नेपालगंज। नेपालगंज सब-मेट्रोपॉलिटन सिटी में आपदा प्रबंधन को मजबूत करने, स्थानीय निकायों के बीच समन्वय बढ़ाने और उपलब्ध संसाधनों को साझा करने के उद्देश्य से आयोजित इंटर-म्युनिसिपल कोऑर्डिनेशन एंड रिसोर्स शेयरिंग वर्कशॉप संपन्न हो गई। कार्यशाला में पश्चिमी नेपाल के स्थानीय स्तर पर आपदा जोखिम न्यूनीकरण, आपातकालीन सेवा, संसाधन प्रबंधन और आपसी सहयोग से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नेपालगंज सब-मेट्रोपॉलिटन सिटी के मेयर प्रशांत बिष्ट ने आपातकालीन सेवाओं को प्रभावी बनाने के लिए स्थानीय स्तर पर बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आपदा किसी एक स्थानीय तह की सीमा तक सीमित नहीं रहती, इसलिए आपदा के समय विभिन्न स्थानीय सरकारों के बीच तत्काल सूचना, जनशक्ति, उपकरण और अन्य आवश्यक संसाधनों का आदान-प्रदान होना जरूरी है। मेयर बिष्ट ने नेपालगंज सब-मेट्रोपॉलिटन सिटी को पश्चिमी क्षेत्र में आपदा प्रबंधन के एक महत्वपूर्ण हब के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनके अनुसार, नेपालगंज की भौगोलिक स्थिति, उपलब्ध संस्थागत संरचना और क्षेत्रीय संपर्क को देखते हुए इसे आसपास के स्थानीय निकायों के साथ आपदा प्रबंधन समन्वय के केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है। कार्यशाला में स्थानीय सरकारों के प्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, आपदा एवं पर्यावरण से जुड़े अधिकारियों तथा विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। प्रतिभागियों ने अपने-अपने स्थानीय स्तर पर आपदा जोखिम कम करने और आपदा प्रबंधन के लिए किए जा रहे प्रयासों, उपलब्ध संसाधनों तथा सामने आने वाली चुनौतियों को साझा किया।
रविवार को आयोजित इस कार्यशाला में स्थानीय स्तर पर आपदा प्रबंधन के लिए समन्वय और साझेदारी को सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता के रूप में सामने रखा गया। कार्यक्रम में बोलते हुए NeHAR के संयुक्त सचिव प्रदीप कोइराला ने कहा कि स्थानीय सरकारों के पास अभी भी आपदा प्रबंधन के लिए सीमित संसाधन हैं। ऐसे में एक स्थानीय निकाय के पास मौजूद संसाधन दूसरे प्रभावित स्थानीय निकाय के लिए भी उपयोगी साबित हो सकते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सभी प्रकार की आपदाएं प्रशासनिक सीमाओं के भीतर सीमित नहीं रहतीं। बाढ़, भूकंप, आगजनी, महामारी, भूस्खलन, सड़क दुर्घटना या अन्य बड़े संकट की स्थिति में एक से अधिक स्थानीय तह प्रभावित हो सकते हैं। ऐसी परिस्थितियों में यदि स्थानीय सरकारों के बीच पहले से समन्वय और संसाधन साझा करने की व्यवस्था हो तो राहत और बचाव कार्यों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। कार्यशाला का उद्देश्य स्थानीय सरकारों के बीच केवल चर्चा तक सीमित रहना नहीं था, बल्कि आपदा के समय व्यावहारिक रूप से एक-दूसरे की सहायता करने की संभावनाओं पर विचार करना भी था। प्रतिभागियों ने आपातकालीन उपकरण, मानव संसाधन, तकनीकी जानकारी, सूचना प्रणाली और अन्य आवश्यक सेवाओं को साझा करने की संभावनाओं पर विचार किया।
कार्यशाला में हिस्सा लेने वाले विभिन्न स्थानीय स्तर के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में आपदा जोखिम न्यूनीकरण और आपदा प्रबंधन के लिए किए जा रहे प्रयासों के बारे में जानकारी दी। प्रतिनिधियों ने स्थानीय स्तर पर मौजूद जोखिमों, संसाधनों और आपदा के समय सामने आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों को साझा किया। प्रतिनिधियों के अनुसार, आपदा प्रबंधन की प्रभावी व्यवस्था के लिए केवल राहत सामग्री और उपकरण पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए प्रशिक्षित जनशक्ति, स्पष्ट जिम्मेदारी, समय पर सूचना, मजबूत संचार व्यवस्था और संबंधित निकायों के बीच नियमित समन्वय भी जरूरी है। यदि आपदा से पहले ही यह तय हो कि किस परिस्थिति में कौन-सा निकाय क्या भूमिका निभाएगा, तो आपातकाल के दौरान निर्णय लेने में देरी को कम किया जा सकता है। कार्यशाला में स्थानीय स्तर पर डिजास्टर रिस्क रिडक्शन को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। आपदा के बाद राहत देने की तुलना में आपदा से पहले जोखिम की पहचान, संवेदनशील क्षेत्रों का आकलन और स्थानीय समुदाय की तैयारी को मजबूत करने पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता बताई गई। प्रतिनिधियों ने कहा कि स्थानीय समुदायों को आपदा जोखिम के बारे में जागरूक करना भी जरूरी है। समुदाय को प्राथमिक प्रतिक्रिया, सुरक्षित स्थान, आपातकालीन संपर्क और उपलब्ध स्थानीय संसाधनों की जानकारी होने से संकट के शुरुआती चरण में होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है।
नेपालगंज सब-मेट्रोपॉलिटन सिटी द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में बर्दिया जिले के सभी स्थानीय स्तरों के प्रतिनिधियों की भागीदारी रही। इसके अलावा बांके जिले की कोहलपुर म्युनिसिपैलिटी और खजुरा रूरल म्युनिसिपैलिटी के प्रमुख प्रशासकीय अधिकृत, डिजास्टर एंड एनवायरनमेंट कमेटी के कोऑर्डिनेटर, डिजास्टर फोकल पर्सन और ZDC फोकल पर्सन भी कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम में बांके के डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन ऑफिस तथा बर्दिया की डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेशन कमेटी के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया। विभिन्न स्थानीय और जिला स्तरीय निकायों की भागीदारी से कार्यशाला को बहु-स्तरीय समन्वय के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना गया।कार्यशाला में चर्चा का एक प्रमुख विषय यह रहा कि आपदा प्रबंधन में स्थानीय सरकारों के साथ जिला प्रशासन और अन्य संबंधित संस्थाओं की भूमिका को कैसे बेहतर तरीके से जोड़ा जाए। आपदा के समय स्थानीय स्तर पर उपलब्ध जानकारी को जिला स्तर की व्यवस्था तक पहुंचाना और जिला स्तर से आवश्यक सहयोग को प्रभावित स्थानीय निकाय तक पहुंचाना प्रभावी आपदा प्रतिक्रिया के लिए महत्वपूर्ण माना गया। प्रतिभागियों ने इस बात पर भी जोर दिया कि आपदा प्रबंधन की योजना केवल कागजों तक सीमित न रहकर नियमित अभ्यास और वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप तैयार की जानी चाहिए। इसके लिए स्थानीय स्तर पर मॉक ड्रिल, प्रशिक्षण, संसाधनों की सूची तैयार करने और आपातकालीन संपर्क व्यवस्था को नियमित रूप से अपडेट करने की आवश्यकता बताई गई।
कार्यशाला में नेपालगंज को पश्चिमी क्षेत्र में आपदा प्रबंधन के संभावित हब के रूप में विकसित करने की चर्चा को विशेष महत्व मिला। नेपालगंज में उपलब्ध स्वास्थ्य, प्रशासनिक, संचार और अन्य आधारभूत सुविधाओं को देखते हुए इसे आसपास के स्थानीय निकायों के लिए आपदा प्रतिक्रिया और समन्वय के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावना पर विचार किया गया। यदि नेपालगंज को क्षेत्रीय आपदा प्रबंधन हब के रूप में विकसित किया जाता है, तो आसपास के स्थानीय निकायों को आपातकालीन परिस्थितियों में तकनीकी सहयोग, प्रशिक्षण, सूचना आदान-प्रदान और संसाधन उपलब्ध कराने की व्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है। हालांकि इसके लिए स्थानीय, जिला और प्रांतीय स्तर के संबंधित निकायों के बीच स्पष्ट जिम्मेदारी और समन्वय व्यवस्था आवश्यक होगी। कार्यशाला में यह भी स्पष्ट किया गया कि भविष्य में आपदाओं की प्रकृति और प्रभाव बदल सकते हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण अत्यधिक वर्षा, बाढ़, सूखा, गर्मी और अन्य मौसम संबंधी जोखिमों की चुनौती बढ़ सकती है। इसलिए स्थानीय सरकारों को पारंपरिक आपदा प्रबंधन के साथ-साथ बदलते जलवायु जोखिमों को भी अपनी योजनाओं में शामिल करना जरूरी है। कार्यक्रम में शामिल प्रतिनिधियों ने आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन में आपसी सहयोग को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की। संसाधनों की सीमित उपलब्धता के बीच स्थानीय निकायों के बीच साझेदारी को आपदा प्रतिक्रिया की क्षमता बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम माना गया।
आपदा प्रबंधन में संसाधन साझेदारी क्यों जरूरी?
नेपाल के विभिन्न स्थानीय निकाय प्राकृतिक और मानवजनित आपदाओं के अलग-अलग जोखिमों का सामना करते हैं। किसी स्थानीय तह के पास फायर फाइटिंग उपकरण हो सकते हैं, जबकि दूसरे के पास प्रशिक्षित मानव संसाधन, एंबुलेंस, संचार उपकरण या अन्य आपातकालीन संसाधन उपलब्ध हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में आपदा के समय संसाधनों का आपसी इस्तेमाल राहत और बचाव कार्य को तेज कर सकता है। इंटर-म्युनिसिपल कोऑर्डिनेशन का उद्देश्य इसी प्रकार की जरूरतों को पहले से समझना और स्थानीय सरकारों के बीच सहयोग की व्यवस्था को मजबूत करना है। यदि स्थानीय निकायों के पास एक-दूसरे के संसाधनों और संपर्क बिंदुओं की जानकारी उपलब्ध हो तो आपदा के समय सहायता मांगने और उपलब्ध कराने की प्रक्रिया अधिक तेज हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, आपदा प्रबंधन में तीन चीजें महत्वपूर्ण हैं—तैयारी, समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया। तैयारी के बिना संसाधनों का सही इस्तेमाल कठिन हो सकता है, समन्वय के बिना एक ही स्थान पर कई संस्थाओं की गतिविधियां असंगठित हो सकती हैं और त्वरित प्रतिक्रिया के बिना आपदा का प्रभाव बढ़ सकता है। इसलिए स्थानीय सरकारों के बीच नियमित बैठक, प्रशिक्षण, मॉक ड्रिल और संसाधन साझेदारी की व्यवस्था को संस्थागत रूप देने की आवश्यकता है।
स्थानीय सरकारों के सामने प्रमुख चुनौतियां
स्थानीय स्तर पर आपदा प्रबंधन को मजबूत करने में कई चुनौतियां सामने आती हैं। सीमित बजट, पर्याप्त तकनीकी जनशक्ति का अभाव, आवश्यक उपकरणों की कमी, दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंच और आपातकालीन संचार व्यवस्था की कमजोरी इनमें प्रमुख हो सकती हैं। इसके अलावा कई स्थानीय निकायों में उपलब्ध संसाधनों की जानकारी व्यवस्थित रूप से साझा नहीं होने के कारण आपदा के समय उपलब्ध साधनों का पूरा उपयोग नहीं हो पाता। यदि प्रत्येक स्थानीय निकाय अपने उपलब्ध मानव संसाधन, उपकरण, वाहन, स्वास्थ्य सुविधाओं और अन्य आपातकालीन संसाधनों की अद्यतन सूची तैयार करे तथा उसे संबंधित स्थानीय निकायों के साथ साझा करे, तो संकट के समय निर्णय लेना आसान हो सकता है। इसी तरह आपदा प्रबंधन से जुड़े फोकल पर्सन की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। उन्हें स्थानीय आपदा योजना, जोखिम वाले क्षेत्रों, आपातकालीन संपर्क और उपलब्ध संसाधनों की जानकारी होनी चाहिए।
नेपालगंज को हब बनाने की संभावनाएं
नेपालगंज पश्चिमी नेपाल का एक महत्वपूर्ण शहरी केंद्र है। क्षेत्रीय स्तर पर इसकी प्रशासनिक और सेवा संबंधी भूमिका को देखते हुए आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में भी इसकी भूमिका को मजबूत किया जा सकता है। नेपालगंज को आपदा प्रबंधन हब के रूप में विकसित करने के लिए आपातकालीन समन्वय केंद्र, प्रशिक्षण व्यवस्था, संसाधन भंडारण, सूचना आदान-प्रदान प्रणाली और आसपास के स्थानीय निकायों के साथ नियमित समन्वय तंत्र को मजबूत किया जा सकता है। ऐसी व्यवस्था विकसित होने पर बांके, बर्दिया और आसपास के क्षेत्रों में किसी बड़ी आपदा की स्थिति में उपलब्ध संसाधनों को प्रभावित क्षेत्र तक तेजी से पहुंचाने में सहायता मिल सकती है। इसके लिए स्थानीय सरकारों के साथ जिला प्रशासन, सुरक्षा निकाय, स्वास्थ्य संस्थान, रेड क्रॉस, गैर-सरकारी संस्थाएं और अन्य संबंधित संस्थाओं के बीच साझेदारी को भी मजबूत करना होगा।
रिपोर्ट : कोटो न्यूज़ नेटवर्क (KNN) |

