भारत ,20 जनवरी 2026 | जनपद गोरखपुर के पिपराइच विकासखंड अंतर्गत ग्राम सारंडा में दिनांक 20 जनवरी 2026 को सेव चाइल्ड सेवा फ्यूचर एसोसिएशन के तत्वाधान में एक भव्य जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र में बच्चों के अधिकारों, शिक्षा, बाल सुरक्षा, जल वायु परिवर्तन तथा सामाजिक कुरीतियों के प्रति लोगों को जागरूक करना रहा। कार्यक्रम में संस्था के पदाधिकारियों के साथ-साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं, पुरुष और बच्चे शामिल हुए। कार्यक्रम की अगुवाई सेव चाइल्ड सेवा फ्यूचर एसोसिएशन के पदाधिकारी मिथुन निषाद एवं रितेश प्रजापति ने की। दोनों पदाधिकारियों ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चों का सुरक्षित और शिक्षित भविष्य ही समाज और देश की मजबूत नींव है। उन्होंने कहा कि जब तक समाज का अंतिम व्यक्ति जागरूक नहीं होगा, तब तक वास्तविक विकास संभव नहीं है।

कार्यक्रम की शुरुआत ग्रामीणों और बच्चों के एकत्र होने के साथ हुई। संस्था के पदाधिकारियों ने सबसे पहले उपस्थित लोगों का स्वागत किया और कार्यक्रम के उद्देश्य की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सेव चाइल्ड सेवा फ्यूचर एसोसिएशन लंबे समय से बच्चों के अधिकारों, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में कार्य कर रही है। इसी क्रम में सारंडा गांव को चयनित कर यह विशेष अभियान चलाया गया, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में व्याप्त समस्याओं पर खुलकर चर्चा की जा सके।
कार्यक्रम में विशेष रूप से बच्चों को शिक्षा से जोड़ने, बाल श्रम और बाल विवाह जैसी कुरीतियों को समाप्त करने तथा बाल सुरक्षा के प्रति समाज की जिम्मेदारी को रेखांकित किया गया। पदाधिकारियों ने बताया कि हर बच्चे को शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा का अधिकार है और इन अधिकारों की रक्षा करना समाज का सामूहिक दायित्व है।

जन-जागरूकता कार्यक्रम में ग्राम सारंडा के कई सम्मानित ग्रामीण उपस्थित रहे। इनमें संतराज निषाद, शकुन्तला देवी, प्रभावती देवी, अनारी देवी, इन्द्रावती देवी, प्रेमा देवी, गूंजा देवी, केवली देवी, लक्ष्मीना देवी, वादी देवी, अहमद अली, सजदा, सपना सहित अनेक ग्रामीण और बड़ी संख्या में बच्चे कार्यक्रम में मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं और ग्रामीणों ने भी अपनी-अपनी समस्याओं और अनुभवों को साझा किया। महिलाओं ने शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और बच्चों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर खुलकर बातचीत की। संस्था के पदाधिकारियों ने उनकी बातों को गंभीरता से सुना और समाधान के लिए जागरूकता तथा सामूहिक प्रयासों पर बल दिया।
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा जल वायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण पर केंद्रित रहा। वक्ताओं ने बताया कि बदलता मौसम, अनियमित वर्षा, बढ़ता प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन भविष्य की पीढ़ियों के लिए गंभीर संकट पैदा कर रहा है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे पेड़-पौधों की रक्षा करें, जल संरक्षण पर ध्यान दें और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनें। इसके साथ ही सामाजिक कुरीतियों जैसे नशाखोरी, बाल विवाह, अशिक्षा और भेदभाव पर भी चर्चा की गई। संस्था के प्रतिनिधियों ने कहा कि इन बुराइयों को खत्म करने के लिए केवल कानून ही नहीं, बल्कि समाज की सोच में बदलाव जरूरी है। शिक्षा ही वह माध्यम है, जिससे समाज को सही दिशा दी जा सकती है।

कार्यक्रम के अंत में सेव चाइल्ड सेवा फ्यूचर एसोसिएशन द्वारा सेवा और सहयोग की भावना के तहत सामग्री वितरण किया गया। कार्यक्रम में मौजूद बच्चों को किताबें, पेंसिल, कैलेंडर, स्वेटर वितरित किए गए, जिससे उन्हें शिक्षा के प्रति प्रोत्साहन मिल सके। वहीं महिलाओं एवं जरूरतमंदों को शॉल और कंबल वितरित कर ठंड से राहत प्रदान की गई।
सामग्री वितरण के दौरान बच्चों और महिलाओं के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी। ग्रामीणों ने संस्था के इस प्रयास की सराहना की और भविष्य में भी इस तरह के कार्यक्रम आयोजित करने की मांग की। कार्यक्रम के समापन पर सभी उपस्थित लोगों ने यह संकल्प लिया कि वे बच्चों को स्कूल भेजेंगे, सामाजिक कुरीतियों का विरोध करेंगे और जागरूकता संदेश को घर-घर तक पहुंचाएंगे।

कार्यक्रम की मुख्य झलकियां :
इस जन-जागरूकता कार्यक्रम की सबसे अहम विशेषता यह रही कि इसमें बच्चों के सर्वांगीण विकास को केंद्र में रखा गया। कार्यक्रम के दौरान बच्चों के अधिकारों और शिक्षा पर विस्तार से चर्चा की गई। संस्था के पदाधिकारियों ने ग्रामीणों को बताया कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बच्चों को सही-गलत की पहचान, आत्मनिर्भरता और बेहतर भविष्य की दिशा देती है। अभिभावकों से अपील की गई कि वे हर हाल में अपने बच्चों को विद्यालय भेजें और पढ़ाई के लिए अनुकूल माहौल तैयार करें।
कार्यक्रम में बाल सुरक्षा और बाल श्रम जैसे गंभीर विषयों पर भी विशेष ध्यान दिया गया। वक्ताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बाल श्रम न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह बच्चों के बचपन और भविष्य के साथ अन्याय भी है। ग्रामीणों को बाल श्रम के दुष्परिणामों के बारे में बताया गया और यह संदेश दिया गया कि किसी भी परिस्थिति में बच्चों से मजदूरी कराना गलत है। साथ ही, बच्चों की सुरक्षा के लिए परिवार और समाज की भूमिका पर जोर दिया गया।

एक महत्वपूर्ण झलक जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी रही। कार्यक्रम में बताया गया कि बदलती जलवायु का सीधा असर आने वाली पीढ़ियों पर पड़ेगा। ग्रामीणों को पेड़ लगाने, जल संरक्षण, स्वच्छता बनाए रखने और प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीने का संदेश दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि आज किया गया छोटा-सा प्रयास भविष्य में बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करेगा।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों के उत्साह को बढ़ाने के उद्देश्य से किताबें, पेंसिल, कैलेंडर और स्वेटर का वितरण किया गया। यह वितरण केवल सामग्री देने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बच्चों को पढ़ाई के प्रति प्रेरित करने का एक सकारात्मक प्रयास भी था। बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ सामग्री ग्रहण की और पढ़ाई में मन लगाने का संकल्प लिया।
इसके साथ ही महिलाओं एवं जरूरतमंदों को शॉल और कंबल वितरित कर सामाजिक संवेदनशीलता का परिचय दिया गया। ठंड के मौसम में यह सहायता ग्रामीणों के लिए राहतकारी साबित हुई। महिलाओं ने संस्था के इस मानवीय कदम की सराहना की और ऐसे कार्यक्रमों की निरंतरता की मांग की।
कार्यक्रम की सबसे प्रेरणादायक झलक यह रही कि अंत में ग्रामीणों ने सामाजिक जागरूकता का सामूहिक संकल्प लिया। सभी ने मिलकर यह निर्णय किया कि वे बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ मिलकर काम करेंगे तथा जागरूकता के इस संदेश को अपने गांव और आसपास के क्षेत्रों तक पहुंचाएंगे।
रिपोर्ट : कोटो न्यूज़ नेटवर्क (KNN) |