Site icon Koto News

नवलपरासी-2 से जनमत पार्टी प्रत्याशी जीवन सहनी ने दी मकर संक्रांति की शुभकामनाएं, सामाजिक न्याय का

lhrgjklebjkl

नवलपरासी, 15 जनवरी। नवलपरासी क्षेत्र नंबर 2 से जनमत पार्टी के संसद पद के प्रत्याशी जीवन सहनी ने मकर संक्रांति के पावन अवसर पर क्षेत्रवासियों, समर्थकों और समस्त देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति केवल एक पर्व नहीं, बल्कि यह सामाजिक समरसता, मेहनतकश वर्ग के सम्मान और नए राजनीतिक-सामाजिक बदलाव की दिशा का प्रतीक है। जीवन सहनी ने अपने संदेश में कहा कि जिस प्रकार सूर्य उत्तरायण होकर अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ता है, उसी प्रकार जनमत पार्टी भी शोषण, भेदभाव और अन्याय के अंधकार से जनता को निकालकर अधिकार, समानता और सम्मान के प्रकाश की ओर ले जाने के लिए संकल्पित है।

मकर संक्रांति के अवसर पर जारी अपने विशेष संदेश में जनमत पार्टी के युवा और जनप्रिय नेता जीवन सहनी ने कहा कि यह पर्व विशेष रूप से किसान, श्रमिक, मछुआ समुदाय और वंचित तबकों से जुड़ा हुआ है। नवलपरासी क्षेत्र नंबर 2 में रहने वाले किसान, मजदूर, मछुआरे, दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समाज के लोग इस पर्व को अपनी मेहनत, संघर्ष और उम्मीदों के पर्व के रूप में मनाते हैं।

उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति हमें यह सिखाती है कि प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर चलना ही सच्चा विकास है। आज राजनीति को भी इसी दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत है, जहां सत्ता का उपयोग केवल कुछ लोगों के लिए नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति के लिए हो। जीवन सहनी ने जनमत पार्टी की विचारधारा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पार्टी की राजनीति जमीन से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि जनमत पार्टी सत्ता नहीं, व्यवस्था परिवर्तन की लड़ाई लड़ रही है। मकर संक्रांति जैसे पर्व हमें यह याद दिलाते हैं कि मेहनतकश समाज ही देश की असली ताकत है, लेकिन सबसे ज्यादा उपेक्षित भी वही रहा है।

उन्होंने क्षेत्र की समस्याओं का उल्लेख करते हुए कहा कि नवलपरासी क्षेत्र नंबर 2 में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सिंचाई जैसी बुनियादी समस्याएं लंबे समय से अनदेखी का शिकार रही हैं। यदि जनता का समर्थन मिला तो संसद में इन मुद्दों को मजबूती से उठाया जाएगा। इस अवसर पर जीवन सहनी ने युवाओं को विशेष संदेश देते हुए कहा कि आज का युवा केवल वोट बैंक नहीं, बल्कि बदलाव की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे जाति, धर्म और भ्रमित करने वाली राजनीति से ऊपर उठकर विकास, रोजगार और समान अधिकार के मुद्दों पर एकजुट हों।

उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति नए संकल्प लेने का पर्व है। यह समय है जब युवाओं को तय करना होगा कि वे पुरानी, विफल और भ्रष्ट राजनीति को आगे बढ़ाना चाहते हैं या एक नई, पारदर्शी और जन-केंद्रित राजनीति को चुनेंगे। जीवन सहनी ने महिलाओं की भूमिका पर भी जोर देते हुए कहा कि समाज और राजनीति में महिलाओं की भागीदारी के बिना किसी भी प्रकार का परिवर्तन संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि जनमत पार्टी महिलाओं को केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि निर्णयकारी भूमिका में देखना चाहती है। उन्होंने मकर संक्रांति की शुभकामनाओं के साथ यह भरोसा दिलाया कि यदि जनता ने उन्हें संसद में भेजा तो वे नवलपरासी क्षेत्र नंबर 2 की आवाज बनकर हर मंच पर संघर्ष करेंगे और जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए कोई समझौता नहीं करेंगे।

मकर संक्रांति: समानता और सामाजिक न्याय का पर्व

मकर संक्रांति केवल एक पारंपरिक या धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि यह सामाजिक समानता, भाईचारे और न्याय की भावना को मजबूत करने वाला उत्सव है। यह पर्व सूर्य के उत्तरायण होने का प्रतीक है, जो अंधकार से प्रकाश की ओर जाने का संदेश देता है। सामाजिक संदर्भ में देखा जाए तो यह बदलाव, जागरूकता और अधिकारों की प्राप्ति का संकेत देता है।

समाज के वंचित और मेहनतकश वर्गों के लिए मकर संक्रांति का विशेष महत्व है। यह पर्व जाति, वर्ग और भेदभाव से ऊपर उठकर सभी को एक सूत्र में जोड़ने का कार्य करता है। तिल-गुड़ जैसे प्रतीकात्मक तत्व इस बात को दर्शाते हैं कि समाज में मिठास और समानता बनी रहे। यही कारण है कि इसे सामाजिक न्याय और समरसता का पर्व माना जाता है।

किसान, मजदूर और मछुआ समाज को सम्मान दिलाने का संकल्प

किसान, मजदूर और मछुआ समाज देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं, लेकिन दुर्भाग्यवश इन्हें सबसे अधिक उपेक्षा और संघर्ष का सामना करना पड़ता है। खेतों में पसीना बहाने वाला किसान, निर्माण स्थलों पर दिन-रात मेहनत करने वाला मजदूर और नदी-तालाबों में जीवन जोखिम में डालकर काम करने वाला मछुआ समाज आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है।

इन वर्गों को केवल चुनावी वादों तक सीमित न रखकर, उन्हें वास्तविक सम्मान और अधिकार दिलाने की आवश्यकता है। सम्मान का अर्थ केवल शब्दों से नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और न्यायपूर्ण नीतियों से है। इन वर्गों को निर्णय प्रक्रिया में शामिल करना ही सच्चा सामाजिक न्याय होगा।

युवाओं को राजनीति में सक्रिय भागीदारी का आह्वान

युवा वर्ग किसी भी समाज की सबसे बड़ी शक्ति होता है। आज देश और क्षेत्र की जनसंख्या का बड़ा हिस्सा युवाओं का है, लेकिन राजनीति में उनकी वास्तविक भागीदारी सीमित रह गई है। अधिकतर युवा केवल वोट देने तक ही सीमित रह जाते हैं, जबकि नीति निर्माण और निर्णय प्रक्रिया में उनकी आवाज़ जरूरी है।

युवाओं को चाहिए कि वे केवल दर्शक न बनें, बल्कि सवाल पूछें, मुद्दों को समझें और बदलाव की राजनीति का हिस्सा बनें। बेरोजगारी, शिक्षा, तकनीक और भविष्य से जुड़े सवालों का समाधान तभी संभव है, जब युवा खुद राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाएं। राजनीति में युवाओं की भागीदारी ही नए और ईमानदार नेतृत्व को जन्म दे सकती है।

महिलाओं की निर्णायक भूमिका पर जोर

किसी भी समाज का समग्र विकास तब तक संभव नहीं है, जब तक महिलाओं को बराबरी का दर्जा और निर्णायक भूमिका न मिले। महिलाएं केवल परिवार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे समाज, अर्थव्यवस्था और राजनीति की मजबूत आधारशिला हैं। इसके बावजूद, आज भी निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनकी भागीदारी सीमित है।

महिलाओं को केवल प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व न देकर, वास्तविक अधिकार और नेतृत्व की भूमिका देना जरूरी है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर महिलाओं की भागीदारी नीतियों को अधिक प्रभावी और मानवीय बनाती है। सामाजिक न्याय का सपना तभी पूरा होगा, जब महिलाएं बराबरी से निर्णय प्रक्रिया में शामिल होंगी।

नवलपरासी क्षेत्र नंबर 2 के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता

नवलपरासी क्षेत्र नंबर 2 एक ऐसा क्षेत्र है, जहां अपार संभावनाएं होने के बावजूद विकास की गति अपेक्षाकृत धीमी रही है। यहां के लोग आज भी बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, रोजगार के अवसर और आधारभूत ढांचे की कमी से जूझ रहे हैं। सिंचाई, सड़क, बिजली और रोजगार जैसे मुद्दे लंबे समय से जनता की प्राथमिक मांग रहे हैं।

 

रिपोर्ट : कोटो न्यूज़ नेटवर्क (KNN) |

 

Exit mobile version