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मराइमलाई अडिगल जयंती: मुख्यमंत्री थिरु एस. जोसेफ विजय ने दी श्रद्धांजलि, तमिल भाषा संरक्षण

चेन्नई, तमिलनाडु | तमिल भाषा की शुद्धता, सांस्कृतिक अस्मिता और भाषाई गौरव के सबसे बड़े प्रतीकों में से एक माने जाने वाले तनितमिऴ (शुद्ध तमिल) आंदोलन के जनक एवं महान तमिल विद्वान मराइमलाई अडिगल की जयंती पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थिरु एस. जोसेफ विजय ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि मराइमलाई अडिगल…

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थिरु एस. जोसेफ विजय मराइमलाई अडिगल की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए। इस अवसर पर उन्होंने तनितमिऴ आंदोलन की विरासत, तमिल भाषा के संरक्षण और सांस्कृतिक गौरव को आगे बढ़ाने का संदेश दिया।

चेन्नई, तमिलनाडु | तमिल भाषा की शुद्धता, सांस्कृतिक अस्मिता और भाषाई गौरव के सबसे बड़े प्रतीकों में से एक माने जाने वाले तनितमिऴ (शुद्ध तमिल) आंदोलन के जनक एवं महान तमिल विद्वान मराइमलाई अडिगल की जयंती पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थिरु एस. जोसेफ विजय ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि मराइमलाई अडिगल का संपूर्ण जीवन तमिल भाषा की रक्षा, उसके स्वाभाविक स्वरूप को बनाए रखने और समाज में भाषाई चेतना जगाने के लिए समर्पित रहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी विद्वत्ता, दूरदर्शिता और तमिल के प्रति अटूट समर्पण आज भी करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि मराइमलाई अडिगल केवल एक महान साहित्यकार ही नहीं, बल्कि एक ऐसे विचारक थे जिन्होंने तमिल भाषा को विदेशी शब्दों के अनावश्यक प्रभाव से मुक्त रखने का अभियान चलाया। उन्होंने तमिल, संस्कृत और अंग्रेज़ी जैसी भाषाओं पर समान रूप से गहरी पकड़ होने के बावजूद यह विश्वास कायम रखा कि तमिल की मौलिकता और मधुरता तभी सुरक्षित रह सकती है जब उसका प्रयोग उसकी प्राकृतिक शैली में किया जाए। इसी सोच ने आगे चलकर तनितमिऴ आंदोलन को जन्म दिया, जिसने तमिल साहित्य और भाषा के विकास को नई दिशा प्रदान की। मुख्यमंत्री ने कहा कि मराइमलाई अडिगल ने भाषा को केवल संचार का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा और आत्मसम्मान का आधार माना। उन्होंने अपने लेखन, भाषणों और शोध कार्यों के माध्यम से तमिल समाज में भाषाई गौरव की भावना विकसित की। आज भी उनकी रचनाएं, विचार और भाषाई सिद्धांत तमिल साहित्य, शिक्षा और सांस्कृतिक अध्ययन के क्षेत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

 

मुख्यमंत्री थिरु एस. जोसेफ विजय ने अपने संदेश में कहा कि मराइमलाई अडिगल का जन्म ऐसे समय में हुआ था जब तमिल भाषा विभिन्न भाषाई प्रभावों के कारण अपनी मौलिक पहचान खोने लगी थी। उन्होंने अपने अथक प्रयासों से तमिल भाषा की शुद्धता को पुनः स्थापित करने का अभियान प्रारंभ किया। उन्होंने तमिल लेखन और साहित्य में विदेशी शब्दों के अनावश्यक प्रयोग का विरोध किया तथा शुद्ध तमिल शब्दावली को बढ़ावा देने के लिए अनेक ग्रंथों, शोधपत्रों और साहित्यिक कृतियों की रचना की।मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी दूरदर्शिता के कारण आज तमिल भाषा विश्व की सबसे समृद्ध और प्राचीन भाषाओं में सम्मानपूर्वक अपना स्थान बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि मराइमलाई अडिगल का योगदान केवल साहित्य तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने सामाजिक चेतना, सांस्कृतिक जागरूकता और शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि भाषा किसी समाज की आत्मा होती है और उसकी रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि मराइमलाई अडिगल तमिल, संस्कृत और अंग्रेज़ी तीनों भाषाओं के प्रकांड विद्वान थे। इसके बावजूद उन्होंने यह सिद्ध किया कि किसी अन्य भाषा का ज्ञान प्राप्त करना और अपनी मातृभाषा के सम्मान की रक्षा करना दोनों एक साथ संभव हैं। उन्होंने तमिल भाषा के व्याकरण, साहित्य, दर्शन और इतिहास पर गहन अध्ययन किया तथा अनेक शोधपरक पुस्तकें लिखीं, जो आज भी विद्वानों के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ सामग्री मानी जाती हैं।उन्होंने कहा कि मराइमलाई अडिगल ने यह संदेश दिया कि भाषा का विकास उसकी मौलिकता को बनाए रखते हुए होना चाहिए। उन्होंने विदेशी शब्दों के अनावश्यक प्रयोग की बजाय तमिल के अपने शब्दों और अभिव्यक्तियों को प्राथमिकता देने की वकालत की। यही विचार आगे चलकर तमिल भाषा आंदोलन की आधारशिला बना और लाखों लोगों ने इसे अपनाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में जब वैश्वीकरण और तकनीकी विकास के कारण भाषाओं पर अनेक प्रकार के प्रभाव पड़ रहे हैं, तब मराइमलाई अडिगल के विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं। उनकी सोच हमें यह सिखाती है कि आधुनिकता को अपनाते हुए भी अपनी भाषाई और सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखा जा सकता है।

 

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि तमिलनाडु सरकार तमिल भाषा के संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। राज्य में तमिल साहित्य, प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण, डिजिटल अभिलेखीकरण, तमिल शोध संस्थानों को प्रोत्साहन तथा युवाओं में तमिल भाषा के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल तमिल भाषा को संरक्षित करना नहीं, बल्कि उसे आधुनिक विज्ञान, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, प्रशासन और वैश्विक संवाद की भाषा के रूप में भी सशक्त बनाना है। इसके लिए विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और सांस्कृतिक संगठनों के सहयोग से विभिन्न कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने युवाओं से आह्वान किया कि वे तमिल भाषा, साहित्य और संस्कृति के अध्ययन में अधिक रुचि लें तथा मराइमलाई अडिगल के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं। उन्होंने कहा कि यदि नई पीढ़ी अपनी भाषा और संस्कृति से जुड़ी रहेगी, तो समाज की सांस्कृतिक विरासत आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचेगी।

 

मुख्यमंत्री थिरु एस. जोसेफ विजय ने कहा कि मराइमलाई अडिगल का जीवन हमें यह प्रेरणा देता है कि भाषा केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की पहचान, इतिहास और आत्मगौरव का प्रतीक होती है। उन्होंने कहा कि तमिल समाज उनके भाषाई समर्पण, तमिल के प्रति प्रेम और गहन चिंतन को सदैव स्मरण रखेगा। उन्होंने कहा कि मराइमलाई अडिगल की शिक्षाएं आने वाले समय में भी तमिल समाज को नई दिशा देती रहेंगी और तमिल भाषा के संरक्षण का आंदोलन निरंतर आगे बढ़ता रहेगा। मुख्यमंत्री ने उनके प्रति अपनी “तनितमिऴ श्रद्धांजलि” अर्पित करते हुए कहा कि उनका यश, योगदान और विचार सदैव अमर रहेंगे। मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि तमिलनाडु सरकार भाषा, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण के लिए अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगी तथा महान विद्वानों की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मराइमलाई अडिगल के आदर्शों से प्रेरित होकर तमिल भाषा विश्व स्तर पर और अधिक प्रतिष्ठा प्राप्त करेगी तथा आने वाली पीढ़ियां भी अपनी मातृभाषा पर गर्व करेंगी।

रिपोर्ट : कोटो न्यूज़ नेटवर्क (KNN) |  

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