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शहीद विनोद साहनी के परिजनों से मिला मोस्ट प्रतिनिधिमंडल, 15 दिन में न्याय नहीं मिला तो 2 अक्टूबर से आंदोलन

गोण्डा के रेक्सड़िया गांव में शहीद विनोद साहनी के परिजनों से मुलाकात के दौरान मोस्ट प्रतिनिधिमंडल के सदस्य...

रेक्सड़िया गांव में विनोद साहनी के परिजनों से मुलाकात करते मोस्ट प्रतिनिधिमंडल के पदाधिकारी ...

गोण्डा, 17 सितंबर 2026 | गोण्डा जिले के परसपुर थाना क्षेत्र के रेक्सड़िया गांव निवासी विनोद साहनी की मौत के मामले को लेकर सामाजिक संगठन मोस्ट के प्रतिनिधिमंडल ने उनके परिजनों से मुलाकात कर मामले की जानकारी ली। मोस्ट निदेशक शिक्षक श्यामलाल निषाद “गुरूजी” के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने 10 सितंबर 2026 को रेक्सड़िया गांव पहुंचकर विनोद साहनी की धर्मपत्नी, पुत्र राजा साहनी तथा अन्य परिजनों से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने परिवार से घटना, शासन-प्रशासन की ओर से किए गए आश्वासनों तथा अब तक हुई कार्रवाई के संबंध में जानकारी प्राप्त की।

प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि पीड़ित परिवार को जिन मांगों और आश्वासनों के पूरा होने की उम्मीद थी, उनमें से कई पर अभी तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। संगठन की ओर से पुलिस-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी नाराजगी व्यक्त की गई। मोस्ट प्रतिनिधियों का कहना है कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के साथ-साथ उनके साथ किए गए वादों को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाना चाहिए।

विनोद साहनी की मौत के मामले में पुलिस की ओर से पहले ही मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक घटना 9 सितंबर की रात हुई थी, जब विनोद साहनी के साथ रास्ते में मारपीट की गई थी। गंभीर रूप से घायल होने के बाद उन्हें इलाज के लिए लखनऊ रेफर किया गया, जहां उनकी मृत्यु हो गई। मामले में नामजद लोगों सहित अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किए जाने की रिपोर्ट है।

मोस्ट प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि विनोद साहनी के परिवार की स्थिति को देखते हुए प्रशासन की जिम्मेदारी केवल सुरक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि परिवार को न्याय की प्रक्रिया में आवश्यक सहयोग भी मिलना चाहिए। संगठन के अनुसार प्रतिनिधिमंडल ने परिजनों से घटना के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से बातचीत की और यह समझने का प्रयास किया कि घटना के बाद परिवार को शासन-प्रशासन की ओर से किस प्रकार की सहायता और आश्वासन मिला है। प्रतिनिधिमंडल के मुताबिक परिजनों ने अपनी समस्याओं और अपेक्षाओं को उनके सामने रखा। संगठन का कहना है कि परिवार की मांगों को गंभीरता से लेते हुए शासन-प्रशासन को स्पष्ट समयसीमा में कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि पीड़ित परिवार को यह महसूस हो कि उनकी बात सुनी जा रही है।

 

मोस्ट निदेशक शिक्षक श्यामलाल निषाद “गुरूजी” ने प्रतिनिधिमंडल की ओर से परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए आर्थिक सहयोग भी किया। उन्होंने सामाजिक बंधुओं से भी पीड़ित परिवार की मदद के लिए आगे आने की अपील की। संगठन का कहना है कि संकट की इस घड़ी में परिवार को सामाजिक और आर्थिक सहयोग की आवश्यकता है। मोस्ट प्रतिनिधिमंडल ने क्षेत्र में मौजूद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई। संगठन के अनुसार विनोद साहनी के गांव और आसपास के क्षेत्र में पुलिस बल की भारी मौजूदगी के कारण आम लोगों के लिए परिवार से मिलना कठिन हो गया है। प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि उनकी टीम को भी परिवार तक पहुंचने के लिए अपना पहनावा बदलना पड़ा और बाइक तथा पैदल रास्ते से जाना पड़ा। हालांकि, घटनास्थल और आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाए जाने की रिपोर्ट अन्य समाचार माध्यमों में भी सामने आई है। विनोद साहनी की मौत के बाद तनाव की आशंका के मद्देनजर करनैलगंज क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई थी।

मोस्ट प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि किसी भी पीड़ित परिवार से मिलने आने वाले सामाजिक, राजनीतिक अथवा अन्य प्रतिनिधियों को कानून-व्यवस्था के दायरे में आवश्यक सुरक्षा प्रदान करना प्रशासन की जिम्मेदारी होनी चाहिए। संगठन का तर्क है कि यदि कोई व्यक्ति परिवार से शोक संवेदना व्यक्त करने या आर्थिक सहायता देने के लिए आता है, तो उसके आवागमन को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने की व्यवस्था होनी चाहिए |प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर रोष व्यक्त करते हुए कहा कि मामले की जांच निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए। संगठन ने यह भी कहा कि दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई हो और पीड़ित परिवार को न्याय मिलने में किसी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए। विनोद साहनी प्रकरण में पुलिस की ओर से कार्रवाई की जा चुकी है। रिपोर्टों के अनुसार घटना के बाद तीन नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी दी गई थी तथा पुलिस ने मामले की विवेचना शुरू की थी। इसके अलावा पुलिस की कार्यप्रणाली में लापरवाही के आरोपों के बीच परसपुर थानाध्यक्ष, शाहपुर चौकी प्रभारी और एक बीट आरक्षी के निलंबन की भी रिपोर्ट सामने आई है।

मोस्ट प्रतिनिधिमंडल की ओर से रिटायर्ड नेवी ऑफिसर राम उजागिर यादव ने पीड़ित परिवार के समक्ष शासन से मांग रखी कि परिवार की मांगों पर 15 दिन के भीतर ठोस कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि यदि निर्धारित अवधि में परिवार को न्याय और उनकी मांगों के समाधान की दिशा में अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए तो संगठन प्रदेश स्तर पर आंदोलन का रास्ता अपनाएगा। राम उजागिर यादव के अनुसार आंदोलन की शुरुआत 2 अक्टूबर 2026 को सुलतानपुर से की जाएगी। इसके बाद संगठन द्वारा प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर धरना-प्रदर्शन, सत्याग्रह और अन्य लोकतांत्रिक कार्यक्रम किए जाने की बात कही गई है। मोस्ट प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग को उठाना है। संगठन ने शासन-प्रशासन से आग्रह किया कि परिवार की समस्याओं और मांगों को प्राथमिकता के आधार पर सुना जाए और जांच तथा कानूनी प्रक्रिया को निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ाया जाए।

पीड़ित परिवार के साथ खड़े रहने का दावा

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि विनोद साहनी के परिवार को इस कठिन समय में अकेला नहीं छोड़ा जाना चाहिए। संगठन की ओर से सामाजिक संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम लोगों से भी परिवार की मदद के लिए आगे आने की अपील की गई। श्यामलाल निषाद “गुरूजी” ने परिवार को आर्थिक सहयोग देते हुए कहा कि समाज के सक्षम लोगों को भी अपनी क्षमता के अनुसार पीड़ित परिवार की सहायता करनी चाहिए। प्रतिनिधिमंडल के अनुसार आर्थिक सहायता परिवार को तत्काल राहत देने के साथ-साथ यह संदेश भी देती है कि संकट की घड़ी में समाज उनके साथ खड़ा है।

प्रशासन से समयबद्ध कार्रवाई की मांग

मोस्ट प्रतिनिधिमंडल ने शासन और प्रशासन के सामने कई मांगों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की बात कही। संगठन के अनुसार परिवार को न्याय दिलाना, घटना की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना, दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई, परिवार की सुरक्षा तथा उनके सामने रखी गई अन्य मांगों पर स्पष्ट निर्णय लेना आवश्यक है। प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि केवल आश्वासन देने के बजाय उन आश्वासनों के अनुपालन की नियमित समीक्षा भी होनी चाहिए। संगठन ने मांग की कि प्रशासन परिवार के साथ संवाद बनाए रखे और उन्हें जांच तथा कानूनी प्रक्रिया से संबंधित जानकारी समय-समय पर उपलब्ध कराए।

पुलिस कार्रवाई पर भी उठे सवाल

विनोद साहनी प्रकरण के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर अलग-अलग पक्षों की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी की कार्रवाई की, जबकि पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी लापरवाही के आरोप में विभागीय कार्रवाई की गई। दूसरी ओर, परिवार और विभिन्न सामाजिक-राजनीतिक समूहों की ओर से कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए गए हैं। कई राजनीतिक और सामाजिक प्रतिनिधिमंडलों के परिवार से मिलने के प्रयास तथा पुलिस द्वारा सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाए जाने की खबरें भी सामने आई हैं। मोस्ट प्रतिनिधिमंडल ने इसी संदर्भ में कहा कि प्रशासन को पीड़ित परिवार की शिकायतों को गंभीरता से सुनना चाहिए और किसी भी प्रकार की आशंका को दूर करने के लिए पारदर्शी संवाद स्थापित करना चाहिए।

2 अक्टूबर से आंदोलन की चेतावनी

प्रतिनिधिमंडल की ओर से दी गई चेतावनी के मुताबिक यदि 15 दिन के भीतर पीड़ित परिवार की मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई तो 2 अक्टूबर से आंदोलन शुरू किया जाएगा। संगठन के अनुसार इसकी शुरुआत सुलतानपुर से होगी और आगे प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं। संगठन ने धरना-प्रदर्शन, सत्याग्रह और आंदोलन की बात कही है। साथ ही प्रशासन से आग्रह किया गया है कि आंदोलन की स्थिति पैदा होने से पहले ही परिवार की मांगों पर गंभीरता से विचार कर समाधान की दिशा में कदम उठाए जाएं।

प्रतिनिधिमंडल में ये लोग रहे शामिल

मोस्ट के प्रतिनिधिमंडल में मोस्ट प्रमुख जीशान अहमद, जनरल सेक्रेटरी एवं रिटायर्ड नेवी ऑफिसर राम उजागिर यादव तथा मोस्ट जिला संयोजक राकेश कुमार निषाद शामिल रहे। प्रतिनिधिमंडल ने पीड़ित परिवार से बातचीत के बाद संगठन की ओर से आर्थिक सहयोग भी किया। मोस्ट प्रतिनिधियों ने कहा कि विनोद साहनी के परिवार को न्याय दिलाने के मुद्दे पर संगठन आगे भी अपनी आवाज उठाता रहेगा। संगठन ने सामाजिक बंधुओं से अपील की कि वे परिवार के साथ संवेदनात्मक और आर्थिक सहयोग बनाए रखें।

रिपोर्ट : कोटो न्यूज़ नेटवर्क (KNN) |

 

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