महराजी में डेंगू-मलेरिया
संवादाताः कोटो न्यूज़ नेटवर्क (KNN) | गोरखपुर जनपद के पिपराईच थाना क्षेत्र के ग्राम महराजी में बुधवार को पंचायती राज विभाग द्वारा एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण समुदाय विशेषकर बच्चों को डेंगू और मलेरिया जैसी खतरनाक बीमारियों से बचाव के उपायों की जानकारी देना था। कार्यक्रम का आयोजन प्राथमिक विद्यालय महराजी में किया गया, जहाँ विद्यालय के अध्यापक, कोटो ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष, सैकड़ों ग्रामीणजन उपस्थित रहे। जागरूकता कार्यक्रम की शुरुआत बच्चों द्वारा स्वागत गीत प्रस्तुत करने से हुई। इसके बाद पंचायत राज विभाग के अधिकारियों ने मलेरिया और डेंगू के कारणों, लक्षणों और उनके रोकथाम के उपायों पर विस्तृत जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि डेंगू और मलेरिया का मुख्य कारण गंदे पानी का जमाव और अस्वच्छ वातावरण है। लोगों को अपने घरों, आँगनों और आसपास की नालियों की सफाई पर विशेष ध्यान देने की अपील की गई। साथ ही, मच्छरदानी और पूरी बाँह के कपड़े पहनने की आदत को बच्चों में विकसित करने का सुझाव दिया गया।
कोटो ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने अपने संबोधन में कहा कि बच्चों के माध्यम से पूरे समाज में सकारात्मक संदेश पहुँचाया जा सकता है। यदि बच्चे छोटी उम्र से ही साफ-सफाई और स्वास्थ्य संबंधी आदतें सीखेंगे, तो भविष्य में पूरे समुदाय को इसका लाभ मिलेगा। उन्होंने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे अपने घर जाकर अपने माता-पिता, भाई-बहनों और पड़ोसियों को भी डेंगू और मलेरिया से बचाव के बारे में जानकारी दें। कार्यक्रम के दौरान कई बच्चों ने प्रश्न भी पूछे, जिनका उत्तर विशेषज्ञों ने सरल भाषा में दिया। विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने कहा कि बच्चों को जागरूक करना समय की आवश्यकता है, क्योंकि डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियाँ हर साल हजारों लोगों को प्रभावित करती हैं। उन्होंने पंचायत राज विभाग और कोटो ट्रस्ट को धन्यवाद देते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों से न केवल बच्चों बल्कि पूरे गाँव को लाभ मिलता है। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों को शपथ दिलाई गई कि वे अपने घर और गाँव को स्वच्छ रखेंगे और किसी भी प्रकार का गंदा पानी इकट्ठा नहीं होने देंगे।
डेंगू और मलेरिया के मच्छरों का जीवनचक्र पानी से जुड़ा होता है। चाहे पानी साफ हो या गंदा, यदि वह कुछ दिनों तक स्थिर रहता है तो मच्छर उसमें अंडे दे सकते हैं और लार्वा तेजी से विकसित होकर नए मच्छर बन सकते हैं। यही कारण है कि बारिश के मौसम में बीमारी के मामले बढ़ जाते हैं। यदि घर के बाहर नालियों में गंदा पानी रुका है, छत पर बाल्टियों या बर्तनों में वर्षा का पानी भर गया है, या पुराने टायर और गमलों में पानी जमा है, तो यह मच्छरों की संख्या को कई गुना बढ़ा देता है। इसलिए प्रत्येक परिवार को यह संकल्प लेना चाहिए कि अपने घर और आसपास पानी इकट्ठा नहीं होने देंगे। स्वच्छ और सूखा वातावरण ही मच्छरों के प्रजनन को रोक सकता है।
पानी पीने और घरेलू उपयोग के लिए रखी गई टंकियाँ, मटके, ड्रम या बाल्टियाँ यदि खुले छोड़ दिए जाएँ तो यह मच्छरों के लिए सबसे सुरक्षित अड्डा बन जाते हैं। कई बार लोग सोचते हैं कि चूँकि यह पानी साफ है इसलिए इसमें मच्छर नहीं पनपेंगे, लेकिन यह गलतफहमी है। एडीज़ इजिप्टी नामक मच्छर विशेष रूप से साफ पानी में ही अंडे देता है। इसीलिए पानी की टंकियों और पात्रों को हमेशा ढककर रखना चाहिए। हर सप्ताह इन बर्तनों को खाली करके अच्छे से साफ करें और फिर ताज़ा पानी भरें। यह साधारण-सा कदम बड़े खतरे को टाल सकता है। मच्छरों से सीधी सुरक्षा पाने का सबसे आसान और सस्ता उपाय है मच्छरदानी। रात को सोते समय मच्छरदानी का उपयोग हर व्यक्ति के लिए ज़रूरी है, विशेषकर छोटे बच्चों और बुजुर्गों के लिए। इसके साथ ही शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनना भी जरूरी है। आधी बाँह के कपड़े या छोटे कपड़े पहनने से शरीर खुला रह जाता है और मच्छरों के काटने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए दिन हो या रात, पूरी बाँह की शर्ट, फुल पैंट और हल्के लेकिन ढके हुए कपड़े पहनना स्वास्थ्य के लिए बेहतर है।
बहुत से लोग रोज़ सफाई करते हैं, लेकिन उन जगहों की अनदेखी कर देते हैं जहाँ मच्छर सबसे ज़्यादा पनपते हैं। जैसे—छत पर रखे गमले, पुराने टायर, छिपे हुए कोने, कूलर और पानी जमा करने वाले पात्र। इन जगहों पर जमा पानी कुछ ही दिनों में मच्छरों के लार्वा को जन्म दे देता है। इसलिए सप्ताह में कम से कम एक बार पूरी तरह निरीक्षण करना ज़रूरी है। कूलर का पानी निकालकर सुखाएँ और उसमें ताज़ा पानी भरने से पहले कीटनाशक की कुछ बूँदें डालें। नालियों की सफाई कराएँ और छत पर जमा पानी को बहा दें। यह आदत यदि हर घर अपना ले, तो मच्छरों की संख्या में 70% तक कमी लाई जा सकती है। डेंगू और मलेरिया के शुरुआती लक्षण सामान्य बुखार जैसे ही लगते हैं, इसलिए लोग अक्सर इसे हल्के में लेते हैं। लेकिन यह लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। यदि किसी व्यक्ति को तेज़ बुखार, लगातार सिर दर्द, आँखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में पीड़ा, थकान या त्वचा पर लाल धब्बे दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। स्वयं दवा लेना या घरेलू इलाज पर निर्भर रहना खतरनाक है। समय पर जांच और इलाज से गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग के नज़दीकी केंद्र पर पहुँचकर रक्त की जाँच कराएँ और चिकित्सक की सलाह के अनुसार दवा लें।
डेंगू फैलाने वाला मच्छर एडीज़ इजिप्टी विशेष रूप से सुबह और शाम के समय सक्रिय रहता है। यह मच्छर साफ और स्थिर पानी में अंडे देता है। यही कारण है कि घर में रखे गमले, फूलदान या पानी से भरे बर्तन इसके लिए आदर्श स्थान बन जाते हैं। यह मच्छर दिन के समय काटता है, इसलिए केवल रात को मच्छरदानी का उपयोग काफी नहीं है। दिन के समय भी पूरी बाँह के कपड़े पहनना और शरीर को ढककर रखना ज़रूरी है।
मलेरिया फैलाने वाला मच्छर एनोफिलीज़ होता है, जो प्रायः रात में काटता है। यह मच्छर गंदे, दलदली और नमी वाले क्षेत्रों में तेजी से प्रजनन करता है। यही कारण है कि ग्रामीण इलाकों और वर्षा ऋतु में मलेरिया के मामले बढ़ जाते हैं। इससे बचाव के लिए रात को सोते समय मच्छरदानी का उपयोग अनिवार्य है। इसके साथ ही घर में कीटनाशक स्प्रे का छिड़काव भी करना चाहिए। डेंगू और मलेरिया दोनों ही बीमारियों का कोई स्थायी टीका या पक्का इलाज नहीं है। डॉक्टर और स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि इनसे बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है—सावधानी और सतर्कता। यदि हम साफ-सफाई रखें, पानी जमा न होने दें, समय पर लक्षण पहचानकर उपचार लें, तो इन बीमारियों पर आसानी से काबू पाया जा सकता है। यही कारण है कि कहा जाता है—“रोकथाम इलाज से बेहतर है।”
रिपोर्ट : कोटो न्यूज़ नेटवर्क (KNN)