भारत, 1 फरवरी 2026|भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की गोरखपुर क्षेत्र-2 शाखाओं से जुड़ा एक मामला सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत सामने आया है, जिसने बैंकिंग प्रणाली, साइबर अपराध और खाताधारकों के अधिकारों को लेकर कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। मात्र 2020 रुपये के एक कथित अनाधिकृत ऑनलाइन लेन-देन के आधार पर एक खाताधारक का खाता होल्ड/फ्रीज कर दिया गया, जिसकी जानकारी RTI आवेदन के जवाब में सार्वजनिक हुई है।
इस मामले में श्री अंश निषाद, निवासी ग्राम महराजी, पोस्ट कुसमी बाज़ार, थाना पिपराइच, जनपद गोरखपुर ने भारतीय स्टेट बैंक में दर्ज कई ऑनलाइन RTI आवेदनों के माध्यम से जानकारी माँगी थी। इन आवेदनों के पंजीकरण क्रमांक SBILW/R/E/24/00920, SBILW/R/T/24/00143, 00145 एवं 00146 हैं। बैंक द्वारा दिनांक 04-12-2024 को दिए गए लिखित उत्तर में पूरे प्रकरण का विवरण साझा किया गया।
बैंक द्वारा दी गई सूचना के अनुसार, कजाकपुर शाखा (ब्रांच कोड 18917) के ग्राहक श्री जिलाजीत कुमार ने यह शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके खाता संख्या 39739827727 से दिनांक 07 नवंबर 2022 को बिना अनुमति 2020 रुपये का ऑनलाइन ट्रांसफर हो गया। यह लेन-देन ट्रांजैक्शन संख्या 231134252141 के माध्यम से किया गया था। शिकायत मिलने के बाद बैंक ने इसे गंभीरता से लेते हुए सर्विलांस विभाग के माध्यम से साइबर अपराध के अंतर्गत रिपोर्ट दर्ज कराई।
RTI के जवाब में यह भी स्पष्ट किया गया कि जिस खाते में राशि ट्रांसफर हुई थी, उसे जांच के उद्देश्य से होल्ड/फ्रीज कर दिया गया। हालांकि, बैंक ने यह भी कहा कि संबंधित खाताधारक अपने खाते से जुड़े होल्ड या फ्रीज की विस्तृत जानकारी अपने बैंक शाखा से प्राप्त कर सकते हैं। इस जवाब ने यह संकेत दिया कि बैंकिंग प्रक्रिया में कई बार खाताधारकों को बिना पूर्व सूचना के कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
इस पूरे मामले ने आम नागरिकों के बीच यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या मामूली राशि के ट्रांजैक्शन में भी खाताधारकों को लंबे समय तक परेशान होना पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर अपराधों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है, लेकिन साथ ही निर्दोष खाताधारकों के अधिकारों की रक्षा भी उतनी ही आवश्यक है। RTI के माध्यम से जानकारी मिलने के बाद यह स्पष्ट हुआ कि बैंक द्वारा की गई कार्रवाई नियमों के तहत तो है, लेकिन पारदर्शिता और संवाद की कमी ग्राहकों के लिए समस्या बन जाती है।
बैंक ने अपने उत्तर में यह भी उल्लेख किया है कि यदि आवेदक बैंक द्वारा दी गई सूचना से संतुष्ट नहीं है, तो वह 30 दिनों के भीतर अपीलीय अधिकारी के समक्ष अपील कर सकता है। अपीलीय अधिकारी के रूप में महाप्रबंधक नेटवर्क-III, भारतीय स्टेट बैंक, स्थानीय प्रधान कार्यालय, मोती महल मार्ग, लखनऊ को नामित किया गया है। यह प्रावधान सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत नागरिकों को न्याय पाने का एक और अवसर प्रदान करता है।
भारतीय स्टेट बैंक (SBI), जो देश का सबसे बड़ा सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक माना जाता है, एक बार फिर सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत सामने आए एक मामले को लेकर चर्चा में है। यह मामला उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जनपद स्थित कजाकपुर शाखा (ब्रांच कोड 18917) से जुड़ा हुआ है, जहाँ एक मामूली राशि के ऑनलाइन लेन-देन ने न केवल साइबर अपराध की प्रक्रिया को जन्म दिया, बल्कि एक निर्दोष खाताधारक के खाते के होल्ड/फ्रीज होने जैसी गंभीर स्थिति भी उत्पन्न कर दी।
बैंक अभिलेखों और RTI के माध्यम से प्राप्त जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता श्री जिलाजीत कुमार ने यह आरोप लगाया था कि उनके बैंक खाते से 07 नवंबर 2022 को बिना उनकी अनुमति के 2020 रुपये की राशि ऑनलाइन माध्यम से ट्रांसफर कर दी गई। इस संदिग्ध लेन-देन की पहचान ट्रांजैक्शन संख्या 231134252141 के रूप में की गई। शिकायतकर्ता का कहना था कि यह राशि उन्होंने स्वयं ट्रांसफर नहीं की, जिससे यह मामला सीधे तौर पर अनधिकृत साइबर लेन-देन की श्रेणी में आ गया।
शिकायत मिलने के बाद भारतीय स्टेट बैंक की कजाकपुर शाखा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अपने आंतरिक सर्विलांस तंत्र को सक्रिय किया। बैंक की ओर से यह मामला साइबर अपराध से जुड़ा मानते हुए संबंधित विभाग को रिपोर्ट किया गया। प्रक्रिया के तहत, जिस खाते में विवादित राशि ट्रांसफर हुई थी, उसे एहतियातन होल्ड/फ्रीज कर दिया गया, ताकि जांच के दौरान किसी भी प्रकार की राशि की निकासी या आगे का लेन-देन रोका जा सके।
इस पूरे मामले की वास्तविक स्थिति तब सामने आई, जब RTI आवेदक श्री अंश निषाद ने सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत भारतीय स्टेट बैंक से इस संबंध में जानकारी मांगी। उन्होंने बैंक में ऑनलाइन RTI आवेदन दर्ज कर यह जानने का प्रयास किया कि आखिर किस आधार पर खाता फ्रीज किया गया, शिकायत किसने की, लेन-देन की तिथि क्या थी और बैंक ने इस पर क्या कार्रवाई की। बैंक द्वारा इन आवेदनों का विधिवत उत्तर 04 दिसंबर 2024 को जारी किया गया।
RTI के जवाब में बैंक ने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया कि शिकायतकर्ता श्री जिलाजीत कुमार द्वारा की गई शिकायत के आधार पर ही यह कार्रवाई की गई थी और मामला साइबर अपराध से संबंधित होने के कारण नियमानुसार कदम उठाए गए। बैंक ने यह भी कहा कि खाता धारक को अपने खाते से जुड़े होल्ड या फ्रीज की विस्तृत जानकारी अपनी संबंधित शाखा से प्राप्त करनी चाहिए।
इस प्रकरण ने बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता, साइबर सुरक्षा और खाताधारकों के अधिकारों को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जहां साइबर अपराधों पर त्वरित कार्रवाई आवश्यक है, वहीं दूसरी ओर यह भी जरूरी है कि निर्दोष खाताधारकों को बिना स्पष्ट सूचना और समयबद्ध समाधान के परेशान न होना पड़े। RTI के माध्यम से सामने आई यह जानकारी दर्शाती है कि सूचना का अधिकार अधिनियम आम नागरिकों के लिए न केवल एक कानूनी हथियार है, बल्कि यह संस्थानों की जवाबदेही तय करने का भी सशक्त माध्यम है।
रिपोर्ट : कोटो न्यूज़ नेटवर्क (KNN) |