भारत, 1 फरवरी 2026| उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जनपद में एक जन सेवा केंद्र संचालक द्वारा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की एक शाखा के प्रबंधक पर गंभीर आरोप लगाए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि बैंक प्रबंधक ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए वर्ष 2022 में शिकायतकर्ता के पेमेंट बैंक खाते पर बिना उचित कारण रोक लगा दी, जिससे उसका व्यवसाय पूरी तरह ठप हो गया। यह मामला आईजीआरएस (एकीकृत जन शिकायत निवारण प्रणाली) के माध्यम से वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गोरखपुर के संज्ञान में आया, जिसके बाद पुलिस द्वारा प्रारंभिक जांच की गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आईजीआरएस संदर्भ संख्या 60000230176945, दिनांक 09 सितम्बर 2023 के माध्यम से यह शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायतकर्ता श्री अंश निषाद पुत्र सूक्खू निषाद, निवासी ग्राम महराजी, थाना पिपराईच, जनपद गोरखपुर हैं। शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया कि वह एक जन सेवा केंद्र (CSC) के संचालक हैं और अपने ग्राहकों को विभिन्न सरकारी एवं निजी सेवाएँ उपलब्ध कराते थे, जिनका भुगतान उन्हें Paytm Payment Bank खाते के माध्यम से प्राप्त होता था।
शिकायतकर्ता के अनुसार, उनका Paytm Payment Bank खाता संख्या 918573954667, IFSC PAYTM0123456, MICR 110766001 था, जो उनके व्यवसाय का मुख्य वित्तीय माध्यम था। आरोप है कि SBI शाखा कजाकपुर, गोरखपुर के शाखा प्रबंधक ने बिना किसी लिखित सूचना, कारण अथवा नोटिस के वर्ष 2022 में इस खाते पर रोक लगवा दी। इससे न केवल उनकी आमदनी बंद हो गई, बल्कि ग्राहकों के भुगतान भी अटक गए, जिससे उनकी सामाजिक एवं आर्थिक छवि को गहरा नुकसान पहुँचा।
मामले की जांच क्षेत्राधिकारी चौरीचौरा, योगेन्द्र सिंह द्वारा की गई। जांच के दौरान शिकायतकर्ता से दूरभाष पर संपर्क कर उनका बयान लिया गया। शिकायतकर्ता ने स्पष्ट रूप से बताया कि उनका विवाद पूरी तरह से बैंकिंग प्रक्रिया से संबंधित है और उन्होंने किसी भी प्रकार का अवैध कार्य नहीं किया। जांच अधिकारी ने अपनी आख्या में उल्लेख किया कि यह प्रकरण मुख्य रूप से SBI बैंक से संबंधित है और इसकी विस्तृत जांच बैंक के उच्च अधिकारियों या प्रधान शाखा स्तर पर कराई जानी चाहिए।
जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि घटनास्थल का भौतिक निरीक्षण नहीं किया गया, । पुलिस स्तर पर किसी प्रकार की दंडात्मक या विधिक कार्रवाई नहीं की गई और मामले को बैंकिंग विवाद मानते हुए संबंधित विभाग को संदर्भित करने की संस्तुति की गई।
विस्तृत विश्लेषण
यह मामला कई गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि किसी नागरिक या व्यवसायी का बैंक खाता बिना स्पष्ट कारण के रोका जाता है, तो यह उसकी आजीविका के अधिकार का हनन माना जा सकता है। वहीं दूसरी ओर, बैंकों को भी मनी लॉन्ड्रिंग, संदिग्ध लेन-देन और नियामकीय निर्देशों के अंतर्गत कार्य करने का अधिकार है। ऐसे में पारदर्शिता और लिखित प्रक्रिया का पालन अत्यंत आवश्यक है।
गोरखपुर जनपद से जुड़ा यह मामला एक जन सेवा केंद्र (CSC) संचालक और देश के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के बीच उत्पन्न विवाद से संबंधित है, जो अब प्रशासनिक और पुलिस जांच के दायरे में आ चुका है। इस प्रकरण ने न केवल बैंकिंग प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि छोटे स्तर पर स्वरोजगार कर रहे नागरिकों की आर्थिक सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता उत्पन्न की है।
इस पूरे मामले के शिकायतकर्ता श्री अंश निषाद पुत्र सूक्खू निषाद, ग्राम महराजी, थाना पिपराईच, जनपद गोरखपुर के निवासी हैं। श्री अंश निषाद एक जन सेवा केंद्र के संचालक हैं और ग्रामीण क्षेत्र के नागरिकों को विभिन्न सरकारी एवं निजी सेवाएँ—जैसे आधार, पेंशन, प्रमाण पत्र, बिल भुगतान, बैंकिंग एवं डिजिटल लेन-देन से जुड़ी सुविधाएँ—प्रदान करते हैं। इन सेवाओं के बदले प्राप्त होने वाला भुगतान उनके Paytm Payment Bank खाते में जमा होता था, जो उनके व्यवसाय का मुख्य आर्थिक आधार था।
शिकायतकर्ता के अनुसार, उनका Paytm Payment Bank खाता वर्ष 2022 में अचानक सील कर दिया गया। आरोप है कि यह कार्रवाई SBI शाखा कजाकपुर, गोरखपुर के शाखा प्रबंधक द्वारा की गई, जिन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बिना किसी पूर्व सूचना, लिखित आदेश या स्पष्ट कारण बताए खाते पर रोक लगवा दी। खाता सील होने के कारण न केवल उनका व्यवसाय बाधित हुआ, बल्कि उनके कई ग्राहकों के भुगतान भी अटक गए, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान के साथ-साथ सामाजिक अपमान का भी सामना करना पड़ा।
खाते पर रोक लगाए जाने के बाद शिकायतकर्ता ने कई बार संबंधित बैंक शाखा से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन संतोषजनक उत्तर न मिलने पर उन्होंने अंततः आईजीआरएस (IGRS – Integrated Grievance Redressal System) के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज कराई। उनकी शिकायत संदर्भ संख्या 60000230176945, दिनांक 09 सितम्बर 2023 के अंतर्गत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, गोरखपुर के संज्ञान में आई।
आईजीआरएस से प्राप्त निर्देश के क्रम में इस मामले की प्रारंभिक जांच क्षेत्राधिकारी चौरीचौरा, योगेन्द्र सिंह द्वारा की गई। जांच के दौरान शिकायतकर्ता से दूरभाष के माध्यम से संपर्क कर उनका पक्ष जाना गया। शिकायतकर्ता ने जांच अधिकारी को बताया कि उनका संपूर्ण विवाद बैंकिंग लेन-देन और खाते पर लगाई गई रोक से संबंधित है तथा उन्होंने किसी भी प्रकार का अवैध या संदिग्ध कार्य नहीं किया है।
जांच आख्या में यह भी उल्लेख किया गया कि इस प्रकरण में किसी भी आरोपी व्यक्ति का प्रत्यक्ष बयान, स्वतंत्र गवाह का कथन, अभिलेखीय साक्ष्य या घटनास्थल निरीक्षण उपलब्ध नहीं कराया गया। साथ ही, यह मामला किसी आपराधिक कृत्य की श्रेणी में स्पष्ट रूप से नहीं आता है, बल्कि यह मुख्यतः बैंकिंग प्रक्रिया और प्रशासनिक निर्णय से जुड़ा हुआ है।
पुलिस द्वारा प्रस्तुत निष्कर्ष में स्पष्ट रूप से कहा गया कि शिकायतकर्ता द्वारा उठाया गया पूरा विषय SBI बैंक से संबंधित है और इसकी विस्तृत एवं तकनीकी जांच बैंक के उच्च अधिकारियों अथवा प्रधान शाखा स्तर से कराई जाना अधिक उपयुक्त प्रतीत होता है। इसी आधार पर पुलिस ने इस मामले में किसी प्रकार की दंडात्मक या विधिक कार्रवाई नहीं की और इसे बैंक स्तर पर निस्तारण योग्य प्रकरण मानते हुए आख्या प्रेषित कर दी।
रिपोर्ट : कोटो न्यूज़ नेटवर्क (KNN) |

