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नेपाल सरकार का बड़ा फैसला: विदेश जाने वाले श्रमिकों को महंगे कर्ज से राहत, भर्ती प्रक्रिया

काठमांडू में आयोजित IOM के 5वें नेपाल फोरम ऑन माइग्रेशन एंड डेवलपमेंट कॉन्फ्रेंस के दौरान यूथ, लेबर एंड एम्प्लॉयमेंट मंत्री रामजी यादव विदेशी रोजगार प्रणाली में सुधार, डिजिटल भर्ती प्रक्रिया और श्रमिक सुरक्षा संबंधी योजनाओं की जानकारी देते हुए।

काठमांडू, नेपाल | विदेश में रोजगार के लिए जाने वाले नेपाली श्रमिकों को ऊंचे ब्याज पर कर्ज लेने की मजबूरी से राहत दिलाने और उन्हें सुरक्षित, सम्मानजनक तथा पारदर्शी विदेशी रोजगार प्रणाली उपलब्ध कराने की दिशा में नेपाल सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाने की घोषणा की है। सरकार का कहना है कि अब विदेश जाने की प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाया जाएगा, ताकि श्रमिकों का आर्थिक शोषण रोका जा सके और भर्ती प्रक्रिया में व्याप्त अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके। यह घोषणा इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (IOM) द्वारा आयोजित 5वें नेपाल फोरम ऑन माइग्रेशन एंड डेवलपमेंट कॉन्फ्रेंस में की गई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यूथ, लेबर एंड एम्प्लॉयमेंट मिनिस्टर रामजी यादव ने कहा कि सरकार विदेशी रोजगार क्षेत्र में व्यापक सुधार के लिए प्रतिबद्ध है और ऐसी व्यवस्था विकसित की जा रही है, जिसमें किसी भी श्रमिक को अत्यधिक ब्याज पर कर्ज लेने या दलालों के जाल में फंसने की आवश्यकता न पड़े।

सुरक्षित और सम्मानजनक प्रवासन सरकार की प्राथमिकता

मंत्री रामजी यादव ने अपने संबोधन में कहा कि विदेश में रोजगार की तलाश में जाने वाले हजारों नेपाली युवाओं को अब तक कई प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ता रहा है। इनमें भर्ती एजेंसियों द्वारा अत्यधिक शुल्क वसूला जाना, ऊंची ब्याज दरों पर कर्ज लेना, गलत जानकारी देकर ठगी करना तथा रोजगार अनुबंध से जुड़े विवाद प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इन समस्याओं का स्थायी समाधान निकालने के लिए नीतिगत और कानूनी दोनों स्तरों पर सुधार कर रही है। उनका स्पष्ट संदेश था कि विदेशी रोजगार केवल आर्थिक अवसर नहीं बल्कि नागरिकों की गरिमा और अधिकारों से जुड़ा विषय है। इसलिए सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि प्रत्येक श्रमिक सुरक्षित वातावरण में विदेश जाए और उसे उसके अधिकारों का पूरा संरक्षण मिले। मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल श्रमिकों को विदेश भेजना नहीं, बल्कि उन्हें सम्मानजनक रोजगार, उचित वेतन, सामाजिक सुरक्षा और कानूनी संरक्षण उपलब्ध कराना है।

कागजी नीति नहीं, अब होगा प्रभावी क्रियान्वयन

मंत्री यादव ने बताया कि विदेशी रोजगार से संबंधित वर्तमान नीति वर्षों से लागू तो है, लेकिन उसका अपेक्षित प्रभाव जमीन पर दिखाई नहीं दिया। इसी कारण सरकार ने इस नीति की व्यापक समीक्षा शुरू की है ताकि इसे वर्तमान परिस्थितियों और श्रमिकों की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जा सके।उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था में केवल नीतियां बनाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। संबंधित सरकारी विभागों, निजी भर्ती एजेंसियों, स्थानीय सरकारों और अंतरराष्ट्रीय साझेदार संस्थाओं के साथ मिलकर एक समन्वित प्रणाली विकसित की जाएगी।सरकार का मानना है कि यदि नीति का सही तरीके से पालन कराया जाए तो विदेशी रोजगार से जुड़े विवादों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। इससे श्रमिकों का भरोसा भी बढ़ेगा और नेपाल की अंतरराष्ट्रीय छवि भी मजबूत होगी।

 

भर्ती प्रक्रिया होगी पूरी तरह डिजिटल

सम्मेलन में सबसे महत्वपूर्ण घोषणा विदेशी रोजगार भर्ती प्रक्रिया के पूर्ण डिजिटलीकरण को लेकर की गई। मंत्री यादव ने कहा कि तकनीक के माध्यम से पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाएगा ताकि किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार, दलाली और दस्तावेजों में हेराफेरी की संभावना समाप्त हो सके। नई डिजिटल प्रणाली के अंतर्गत आवेदन, दस्तावेज सत्यापन, स्वीकृति, भुगतान, अनुबंध पंजीकरण और शिकायत निवारण जैसी अधिकांश सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाएंगी। सरकार का मानना है कि डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद श्रमिकों को विभिन्न कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। इससे समय और धन दोनों की बचत होगी तथा सरकारी सेवाओं में जवाबदेही भी बढ़ेगी। इसी के साथ सरकार फॉरेन एम्प्लॉयमेंट एक्ट में संशोधन की तैयारी कर रही है। नए संशोधन के तहत नियमों का उल्लंघन करने वाली भर्ती एजेंसियों और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी श्रमिक के साथ धोखाधड़ी करने वालों को कानून के दायरे में लाकर सख्त सजा दी जाए।

ऑनलाइन शिकायत प्रणाली और अंतरराष्ट्रीय मॉडल अपनाने की तैयारी

विदेशी रोजगार से जुड़े श्रमिकों की शिकायतों का शीघ्र समाधान सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने ujuri.dofe.gov.np नामक ऑनलाइन शिकायत प्लेटफॉर्म शुरू किया है। इस पोर्टल के माध्यम से विदेश जाने वाले या विदेश में कार्यरत नेपाली श्रमिक अपनी शिकायत सीधे संबंधित विभाग तक पहुंचा सकेंगे। सरकार का कहना है कि इस ऑनलाइन प्रणाली से शिकायतों के निस्तारण में पारदर्शिता आएगी तथा प्रत्येक शिकायत की निगरानी भी संभव होगी। इससे श्रमिकों को न्याय पाने के लिए लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। मंत्री यादव ने यह भी बताया कि नेपाल सरकार विदेशी रोजगार प्रबंधन के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफल माने जाने वाले देशों के अनुभवों से सीख ले रही है। विशेष रूप से फिलीपींस की “एथिकल रिक्रूटमेंट” प्रणाली का अध्ययन किया जा रहा है। फिलीपींस ने अपने नागरिकों के सुरक्षित प्रवासन, पारदर्शी भर्ती और श्रमिक अधिकारों की रक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। नेपाल सरकार का लक्ष्य भी इसी प्रकार की ऐसी व्यवस्था विकसित करना है जिसमें भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और श्रमिक हितैषी हो।

विदेशी रोजगार में सुधार की व्यापक आवश्यकता

विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल की अर्थव्यवस्था में विदेशी रोजगार से प्राप्त रेमिटेंस की महत्वपूर्ण भूमिका है। लाखों नेपाली नागरिक खाड़ी देशों, मलेशिया, दक्षिण कोरिया, जापान तथा अन्य देशों में कार्यरत हैं और उनकी कमाई से देश की अर्थव्यवस्था को बड़ा सहयोग मिलता है। हालांकि, लंबे समय से यह भी देखा गया है कि विदेश जाने वाले अनेक श्रमिक भर्ती प्रक्रिया के दौरान आर्थिक शोषण, फर्जी एजेंसियों, अनुचित शुल्क और अनुबंध उल्लंघन जैसी समस्याओं का सामना करते रहे हैं। कई परिवार केवल विदेश भेजने की लागत जुटाने के लिए ऊंची ब्याज दरों पर कर्ज लेने को मजबूर हो जाते हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और अधिक कमजोर हो जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि सरकार की नई योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू होती हैं तो इससे न केवल श्रमिकों की सुरक्षा बढ़ेगी बल्कि विदेशी रोजगार प्रणाली पर जनता का विश्वास भी मजबूत होगा।

IOM और अन्य साझेदारों की भूमिका

5वें नेपाल फोरम ऑन माइग्रेशन एंड डेवलपमेंट कॉन्फ्रेंस का आयोजन इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (IOM) द्वारा किया गया। सम्मेलन में सरकारी अधिकारियों,विकास साझेदारों, श्रम विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं, निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों तथा नागरिक समाज के संगठनों ने भाग लिया।

सम्मेलन में सुरक्षित प्रवासन, श्रमिक अधिकार, रोजगार नीतियां, कौशल विकास, सामाजिक सुरक्षा, महिला प्रवासी श्रमिकों की चुनौतियां तथा प्रवासन प्रबंधन में तकनीक के उपयोग जैसे अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।

प्रतिभागियों ने इस बात पर जोर दिया कि प्रवासी श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं बल्कि निजी क्षेत्र, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और नागरिक समाज की भी साझा जिम्मेदारी है।

विशेषज्ञों की राय

श्रम मामलों के जानकारों का कहना है कि नेपाल सरकार द्वारा घोषित सुधार यदि निर्धारित समयसीमा के भीतर लागू किए जाते हैं तो इससे विदेशी रोजगार प्रणाली में ऐतिहासिक बदलाव आ सकता है।

उनका मानना है कि डिजिटल भर्ती प्रणाली, ऑनलाइन शिकायत निवारण, सख्त कानूनी कार्रवाई और एथिकल रिक्रूटमेंट मॉडल अपनाने जैसे कदम लंबे समय से चली आ रही कई समस्याओं का समाधान कर सकते हैं।

विशेषज्ञों ने यह भी सुझाव दिया कि सरकार को वित्तीय संस्थानों के साथ मिलकर कम ब्याज दर पर विशेष विदेशी रोजगार ऋण योजना भी शुरू करनी चाहिए, ताकि श्रमिकों को निजी साहूकारों या महंगे कर्ज सहारा न लेना पड़े।

रिपोर्ट : कोटो न्यूज़ नेटवर्क (KNN) |  

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