पूर्वांचल ,गोरखपुर 15 जनवरी 2026|भारत की परिवहन और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को आधुनिक, तेज, सुरक्षित और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (DFCCIL) द्वारा Transforming Transportation विषय पर एक भव्य एक्सक्लूसिव इंटरेक्शन प्रोग्राम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम 13 जनवरी 2026 को मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MMMUT), गोरखपुर में सुबह 11 बजे से आयोजित हुआ, जिसमें रेलवे, इंफ्रास्ट्रक्चर, इंजीनियरिंग और शिक्षा जगत से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षाविद एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। इस विशेष संवाद कार्यक्रम का आयोजन DFCCIL प्रयागराज टीम द्वारा किया गया था, जिसका उद्देश्य भविष्य के इंजीनियरों, तकनीकी विशेषज्ञों और नीति-निर्माताओं को देश की सबसे महत्वाकांक्षी रेल परियोजनाओं में से एक डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से परिचित कराना था।
कार्यक्रम की भव्य शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और स्वागत संबोधन के साथ हुई। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में छात्रों में विशेष उत्साह देखने को मिला। सभागार पूरी तरह से भरा हुआ था, जहां तकनीकी शिक्षा और व्यावहारिक उद्योग जगत के बीच संवाद का एक मजबूत मंच तैयार हुआ। DFCCIL के अधिकारियों ने अपने प्रस्तुतिकरण के माध्यम से बताया कि किस प्रकार भारत की माल परिवहन प्रणाली को नई तकनीक और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए बदला जा रहा है। कार्यक्रम में उपस्थित छात्रों को फ्रेट कॉरिडोर की संकल्पना, उसकी आवश्यकता और इसके दीर्घकालिक लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर – भारत के भविष्य की रीढ़
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) भारत सरकार के रेल मंत्रालय की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है, जिसका मुख्य उद्देश्य मालगाड़ियों के लिए अलग, अत्याधुनिक और उच्च क्षमता वाला रेल नेटवर्क तैयार करना है। DFCCIL के माध्यम से देश में पूर्वी और पश्चिमी फ्रेट कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं, जिससे यात्री ट्रेनों और मालगाड़ियों के संचालन को अलग-अलग किया जा सके।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने बताया कि फ्रेट कॉरिडोर के संचालन से:
लॉजिस्टिक्स लागत में भारी कमी आएगी
माल ढुलाई का समय घटेगा
उद्योगों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी
निर्यात और आयात को बढ़ावा मिलेगा
यह परियोजना मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत 2047 जैसे राष्ट
शिक्षा और उद्योग के बीच सशक्त संवाद
यह एक्सक्लूसिव इंटरेक्शन प्रोग्राम विश्वविद्यालय और उद्योग के बीच सेतु बनता नजर आया। MMMUT के छात्रों और शिक्षकों को DFCCIL के वरिष्ठ अधिकारियों से सीधे संवाद करने का अवसर मिला।
इस दौरान छात्रों को यह समझने का मौका मिला कि:
बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की योजना कैसे बनती है
डिजाइन और इंजीनियरिंग में किन बातों का ध्यान रखा जाता है
प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन में क्या चुनौतियां आती हैं
ऑपरेशन और मेंटेनेंस किस प्रकार किया जाता है
वास्तविक उदाहरणों के माध्यम से अधिकारियों ने छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान प्रदान किया, जो पाठ्यपुस्तकों से कहीं आगे था
प्रमुख अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम की गरिमा वरिष्ठ अधिकारियों और शिक्षाविदों की उपस्थिति से और बढ़ गई। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से शामिल रहे:
प्रो. जय प्रकाश सैनी – माननीय कुलपति, MMMUT गोरखपुर
श्री ए. बी. सरन – चीफ जनरल मैनेजर, DFCCIL प्रयागराज
श्री ए. एस. तोमर – ग्रुप जनरल मैनेजर (S&T/CO)
श्री आशीष मिश्रा – जनरल मैनेजर (सिक्योरिटी/EDFC)
श्री मन्नू प्रकाश दुबे – अपर महाप्रबंधक (ऑपरेशन्स एवं बिजनेस डेवलपमेंट/EDFC)
श्री राजनाथ सिंह – डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर (इलेक्ट्रिकल), प्रयागराज
श्री भुवनेश पांडेय – जूनियर प्रोजेक्ट मैनेजर (इंजीनियरिंग), प्रयागराज
Transforming Transportation पर विस्तृत मंथन
कार्यक्रम के दौरान Future of Freight Corridors, Innovations and Opportunities, Automation in Railways जैसे विषयों पर गहन चर्चा की गई। DFCCIL के विशेषज्ञों ने बताया कि किस प्रकार:
पूर्ण इलेक्ट्रिफिकेशन
ऑटोमेटेड सिग्नलिंग सिस्टम
हाई एक्सल लोड ट्रैक
स्मार्ट ट्रैक मॉनिटरिंग
के माध्यम से मालगाड़ियों की गति और वहन क्षमता को कई गुना बढ़ाया जा रहा है।
छात्रों के लिए करियर और रोजगार के अवसर
MMMUT के छात्रों के लिए यह कार्यक्रम करियर के लिहाज से अत्यंत लाभकारी रहा। DFCCIL अधिकारियों ने बताया कि रेलवे और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में इंजीनियरिंग, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट, सुरक्षा, ऑपरेशन, सिग्नलिंग, इलेक्ट्रिकल और बिजनेस डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में युवाओं के लिए व्यापक अवसर मौजूद हैं।
प्रश्नोत्तर सत्र में छात्रों ने भर्ती प्रक्रिया, ट्रेनिंग, स्किल्स और प्रमोशन से जुड़े सवाल पूछे, जिनका व्यावहारिक और स्पष्ट उत्तर दिया गया।
कुलपति का प्रेरणादायक संदेश
माननीय कुलपति प्रो. जय प्रकाश सैनी ने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे संवाद कार्यक्रम छात्रों को किताबी ज्ञान से आगे ले जाकर वास्तविक दुनिया की समझ प्रदान करते हैं। उन्होंने DFCCIL का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय और उद्योग के सहयोग से ही तकनीकी शिक्षा को मजबूत किया जा सकता है।
DFCCIL की भविष्य की योजनाएं
DFCCIL अधिकारियों ने जानकारी दी कि आने वाले समय में फ्रेट कॉरिडोर नेटवर्क का और विस्तार किया जाएगा तथा नई तकनीकों को शामिल किया जाएगा। इससे माल परिवहन अधिक सुरक्षित, पर्यावरण अनुकूल और समयबद्ध होगा।
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (Dedicated Freight Corridor – DFC) भारत सरकार के रेल मंत्रालय की एक महत्वाकांक्षी और दूरदर्शी परियोजना है, जिसका उद्देश्य देश की माल परिवहन व्यवस्था को आधुनिक, तेज, सुरक्षित और किफायती बनाना है। इस परियोजना के अंतर्गत मालगाड़ियों के लिए अलग और विशेष रेल नेटवर्क विकसित किया जा रहा है, जिससे यात्री ट्रेनों और मालगाड़ियों के बीच होने वाले ट्रैफिक दबाव को समाप्त किया जा सके।
अलग से मालगाड़ियों के लिए आधुनिक रेल नेटवर्क
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के तहत भारत में पहली बार माल परिवहन के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए रेलवे ट्रैक तैयार किए जा रहे हैं। ये ट्रैक अधिक एक्सल लोड, लंबी और भारी मालगाड़ियों को संभालने में सक्षम हैं। इससे न केवल ट्रेनों की गति बढ़ेगी बल्कि माल ढुलाई की क्षमता भी कई गुना बढ़ जाएगी। यह नेटवर्क अत्याधुनिक सिग्नलिंग, ऑटोमेशन और सुरक्षा प्रणालियों से लैस है।
तेज, सुरक्षित और किफायती परिवहन
DFC के माध्यम से मालगाड़ियों की औसत गति पारंपरिक रेलवे नेटवर्क की तुलना में काफी अधिक होगी। तेज रफ्तार के साथ-साथ आधुनिक सुरक्षा प्रणाली, फुली इलेक्ट्रिफाइड ट्रैक और नियंत्रित ऑपरेशन सिस्टम माल परिवहन को अधिक सुरक्षित बनाएंगे। समय की बचत और ईंधन खर्च में कमी के कारण माल ढुलाई की लागत भी कम होगी, जिससे यह परिवहन व्यवस्था उद्योगों के लिए किफायती साबित होगी।
लॉजिस्टिक्स लागत में उल्लेखनीय कमी
भारत में लॉजिस्टिक्स लागत अभी भी विकसित देशों की तुलना में अधिक है। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के संचालन से माल की आवाजाही तेज और निर्बाध होगी, जिससे ट्रांजिट टाइम घटेगा और स्टोरेज खर्च कम होगा। इसके परिणामस्वरूप कुल लॉजिस्टिक्स लागत में बड़ी कमी आएगी, जो सीधे तौर पर व्यापार और उद्योग जगत को लाभ पहुंचाएगी।
उद्योग और निर्यात को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
DFC से औद्योगिक क्लस्टर्स, बंदरगाहों, लॉजिस्टिक्स हब और निर्यात केंद्रों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे कच्चे माल और तैयार उत्पादों की आवाजाही आसान होगी। निर्यातकों को समय पर माल पहुंचाने में सुविधा होगी, जिससे भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ेगी और ‘मेक इन इंडिया’ को नई मजबूत
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर केवल एक रेल परियोजना नहीं है, बल्कि यह भारत की आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मजबूत कदम है। मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के बिना औद्योगिक विकास संभव नहीं है। DFC के माध्यम से देश में उत्पादन, रोजगार, निवेश और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा, जिससे आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को साकार करने में मदद मिलेगी।
भारत के परिवहन भविष्य की रीढ़
कुल मिलाकर, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर भारत के परिवहन ढांचे को नई दिशा देने वाली परियोजना है। यह न केवल रेलवे के स्वरूप को बदलेगी बल्कि पूरे लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक सेक्टर में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी। आने वाले वर्षों में DFC भारत की आर्थिक प्रगति और वैश्विक व्यापार में मजबूत भूमिका निभाने वाला है।
रिपोर्ट : कोटो न्यूज़ नेटवर्क (KNN) |