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अभय समाज पार्टी के उपराष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. घनश्याम निषाद ने मकर संक्रांति पर देशवासियों को दी हार्दिक शुभकामनाएं

पूर्वांचल ,गोरखपुर 13 जनवरी 2026| अभय समाज पार्टी के उपराष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. घनश्याम निषाद ने मकर संक्रांति के पावन अवसर पर देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि यह सामाजिक समरसता, समानता, परिश्रम और न्याय की भावना को मजबूत करने वाला राष्ट्रीय…

अभय समाज पार्टी

पूर्वांचल ,गोरखपुर 13 जनवरी 2026| अभय समाज पार्टी के उपराष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. घनश्याम निषाद ने मकर संक्रांति के पावन अवसर पर देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि यह सामाजिक समरसता, समानता, परिश्रम और न्याय की भावना को मजबूत करने वाला राष्ट्रीय पर्व है।

डॉ. घनश्याम निषाद ने कहा कि सूर्य के उत्तरायण होने का यह पर्व अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का प्रतीक है। जिस प्रकार सूर्य अपनी दिशा बदलकर नई ऊर्जा का संचार करता है, उसी प्रकार समाज और राजनीति को भी अन्याय, भेदभाव और शोषण से मुक्त होकर न्याय, सम्मान और अधिकार की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। मकर संक्रांति के अवसर पर जारी अपने विशेष संदेश में डॉ. घनश्याम निषाद ने कहा कि यह पर्व विशेष रूप से किसान, मजदूर, मछुआ समुदाय और मेहनतकश वर्ग से जुड़ा हुआ है। देश की अर्थव्यवस्था को चलाने वाले ये वर्ग आज भी सामाजिक और आर्थिक असमानता का सामना कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि खेतों में मेहनत करने वाला किसान, कारखानों और निर्माण स्थलों पर काम करने वाला मजदूर और नदियों-तालाबों में जान जोखिम में डालकर जीवन यापन करने वाला मछुआ समाज आज भी सम्मान और अधिकार से वंचित है। मकर संक्रांति हमें इन वर्गों के योगदान को याद करने और उनके सम्मान के लिए संकल्प लेने का अवसर देती है। अभय समाज पार्टी के उपराष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि मकर संक्रांति सामाजिक समानता और भाईचारे का पर्व है। तिल-गुड़ की परंपरा यह संदेश देती है कि समाज में कटुता नहीं, बल्कि आपसी प्रेम और सौहार्द होना चाहिए। यह पर्व जाति, धर्म और वर्ग से ऊपर उठकर समाज को एकता के सूत्र में बांधता है।

डॉ. घनश्याम निषाद ने कहा कि आज देश को ऐसी राजनीति की आवश्यकता है, जो समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास और न्याय पहुंचाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभय समाज पार्टी की विचारधारा शोषित, वंचित और पिछड़े समाज के हक और अधिकार की लड़ाई पर आधारित है।

अपने संदेश में उन्होंने युवाओं को विशेष रूप से संबोधित करते हुए कहा कि युवा देश का भविष्य हैं और परिवर्तन की सबसे बड़ी शक्ति भी। आज का युवा केवल वोट बैंक नहीं है, बल्कि नीति निर्माण और सामाजिक बदलाव में उसकी निर्णायक भूमिका होनी चाहिए। डॉ. घनश्याम निषाद ने युवाओं से अपील की कि वे जाति, धर्म और भ्रमित करने वाली राजनीति से ऊपर उठकर शिक्षा, रोजगार, समान अवसर और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर एकजुट हों। उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति नए संकल्प लेने का पर्व है और यह समय है जब युवा अपने भविष्य के लिए सही दिशा चुनें।

 

महिलाओं की भूमिका पर जोर देते हुए डॉ. घनश्याम निषाद ने कहा कि किसी भी समाज का वास्तविक विकास तब तक संभव नहीं है, जब तक महिलाओं को बराबरी का दर्जा और निर्णयकारी भूमिका न मिले। उन्होंने कहा कि महिलाएं केवल परिवार की धुरी नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण की मजबूत आधारशिला हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अभय समाज पार्टी महिलाओं को केवल प्रतीकात्मक सम्मान नहीं, बल्कि शिक्षा, रोजगार और नेतृत्व में वास्तविक भागीदारी देने के लिए प्रतिबद्ध है। मकर संक्रांति की शुभकामनाओं के साथ उन्होंने देश में सामाजिक न्याय, समानता और एकता के लिए निरंतर संघर्ष का संकल्प दोहराया।

मकर संक्रांति: सामाजिक समानता और न्याय का पर्व

मकर संक्रांति केवल एक धार्मिक या पारंपरिक त्योहार नहीं है, बल्कि यह सामाजिक समानता, न्याय और समरसता का प्रतीक पर्व है। यह वह अवसर है जब सूर्य उत्तरायण होकर अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ता है, जो समाज के संदर्भ में अन्याय, भेदभाव और असमानता के विरुद्ध जागरूकता का संदेश देता है। यह पर्व हमें यह याद दिलाता है कि समाज का वास्तविक विकास तभी संभव है, जब हर वर्ग को समान अवसर, सम्मान और अधिकार मिलें।

मकर संक्रांति जाति, धर्म और वर्ग की सीमाओं से ऊपर उठकर सभी को एकजुट करने वाला पर्व है। तिल-गुड़ की परंपरा समाज में मिठास, आपसी सौहार्द और समानता का प्रतीक मानी जाती है। यही कारण है कि इसे सामाजिक न्याय और भाईचारे का पर्व कहा जाता है, जो वंचित और शोषित समाज को नई उम्मीद और नई दिशा देता है।

किसान, मजदूर और मछुआ समाज के सम्मान पर जोर

किसान, मजदूर और मछुआ समाज किसी भी देश की आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था की रीढ़ होते हैं। अन्न पैदा करने वाला किसान, उद्योगों और निर्माण कार्यों को गति देने वाला मजदूर तथा जल संसाधनों से जीवन यापन करने वाला मछुआ समाज—ये सभी वर्ग देश की प्रगति में अहम भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद, ये वर्ग आज भी बुनियादी सुविधाओं, सामाजिक सुरक्षा और सम्मान से वंचित हैं।

इन वर्गों को केवल त्योहारों या चुनावों के समय याद करना पर्याप्त नहीं है। उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और नीति-निर्माण में भागीदारी देकर वास्तविक सम्मान देना आवश्यक है। जब तक किसान, मजदूर और मछुआ समाज को निर्णय प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जाएगा, तब तक सामाजिक न्याय अधूरा ही रहेगा।

युवाओं को राजनीति और समाज में सक्रिय भूमिका का आह्वान

युवा किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत होते हैं। आज देश की बड़ी आबादी युवाओं की है, लेकिन इसके बावजूद राजनीति और सामाजिक निर्णयों में उनकी भागीदारी सीमित बनी हुई है। अधिकतर युवा केवल मतदाता बनकर रह जाते हैं, जबकि उनके पास बदलाव की अपार क्षमता होती है।

युवाओं को चाहिए कि वे केवल दर्शक न बनें, बल्कि सवाल पूछें, व्यवस्था को समझें और सकारात्मक बदलाव के लिए आगे आएं। शिक्षा, रोजगार, तकनीक और सामाजिक समानता जैसे मुद्दों पर युवाओं की सक्रिय भूमिका ही एक सशक्त और ईमानदार नेतृत्व को जन्म दे सकती है। मकर संक्रांति नए संकल्प का पर्व है और यह युवाओं को अपने भविष्य की दिशा तय करने का अवसर देता है।

महिलाओं की निर्णायक भागीदारी को बताया जरूरी

किसी भी समाज का समग्र विकास तब तक संभव नहीं है, जब तक महिलाओं को बराबरी का दर्जा और निर्णय लेने की शक्ति न मिले। महिलाएं केवल परिवार की जिम्मेदारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे समाज, अर्थव्यवस्था और राजनीति की आधारशिला हैं। इसके बावजूद, आज भी नीति-निर्माण और नेतृत्व में उनकी भागीदारी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाई है।

महिलाओं को केवल प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व देने के बजाय, वास्तविक अधिकार और निर्णायक भूमिका देना जरूरी है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर महिलाओं की भागीदारी नीतियों को अधिक संवेदनशील और प्रभावी बनाती है। सामाजिक न्याय तभी संभव है, जब महिलाएं बराबरी से नेतृत्व और निर्णय प्रक्रिया में शामिल हों।

अभय समाज पार्टी: शोषित-वंचित समाज की आवाज

अभय समाज पार्टी की राजनीति शोषित, वंचित और उपेक्षित वर्गों की आवाज बनने पर केंद्रित है। पार्टी का उद्देश्य केवल सत्ता प्राप्त करना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था का निर्माण करना है, जहां समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय, सम्मान और अवसर पहुंचे। किसान, मजदूर, मछुआ, दलित, पिछड़ा और अल्पसंख्यक समाज पार्टी की प्राथमिकता के केंद्र में हैं।

पार्टी का मानना है कि वास्तविक बदलाव तभी संभव है, जब राजनीति जमीन से जुड़ी हो और आम जनता की समस्याओं को समझे। मकर संक्रांति जैसे पर्व इस संकल्प को दोहराने का अवसर देते हैं कि शोषण और असमानता के विरुद्ध संघर्ष जारी रहेगा और एक समान, न्यायपूर्ण और समरस समाज का निर्माण किया जाएगा।

रिपोर्ट : कोटो न्यूज़ नेटवर्क (KNN) |

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