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कश्यप समाज का आक्रोश, दोषियों को फांसी व 50 लाख मुआवजे की मांग को लेकर मुख्यमंत्री को सौंपा गया ज्ञापन

कश्यप समाज का आक्रोश, दोषियों को फांसी व 50 लाख मुआवजे की मांग को लेकर मुख्यमंत्री को सौंपा गया ज्ञापन

भारत ,19 जनवरी 2026 |  उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद अंतर्गत सरधना विधानसभा क्षेत्र से सामने आई एक दिल दहला देने वाली घटना ने न केवल कश्यप समाज बल्कि पूरे मानव समाज को झकझोर कर रख दिया है। ग्राम ज्वालापुर निवासी एक नवयुवक सोनू कश्यप की जिंदा जलाकर निर्मम हत्या किए जाने का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इस जघन्य हत्याकांड में एक नाबालिग को जेल भेजे जाने के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या इतना बड़ा अपराध कोई नाबालिग अकेले अंजाम दे सकता है|इस घटना को लेकर प्रदेश भर में आक्रोश व्याप्त है। इसी क्रम में आज दिनांक 19 जनवरी 2026 को एकलव्य गोताखोर सेवा समिति एवं महाऋषि कश्यप सेवा ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में अंगद कुमार कश्यप, संतोष कश्यप, अनुपम बाथम, राम किशन ,गया प्रसाद धुरिया, शमशेर कश्यप, डा राजेश कश्यप, पाल गौड़, शिव शंकर वर्मा, एवम राजेश कश्यप लोगों ने बाराबंकी में एकत्र होकर जिला अधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा और सोनू कश्यप को न्याय दिलाने की पुरजोर मांग की।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सोनू कश्यप की हत्या अत्यंत ही नृशंस तरीके से की गई। आरोप है कि हत्या से पूर्व पीड़ित के साथ लूटपाट की गई और उसके बाद उसे जिंदा जला दिया गया। इस अमानवीय कृत्य ने कानून व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। मामले में फिलहाल एक नाबालिग आरोपी को जेल भेजा गया है, लेकिन सामाजिक संगठनों का कहना है कि इस प्रकार की सुनियोजित और क्रूर हत्या किसी एक नाबालिग द्वारा संभव नहीं है।

एकलव्य गोताखोर सेवा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्यनाम निषाद ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस हत्याकांड में कई प्रभावशाली एवं सामन्तवादी तत्वों की संलिप्तता से इंकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने मांग की कि सरधना विधानसभा क्षेत्र, जनपद मेरठ के दबंग और प्रभावशाली व्यक्तियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कर उन्हें शीघ्र गिरफ्तार किया जाए। ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि सोनू कश्यप की हत्या केवल एक व्यक्ति की हत्या नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, मानवाधिकार और कानून के शासन पर सीधा हमला है। कश्यप समाज के लोगों का कहना है कि यदि इस मामले में कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो अपराधियों के हौसले और बढ़ेंगे।

ज्ञापन के माध्यम से सरकार से मांग की गई है कि इस हत्याकांड में शामिल सभी आरोपियों को चिन्हित कर फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से सुनवाई कराई जाए और दोष सिद्ध होने पर उन्हें फांसी जैसी सख्त सजा दी जाए। साथ ही यह भी मांग की गई कि मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में कराई जाए। कश्यप समाज ने पीड़ित परिवार की दयनीय स्थिति को देखते हुए सरकार से 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने की मांग की है। समाज के नेताओं का कहना है कि सोनू कश्यप परिवार का सहारा था और उसकी हत्या से परिवार पूरी तरह टूट चुका है।

इसके अतिरिक्त, ज्ञापन में यह भी मांग की गई है कि सोनू कश्यप के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए, ताकि परिवार का भविष्य सुरक्षित हो सके। साथ ही पीड़ित परिवार को किसी भी प्रकार के दबाव, धमकी या प्रताड़ना से बचाने के लिए जान-माल की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। इस अवसर पर बाराबंकी में आयोजित ज्ञापन कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी और कश्यप समाज के लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महाऋषि कश्यप सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. उमेश कश्यप ने कहा कि यह घटना समाज के कमजोर वर्गों के खिलाफ बढ़ते अत्याचार का प्रतीक है।

सोनू कश्यप हत्याकांड  न्याय की पाँच प्रमुख मांगें

1. सभी दोषियों को फांसी की सजा दी जाए
सोनू कश्यप की जिंदा जलाकर की गई निर्मम हत्या न केवल एक आपराधिक घटना है, बल्कि मानवता पर किया गया गंभीर प्रहार है। यह अपराध अत्यंत जघन्य, अमानवीय और समाज को दहला देने वाला है। ऐसे अपराध में शामिल किसी भी आरोपी के प्रति किसी प्रकार की नरमी न्याय व्यवस्था को कमजोर करेगी। इसलिए कश्यप समाज और सामाजिक संगठनों की यह सर्वसम्मत मांग है कि इस हत्याकांड में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से शामिल सभी दोषियों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई कराई जाए और दोष सिद्ध होने पर उन्हें फांसी जैसी कठोरतम सजा दी जाए, ताकि समाज में एक मजबूत संदेश जाए और भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस प्रकार के अपराध को अंजाम देने का साहस न कर सके।

2. पीड़ित परिवार को ₹50 लाख की आर्थिक सहायता प्रदान की जाए
सोनू कश्यप अपने परिवार का मुख्य सहारा था। उसकी नृशंस हत्या के बाद परिवार आर्थिक, मानसिक और सामाजिक रूप से पूरी तरह टूट चुका है। ऐसे में सरकार का दायित्व बनता है कि वह पीड़ित परिवार को त्वरित और पर्याप्त आर्थिक सहायता प्रदान करे। ज्ञापन के माध्यम से यह मांग की गई है कि सरकार पीड़ित परिवार को कम से कम ₹50 लाख रुपये का मुआवजा प्रदान करे, जिससे परिवार अपने जीवन का पुनर्निर्माण कर सके और उन्हें दैनिक जीवन की आवश्यकताओं के लिए किसी के सामने हाथ न फैलाना पड़े।

3. परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए
केवल आर्थिक सहायता ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पीड़ित परिवार के भविष्य को स्थायी रूप से सुरक्षित करना भी अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य से यह मांग उठाई गई है कि सोनू कश्यप के परिवार के एक योग्य सदस्य को सरकारी नौकरी प्रदान की जाए। इससे न केवल परिवार को नियमित आय का स्रोत मिलेगा, बल्कि उन्हें सामाजिक सुरक्षा और सम्मान भी प्राप्त होगा। यह कदम सरकार की संवेदनशीलता और पीड़ित परिवार के प्रति उसकी जिम्मेदारी को दर्शाएगा।

4. पीड़ित परिवार की जान-माल की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित की जाए
इस हत्याकांड के बाद यह आशंका जताई जा रही है कि पीड़ित परिवार पर दबाव बनाया जा सकता है या उन्हें धमकियां दी जा सकती हैं, ताकि वे न्याय की लड़ाई से पीछे हट जाएं। ऐसी किसी भी स्थिति से बचाने के लिए यह अनिवार्य है कि प्रशासन पीड़ित परिवार को पूर्ण सुरक्षा प्रदान करे। परिवार के सदस्यों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, ताकि वे बिना किसी भय के न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग कर सकें और सच सामने आ सके।

5. मामले की उच्चस्तरीय व निष्पक्ष जांच कराई जाए
सामाजिक संगठनों का स्पष्ट कहना है कि यह अपराध किसी एक नाबालिग द्वारा अकेले किया जाना संभव नहीं प्रतीत होता। ऐसे में संदेह है कि इस हत्याकांड के पीछे संगठित अपराध या प्रभावशाली लोगों की भूमिका हो सकती है। इसलिए यह मांग की गई है कि मामले की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए। जांच वरिष्ठ अधिकारियों या स्वतंत्र एजेंसी की निगरानी में हो, ताकि किसी भी दोषी को राजनीतिक या सामाजिक दबाव के कारण बचाया न जा सके और सोनू कश्यप को वास्तविक न्याय मिल सके।

रिपोर्ट : कोटो न्यूज़ नेटवर्क (KNN) |

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