गोरखपुर जिलाधिकारी कार्यालय में ज्ञापन सौंपते निषाद पार्टी के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता..
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश |गोरखपुर के बांसगांव क्षेत्र में निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय कुमार निषाद के विरुद्ध कथित रूप से दिए गए आपत्तिजनक वक्तव्यों, जान से मारने की धमकी और जातिसूचक टिप्पणियों को लेकर निषाद पार्टी के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी कार्यालय, गोरखपुर पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। पार्टी की ओर से जिलाधिकारी के माध्यम से प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराने की मांग की गई। साथ ही, जांच में आरोपों की पुष्टि होने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई करने तथा डॉ. संजय कुमार निषाद की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा किए जाने की मांग रखी गई।
पार्टी की ओर से कहा गया कि राजनीतिक मतभेद लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा हैं और किसी भी राजनीतिक व्यक्ति के विचारों से असहमति व्यक्त करने का अधिकार सभी को है। हालांकि, यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ हिंसा, जान से मारने की धमकी अथवा जातिसूचक अपमान से संबंधित वक्तव्य दिए गए हैं तो उनकी गंभीरता से जांच आवश्यक है। इसी को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से पूरे प्रकरण में तथ्य सामने लाने और कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर सौंपा ज्ञापन
निषाद पार्टी के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता जिलाधिकारी कार्यालय, गोरखपुर पहुंचे और अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन प्रशासन को सौंपा। ज्ञापन में बांसगांव में सामने आए कथित वक्तव्यों और उनसे संबंधित सामग्री की जांच कराने की मांग की गई। पार्टी ने प्रशासन से कहा कि मामले से जुड़े वीडियो, ऑडियो, भाषण और सोशल मीडिया पोस्ट को जांच के दायरे में लिया जाए, ताकि वास्तविक तथ्य सामने आ सकें। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि डिजिटल माध्यमों पर प्रसारित किसी सामग्री की सत्यता और संदर्भ की जांच आवश्यक है। कई बार सोशल मीडिया पर वीडियो या बयान का एक हिस्सा प्रसारित होने से अलग अर्थ निकल सकता है। ऐसे में मूल वीडियो, ऑडियो और उपलब्ध अन्य साक्ष्यों की जांच कर वास्तविक स्थिति निर्धारित की जानी चाहिए। ज्ञापन सौंपने के दौरान अजय निषाद, सूरज निषाद सहित निषाद पार्टी के अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की मांग की।
कथित धमकी और आपत्तिजनक भाषा की जांच की मांग
निषाद पार्टी ने अपने ज्ञापन में कथित तौर पर सामने आए ‘गर्दन काटने’ और ‘हाथ काटने’ जैसे वक्तव्यों को गंभीर विषय बताया। पार्टी का कहना है कि यदि जांच में इस तरह के वक्तव्य दिए जाने की पुष्टि होती है और वे कानून के तहत अपराध की श्रेणी में आते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। पार्टी ने यह भी कहा कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ आपत्तिजनक या हिंसात्मक भाषा का इस्तेमाल सामाजिक माहौल को प्रभावित कर सकता है। इसलिए प्रशासन को शिकायत से संबंधित सभी पहलुओं की जांच करनी चाहिए। पार्टी कार्यकर्ताओं ने कहा कि उनकी मांग किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ पूर्वाग्रहपूर्ण कार्रवाई की नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच के बाद कानून के अनुसार कार्रवाई की है। ज्ञापन में प्रशासन से यह भी आग्रह किया गया कि जांच के दौरान किसी प्रकार का राजनीतिक या सामाजिक दबाव न हो और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष निष्कर्ष निकाला जाए।

वीडियो और सोशल मीडिया सामग्री को साक्ष्य के रूप में जांचने की मांग
मामले में वीडियो और ऑडियो सामग्री की जांच को लेकर भी पार्टी ने प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया। पार्टी का कहना है कि यदि कथित वक्तव्य किसी सार्वजनिक कार्यक्रम, भाषण अथवा अन्य माध्यम से दिए गए हैं तो उनसे जुड़े मूल वीडियो और ऑडियो को जांच में शामिल किया जाना चाहिए। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर वायरल या प्रसारित सामग्री के स्रोत, मूल रिकॉर्डिंग और संदर्भ की भी जांच किए जाने की मांग की गई। पार्टी ने कहा कि किसी भी सामग्री के आधार पर कार्रवाई करने से पहले उसकी प्रामाणिकता की पुष्टि जरूरी है। निषाद पार्टी ने प्रशासन से उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का आग्रह किया, ताकि बाद में जांच की प्रक्रिया में किसी प्रकार की परेशानी न हो। पार्टी के अनुसार, निष्पक्ष जांच के लिए मूल सामग्री का सुरक्षित रहना महत्वपूर्ण है।

डॉ. संजय कुमार निषाद की सुरक्षा की समीक्षा की मांग
ज्ञापन में निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय कुमार निषाद की सुरक्षा को लेकर भी प्रशासन से आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया गया। पार्टी ने कहा कि यदि किसी सार्वजनिक व्यक्ति के खिलाफ जान से मारने की कथित धमकी सामने आती है तो प्रशासन को खतरे का आकलन कर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए। पार्टी पदाधिकारियों ने कहा कि उनकी प्राथमिकता मामले का शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक समाधान है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से भी अपील की कि वे किसी प्रकार की अफवाह, उत्तेजक बयानबाजी अथवा कानून-विरोधी गतिविधि का हिस्सा न बनें। पार्टी की ओर से कहा गया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शिकायत और विरोध दर्ज कराने के लिए संवैधानिक माध्यम उपलब्ध हैं और उन्हीं माध्यमों के जरिए प्रशासन के समक्ष अपनी बात रखी जाएगी।
प्रशासन से चार सूत्रीय मांग
निषाद पार्टी की ओर से सौंपे गए ज्ञापन में प्रशासन के समक्ष मुख्य रूप से चार मांगें रखी गईं।
- बांसगांव से संबंधित कथित घटना, भाषण, वीडियो, ऑडियो और सोशल मीडिया सामग्री की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराने की है।
- जांच में जान से मारने की धमकी, जातिसूचक अपमान अथवा अन्य किसी अपराध की पुष्टि होने पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ लागू कानूनी प्रावधानों के तहत मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई करने की है।
- कथित तौर पर धमकी देने वाले व्यक्तियों की पहचान कर आवश्यक कानूनी एवं निवारक कदम उठाने की है।
- डॉ. संजय कुमार निषाद की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा कर आवश्यकता के अनुसार सुरक्षा सुनिश्चित करने की है।
अजय निषाद और सूरज निषाद समेत कार्यकर्ताओं ने रखी बात
ज्ञापन सौंपने के दौरान अजय निषाद और सूरज निषाद समेत मौजूद कार्यकर्ताओं ने मामले को लेकर अपनी चिंता प्रशासन के समक्ष रखी। कार्यकर्ताओं ने कहा कि राजनीतिक असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन असहमति व्यक्त करने के दौरान कानून और सामाजिक मर्यादा का पालन होना चाहिए। कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से कहा कि यदि शिकायत में लगाए गए आरोप तथ्यात्मक रूप से सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, यदि किसी वीडियो या बयान को गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है तो जांच के जरिए वास्तविक तथ्य सामने लाए जाने चाहिए। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने यह भी कहा कि वे किसी प्रकार की अशांति या टकराव के पक्ष में नहीं हैं। उनका जोर जांच और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से समाधान पर है।
सामाजिक सद्भाव और कानून-व्यवस्था
बांसगांव से जुड़े इस प्रकरण में राजनीतिक बयानबाजी के साथ सामाजिक सद्भाव का मुद्दा भी जुड़ा हुआ है। ऐसे मामलों में प्रशासन के सामने एक ओर शिकायत से संबंधित तथ्यों की जांच की जिम्मेदारी होती है, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र में शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी महत्वपूर्ण होता है। निषाद पार्टी ने अपने ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन से इसी दिशा में हस्तक्षेप की मांग की है। पार्टी का कहना है कि किसी भी शिकायत पर कार्रवाई तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर होनी चाहिए। यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो कानून के अनुसार कार्रवाई हो और यदि सामग्री भ्रामक या संदर्भ से अलग पाई जाती है तो वास्तविक तथ्य भी सार्वजनिक किए जाएं। पार्टी ने कार्यकर्ताओं और समर्थकों से संयम बरतने की अपील करते हुए कहा कि न्याय की मांग शांतिपूर्ण और संवैधानिक माध्यमों से जारी रखी जाएगी।
अब प्रशासनिक जांच पर टिकी निगाह
जिलाधिकारी कार्यालय, गोरखपुर में ज्ञापन सौंपे जाने के बाद अब मामले में प्रशासनिक और पुलिस स्तर पर होने वाली जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि उपलब्ध वीडियो, ऑडियो, प्रत्यक्ष तथ्यों और अन्य साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही हो सकेगी फिलहाल निषाद पार्टी ने प्रशासन के समक्ष अपनी मांगें रख दी हैं और कथित धमकी, आपत्तिजनक टिप्पणी एवं जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल की निष्पक्ष जांच की मांग की है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि वह अपनी मांगों को लेकर संवैधानिक एवं शांतिपूर्ण रास्ते पर आगे बढ़ेगी।
Report : Koto News Network