्यक्त किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि “सूचना युग” में केवल तकनीकी प्रगति काफी नहीं है, बल्कि इसके सामाजिक और नैतिक पहलुओं पर भी ध्यान देना उतना ही ज़रूरी है।

1: राष्ट्रीय सूचना दिवस क्या है ?

राष्ट्रीय सूचना दिवस नेपाल में एक महत्वपूर्ण अवसर है, जिसका उद्देश्य नागरिकों को सूचना का अधिकार (Right to Information) के महत्व से अवगत कराना और प्रशासनिक कार्यप्रणाली में पारदर्शिता को बढ़ावा देना है। इस दिन को मनाने का मूल मक़सद यह संदेश देना है कि लोकतंत्र तभी मजबूत हो सकता है जब नागरिकों को जानकारी तक निर्बाध पहुँच मिले। सूचना दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह उस विचारधारा का प्रतीक है जिसमें नागरिकों को सरकार के हर कदम , निर्णय की जानकारी पाने का अधिकार होता है। इससे न केवल लोकतंत्र की जड़ों को मज़बूती मिलती है, बल्कि नागरिकों और शासन के बीच विश्वास का पुल भी बनता है। इसका एक अन्य उद्देश्य नागरिकों को सरकारी नीतियों, योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी देकर उन्हें सीधे तौर पर भागीदार बनाना है। जब नागरिक नीतियों और योजनाओं को समझते हैं, तो वे उनके सही क्रियान्वयन में सहयोग भी कर पाते हैं। यही लोकतंत्र की असली आत्मा है।

पीएम ओली का मुख्य संदेश

प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली ने अपने संबोधन में स्पष्ट कहा कि मौलिक अधिकारों की रक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने नागरिकों को भरोसा दिलाया कि सरकार संविधान द्वारा दिए गए उनके अधिकारों को न केवल काग़ज़ों पर, बल्कि व्यवहारिक जीवन में लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने इस अवसर पर लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती पर भी ज़ोर दिया। उनके अनुसार, यदि संसद, न्यायपालिका और मीडिया जैसी संस्थाएँ स्वतंत्र और मज़बूत होंगी, तभी लोकतंत्र सही मायनों में जीवित रह पाएगा। पीएम ओली ने सोशल मीडिया के अनियंत्रित प्रसार और उससे उत्पन्न चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आने वाले समय में इसे पंजीकरण और कराधान के दायरे में लाना आवश्यक होगा। इससे न केवल अफवाहों और फेक न्यूज़ पर अंकुश लगेगा, बल्कि सरकार के लिए राजस्व संग्रह का भी एक नया स्रोत बनेगा। अंत में उन्होंने स्वीकार किया कि नेपाल में नीतियों और कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में कई खामियाँ हैं। उन्होंने इन खामियों को दूर करने और योजनाओं को ज़मीनी स्तर पर उतारने का वादा किया।

सोशल मीडिया पर सरकार की योजना

प्रधानमंत्री ओली ने सोशल मीडिया को एक “दोहरी धार वाली तलवार” बताया। एक ओर यह सूचना प्रसार, संवाद और लोकतांत्रिक भागीदारी का सशक्त माध्यम है, वहीं दूसरी ओर यह फेक न्यूज़, अफवाहों और सामाजिक तनाव का भी कारण बन रहा है। सरकार की योजना है कि नेपाल में सक्रिय सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स और कंपनियों को स्थानीय पंजीकरण करना होगा। इससे उनके संचालन पर निगरानी आसान होगी और यह सुनिश्चित होगा कि वे नेपाल के कानूनों का पालन करें। इसके साथ ही सरकार इन कंपनियों को कराधान के दायरे में लाने की योजना बना रही है। इससे न केवल राजस्व में वृद्धि होगी बल्कि सोशल मीडिया की आर्थिक गतिविधियों में पारदर्शिता भी आएगी |हालाँकि, प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि इस नियमन का मक़सद अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाना नहीं है, बल्कि इसे जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ संतुलित करना है। नागरिकों की गोपनीयता और उनकी स्वतंत्रता सुरक्षित रहेगी, लेकिन फेक न्यूज़ और नफरत फैलाने वाले कंटेंट पर सख़्त कार्यवाही की जाएगी।

विशेषज्ञों की राय

सूचना दिवस पर दिए गए प्रधानमंत्री के वक्तव्य पर विशेषज्ञों की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सबसे अहम है। यदि सोशल मीडिया पर सख़्त नियंत्रण लगाया गया तो यह स्वतंत्रता सीमित हो सकती है। उन्होंने चेतावनी दी कि पंजीकरण और कराधान के नाम पर किसी प्रकार की सेंसरशिप लोकतंत्र की भावना के खिलाफ होगी।

दूसरी ओर, कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर नियंत्रण आवश्यक है क्योंकि अनियंत्रित सामग्री समाज में भ्रम और अशांति फैला सकती है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को संतुलित नीति बनानी चाहिए जिसमें नागरिकों की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय हित दोनों सुरक्षित रहें।

1. राष्ट्रीय सूचना दिवस क्या है?

राष्ट्रीय सूचना दिवस नेपाल में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण अवसर है, जिसका उद्देश्य नागरिकों को सूचना का अधिकार (Right to Information) के महत्व से अवगत कराना और प्रशासनिक कार्यप्रणाली में पारदर्शिता को बढ़ावा देना है।

लोकतंत्र की मजबूती के लिए नागरिकों की जानकारी तक आसान पहुँच सुनिश्चित करना

नागरिकों और शासन के बीच विश्वास का पुल बनाना

सरकारी योजनाओं और नीतियों में नागरिकों की भागीदारी बढ़ाना

2. प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली का मुख्य संदेश क्या था?

मौलिक अधिकारों की रक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

लोकतांत्रिक संस्थाओं (संसद, न्यायपालिका, मीडिया) को मज़बूत करना ज़रूरी है।

सूचना का अधिकार केवल कागज़ों पर नहीं, बल्कि धरातल पर लागू होना चाहिए।

नीतियों और योजनाओं में मौजूद implementation gap (क्रियान्वयन की खाई) को पाटना आवश्यक है।

सोशल मीडिया को पंजीकरण और कराधान के दायरे में लाने की योजना बनाई जाएगी।

3. सरकार की सोशल मीडिया को लेकर क्या योजना है?

सोशल मीडिया को “दोहरी धार वाली तलवार” बताया गया।

नेपाल में सक्रिय सभी सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स को स्थानीय पंजीकरण करना होगा।

कंपनियों को कराधान के दायरे में लाने की योजना ताकि राजस्व बढ़े और पारदर्शिता सुनिश्चित हो।

उद्देश्य: फेक न्यूज़, अफवाहों और नफ़रत फैलाने वाले कंटेंट पर नियंत्रण, लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और नागरिकों की गोपनीयता सुरक्षित रहेगी।

4. सूचना दिवस पर पीएम ओली ने किन अन्य पहलुओं पर ज़ोर दिया?

डिजिटल गवर्नेंस को मज़बूत करना।

प्रेस की स्वतंत्रता और मीडिया की जवाबदेही सुनिश्चित करना।

नागरिकों की नीतिगत फैसलों में भागीदारी बढ़ाना।

सामाजिक और नैतिक पहलुओं को तकनीकी प्रगति के साथ जोड़ना।

5. विशेषज्ञों की राय क्या रही?

विरोधी पक्ष:

सख़्त नियंत्रण अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित कर सकता है।

पंजीकरण और कराधान के नाम पर सेंसरशिप लोकतंत्र की भावना के विरुद्ध होगी।

समर्थक पक्ष:

सोशल मीडिया पर नियंत्रण ज़रूरी है क्योंकि अनियंत्रित सामग्री समाज में अशांति फैला सकती है।

सरकार को संतुलित नीति बनानी चाहिए ताकि स्वतंत्रता और राष्ट्रीय हित दोनों सुरक्षित रहें।

रिपोर्ट : कोटो न्यूज़ नेटवर्क (KNN)

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