गोरखपुर के पिपराईच विधानसभा क्षेत्र में स्थित CHC पिपराईच की स्वास्थ्य व्यवस्था सवालों के घेरे में है। जनता के टैक्स से खरीदी गई दो से अधिक एम्बुलेंस महीनों से निष्क्रिय पड़ी हैं। आपात मरीजों को निजी वाहनों से अस्पताल भेजना पड़ रहा है, जबकि मरम्मत और संचालन के नाम पर बजट खर्च होने के दावे किए जा रहे हैं। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की चुप्पी से जनता में नाराज़गी बढ़ती जा रही है।
भारत, 10 फरवरी 2026 | विधानसभा पिपराईच, जनपद गोरखपुर, उत्तर प्रदेश—जहाँ एक ओर आम जनता बढ़ते टैक्स, महंगाई और स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही है, वहीं दूसरी ओर जनता के टैक्स के पैसे से खरीदी गई स्वास्थ्य सुविधाएं विभागीय लापरवाही की भेंट चढ़ती नज़र आ रही हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पिपराईच ब्लॉक में खड़ी दो से अधिक एम्बुलेंस इसका जीता-जागता उदाहरण हैं, जो महीनों से खड़ी-खड़ी जर्जर हो रही हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद ज़मीनी हकीकत यह है कि एम्बुलेंस जैसी अत्यंत आवश्यक सेवा आम जनता के लिए उपलब्ध नहीं हो पा रही। सवाल यह है कि जब आपातकालीन सेवाओं के लिए खरीदी गई एम्बुलेंस उपयोग में ही नहीं लाई जा रहीं, तो फिर इन पर खर्च किए गए सरकारी धन की जवाबदेही कौन तय करेगा?

CHC पिपराईच ब्लॉक, विधानसभा पिपराईच के अंतर्गत आता है, जहाँ आए दिन गंभीर मरीजों, गर्भवती महिलाओं, दुर्घटना पीड़ितों और बुज़ुर्गों को समय पर अस्पताल पहुँचाने के लिए एम्बुलेंस की ज़रूरत पड़ती है। लेकिन विडंबना यह है कि इसी CHC परिसर में दो से अधिक एम्बुलेंस लंबे समय से निष्क्रिय अवस्था में खड़ी हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार मरीजों को निजी वाहनों या महंगे प्राइवेट एम्बुलेंस से ले जाना पड़ता है, जिससे गरीब परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ये एम्बुलेंस कभी खराब होने का बहाना बनाकर, तो कभी ड्राइवर या स्टाफ की कमी बताकर खड़ी कर दी जाती हैं। समय-समय पर इनकी मरम्मत और संचालन के लिए बजट भी पास होता है, लेकिन उसका सही उपयोग नहीं हो पा रहा। इससे यह सवाल उठता है कि क्या यह केवल लापरवाही है या फिर सुनियोजित उदासीनता?
यदि पिपराईच जैसे क्षेत्र में यह हाल है, तो पूरे प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की कल्पना सहज ही की जा सकती है।

और भी चौंकाने वाली बात यह है कि CHC पिपराईच ब्लॉक वही स्थान है जहाँ सांसद, जिला पंचायत सदस्य, ब्लॉक प्रमुख, ADO और BDO जैसे जिम्मेदार जनप्रतिनिधि व अधिकारी नियमित रूप से आते-जाते हैं। इसके बावजूद एम्बुलेंसों की दुर्दशा पर किसी का ध्यान नहीं जाना, या जानबूझकर अनदेखी करना, जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करता है।
स्थानीय लोगों में यह चर्चा आम है कि जनप्रतिनिधि केवल चुनाव के समय जनता के बीच दिखाई देते हैं, उसके बाद स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं जैसे मुद्दों पर गहरी नींद में सो जाते हैं।
आम जनमानस का कहना है कि वे पहले ही टैक्स और स्वास्थ्य परेशानियों से त्रस्त हैं। सरकारी अस्पतालों से उम्मीद रहती है कि कम से कम आपात स्थिति में उन्हें त्वरित और निःशुल्क सुविधा मिले, लेकिन जब एम्बुलेंस जैसी बुनियादी सेवा भी कागज़ों और फाइलों में सिमट कर रह जाए, तो जनता का भरोसा सिस्टम से उठने लगता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि एम्बुलेंस का लंबे समय तक खड़ा रहना न केवल सरकारी संपत्ति की बर्बादी है, बल्कि यह सीधे-सीधे आम जनता के जीवन से खिलवाड़ भी है।

CHC पिपराईच : ज़मीनी हकीकत
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पिपराईच ब्लॉक की मौजूदा स्थिति स्वास्थ्य विभाग के दावों और ज़मीनी सच्चाई के बीच गहरे अंतर को उजागर करती है। सरकारी रिकॉर्ड में जहाँ स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ और सक्रिय दिखाया जाता है, वहीं हकीकत इससे बिल्कुल उलट नज़र आती है।
CHC पिपराईच परिसर में दो से अधिक एम्बुलेंस लंबे समय से निष्क्रिय अवस्था में खड़ी हैं। ये एम्बुलेंस न तो आपातकालीन सेवाओं में उपयोग की जा रही हैं और न ही इन्हें नियमित रूप से चालू रखने की कोई ठोस व्यवस्था दिखाई दे रही है। समय बीतने के साथ इन वाहनों की हालत लगातार खराब होती जा रही है, जिससे यह आशंका गहराती जा रही है कि यदि शीघ्र कदम नहीं उठाए गए, तो ये एम्बुलेंस पूरी तरह अनुपयोगी हो जाएंगी।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि आपात स्थिति में मरीजों को निजी साधनों से अस्पताल भेजने की मजबूरी आम बात हो चुकी है। गंभीर रोगियों, गर्भवती महिलाओं और दुर्घटना पीड़ितों को समय पर एम्बुलेंस न मिलने के कारण कई बार मोटरसाइकिल, ऑटो या निजी चार पहिया वाहनों का सहारा लेना पड़ता है। इससे न केवल मरीज की जान को खतरा बढ़ जाता है, बल्कि गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ता है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, एम्बुलेंस की मरम्मत, रख-रखाव और संचालन के नाम पर हर वर्ष बजट खर्च किए जाने का दावा किया जाता है, लेकिन इसके बावजूद एम्बुलेंसों का सड़क पर न उतर पाना कई सवाल खड़े करता है। जनता यह जानना चाहती है कि जब बजट जारी होता है, तो फिर सुविधाएं ज़मीनी स्तर पर क्यों नहीं दिखाई देतीं? क्या यह लापरवाही है या फिर बजट के उपयोग में पारदर्शिता की कमी?
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इस पूरी स्थिति पर जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों की चुप्पी बनी हुई है। सांसद, जिला पंचायत सदस्य, ब्लॉक प्रमुख और प्रशासनिक अधिकारी क्षेत्र का नियमित दौरा करने के बावजूद इस गंभीर समस्या पर ठोस कार्रवाई करते नज़र नहीं आते। इससे आम जनता में यह संदेश जाता है कि जनहित से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता नहीं दी जा रही है।
इन तमाम परिस्थितियों के चलते जनता में गहरा रोष और असंतोष व्याप्त है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब वे ईमानदारी से टैक्स अदा करते हैं, तो बदले में उन्हें बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं क्यों नहीं मिल पा रहीं। CHC पिपराईच की यह ज़मीनी हकीकत न केवल स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि पूरे सिस्टम की जवाबदेही पर भी गंभीर चिंतन की मांग करती है।
प्रश्न 1: CHC पिपराईच में कुल कितनी एम्बुलेंस निष्क्रिय बताई जा रही हैं?
उत्तर:
स्थानीय जानकारी और ज़मीनी निरीक्षण के अनुसार CHC पिपराईच परिसर में दो से अधिक एम्बुलेंस लंबे समय से निष्क्रिय अवस्था में खड़ी हैं, जो आपात सेवाओं में उपयोग नहीं हो पा रही हैं।
प्रश्न 2: एम्बुलेंस निष्क्रिय रहने का मुख्य कारण क्या बताया जा रहा है?
उत्तर:
कभी तकनीकी खराबी, कभी ड्राइवर या स्टाफ की कमी, तो कभी मरम्मत का हवाला देकर एम्बुलेंस को खड़ा रखा गया है। हालांकि, इसके स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं देती।
प्रश्न 3: एम्बुलेंस न मिलने पर मरीजों को क्या परेशानी हो रही है?
उत्तर:
आपात स्थिति में मरीजों को निजी वाहनों, ऑटो, मोटरसाइकिल या महंगी प्राइवेट एम्बुलेंस से अस्पताल ले जाना पड़ता है, जिससे गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर आर्थिक और मानसिक बोझ बढ़ रहा है।
प्रश्न 4: क्या एम्बुलेंस की मरम्मत और संचालन के लिए बजट जारी होता है?
उत्तर:
विभागीय सूत्रों के अनुसार हर वर्ष मरम्मत, रख-रखाव और संचालन के नाम पर बजट खर्च होने का दावा किया जाता है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर उसका प्रभाव दिखाई नहीं देता।
प्रश्न 5: जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की भूमिका पर सवाल क्यों उठ रहे हैं?
उत्तर:
CHC पिपराईच वह स्थान है जहाँ सांसद, जिला पंचायत सदस्य, ब्लॉक प्रमुख, ADO और BDO जैसे जिम्मेदार अधिकारी आते-जाते हैं, इसके बावजूद एम्बुलेंस की बदहाल स्थिति पर कोई ठोस कार्रवाई न होना गंभीर सवाल खड़े करता है।
प्रश्न 6: क्या यह समस्या केवल पिपराईच तक सीमित है?
उत्तर:
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि पिपराईच जैसे क्षेत्र में यह हाल है, तो पूरे जनपद और प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति का अंदाज़ा आसानी से लगाया जा सकता है।
प्रश्न 7: जनता में इस मुद्दे को लेकर क्या प्रतिक्रिया है?
उत्तर:
जनता में गहरा रोष और असंतोष है। लोग सवाल कर रहे हैं कि जब वे ईमानदारी से टैक्स अदा करते हैं, तो उन्हें बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं क्यों नहीं मिल पा रहीं।
प्रश्न 8: विशेषज्ञ इस स्थिति को कैसे देखते हैं?
उत्तर:
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि एम्बुलेंस का लंबे समय तक निष्क्रिय रहना सरकारी संपत्ति की बर्बादी होने के साथ-साथ जनता के जीवन से सीधा खिलवाड़ भी है।
प्रश्न 9: इस मामले में जनता की प्रमुख मांग क्या है?
उत्तर:
जनता की मांग है कि
एम्बुलेंसों को तत्काल चालू किया जाए
जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हो
बजट खर्च की पारदर्शी जांच कराई जाए
प्रश्न 10: क्या यह मामला प्रशासनिक जांच की मांग करता है?
उत्तर:
हां, यह मामला प्रशासनिक और विभागीय जांच की स्पष्ट मांग करता है ताकि यह पता चल सके कि जनता के टैक्स के पैसे का सही उपयोग क्यों नहीं हो पा रहा।
रिपोर्ट : कोटो न्यूज़ नेटवर्क (KNN) |