गोरखपुर ज़िले के झंगहा करही क्षेत्र में शनिवार शाम को उस समय अफरातफरी मच गई जब एक जर्जर नाव, जिस पर ग्रामीण नदी पार कर रहे थे, अचानक संतुलन खोकर डूब गई। इस दर्दनाक हादसे में एक मासूम बच्चे की मौत हो गई, जबकि कई लोग किसी तरह तैरकर किनारे पहुँचे। बताया जा रहा है…

गोरखपुर ज़िले के झंगहा करही क्षेत्र में शनिवार शाम को उस समय अफरातफरी मच गई जब एक जर्जर नाव, जिस पर ग्रामीण नदी पार कर रहे थे, अचानक संतुलन खोकर डूब गई। इस दर्दनाक हादसे में एक मासूम बच्चे की मौत हो गई, जबकि कई लोग किसी तरह तैरकर किनारे पहुँचे। बताया जा रहा है कि नाव की स्थिति बेहद खराब थी और उसकी मरम्मत लंबे समय से नहीं हुई थी। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार की लापरवाही और विभागीय उदासीनता के चलते यह हादसा हुआ।

घटना की सूचना मिलते ही इलाके में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों ने तुरंत पुलिस और प्रशासन को सूचना दी। इसके बाद NDRF टीम, क्षेत्राधिकारी (सीओ) और उपजिलाधिकारी (SDM) मौके पर पहुँचकर राहत कार्य में जुट गए। डूबे हुए बच्चे को निकालने के लिए गोताखोरों की मदद ली गई, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

दूसरा अनुच्छेद : विधायक ई. सरवन निषाद की तत्परता और सख्त रुख

हादसे की जानकारी मिलते ही क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक ई. सरवन निषाद स्वयं मौके पर पहुँचे। उन्होंने तुरंत राहत एवं बचाव कार्यों का निरीक्षण किया और प्रशासनिक अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। विधायक ने कहा कि,

“यह घटना अत्यंत दुखद और अस्वीकार्य है। एक भी दोषी बख़्शा नहीं जाएगा। संबंधित विभाग की ज़िम्मेदारी तय होगी और लापरवाही करने वाले ठेकेदार तथा अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी।”

विधायक ने जिला अधिकारी (डीएम) और संबंधित विभागीय अफ़सरों से फ़ोन पर बातचीत कर तत्काल मुकदमा दर्ज कराने, जांच शुरू करने और पीड़ित परिवार को आर्थिक व सामाजिक मदद देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शासन स्तर से भी इस घटना की पूरी रिपोर्ट माँगी जाएगी।

मौके पर विधायक ने मृतक बच्चे के परिजनों से मिलकर गहरा दुख व्यक्त किया और हर संभव मदद का भरोसा दिया। उन्होंने प्रशासन से कहा कि परिवार को आर्थिक मुआवज़ा, सरकारी आवास और नौकरी या स्वरोज़गार सहायता योजना के तहत सहायता दी जाए।

तीसरा अनुच्छेद : लापरवाही की जाँच और स्थानीय लोगों की पीड़ा

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह नाव पिछले कई महीनों से जर्जर हालत में थी। ग्रामीणों ने कई बार पंचायत और विभागीय अधिकारियों को इसकी मरम्मत की माँग की थी, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। नाव के किनारे से सड़े हुए तख्ते टूट रहे थे और उसमें जगह-जगह छेद हो गए थे। इसके बावजूद लोगों को मजबूरी में उसी नाव से नदी पार करनी पड़ती थी क्योंकि यह एकमात्र संपर्क मार्ग था।

गाँव के बुज़ुर्ग रामसहाय निषाद ने कहा,

“नाव रोज़ चलती थी, पर उसकी हालत बहुत खराब थी। ठेकेदार को कई बार कहा गया कि नई नाव लगवा दे, पर उसने टाल दिया। अगर समय रहते ध्यान दिया गया होता, तो यह बच्चा आज ज़िंदा होता।”

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, नाव निर्माण और रखरखाव का अनुबंध स्थानीय जल परिवहन विभाग के अधीन है, और इसे एक निजी ठेकेदार को दिया गया था। शुरुआती जांच में पाया गया है कि नाव की जाँच और मरम्मत कई महीनों से नहीं की गई थी। इस लापरवाही को गंभीर मानते हुए डीएम गोरखपुर ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की है, जो तीन दिनों में रिपोर्ट सौंपेगी।

चौथा अनुच्छेद : जनाक्रोश और प्रशासनिक सख्ती

हादसे के बाद क्षेत्र में भारी जनाक्रोश देखने को मिला। सैकड़ों ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई और नाव संचालन की व्यवस्था सुधारने की माँग की। कुछ समय के लिए सड़क जाम की स्थिति भी बनी, लेकिन विधायक ई. सरवन निषाद और स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुँचकर लोगों को शांत कराया।

विधायक ने कहा कि इस तरह की घटनाएँ क्षेत्र के लिए कलंक हैं और किसी भी अधिकारी या ठेकेदार को जनजीवन के साथ खिलवाड़ करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट कहा —

“मैंने डीएम से बात कर कहा है कि विभागीय स्तर पर यह तय किया जाए कि किसकी गलती से यह हादसा हुआ। दोषी ठेकेदार, लापरवाह अधिकारी या नाव चालक — किसी को भी बख़्शा नहीं जाएगा।”

प्रशासन ने नाव को सीज़ कर लिया है और ठेकेदार पर लापरवाही से जनहानि का मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वहीं NDRF टीम ने आसपास के क्षेत्र में तलाशी अभियान चलाकर यह सुनिश्चित किया कि कोई अन्य व्यक्ति लापता न हो।

राहत और पुनर्वास की दिशा में उठाए कदम

हादसे के बाद मृतक बच्चे के परिवार को प्रशासन की ओर से आपात सहायता राशि दी गई। इसके अलावा विधायक ने व्यक्तिगत रूप से परिवार को आर्थिक मदद का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि वह स्वयं इस मामले की प्रगति पर नज़र रखेंगे और हर स्तर पर न्याय दिलाने की कोशिश करेंगे।

डीएम ने बताया कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सभी नावों का सुरक्षा ऑडिट किया जाएगा। जिन नावों की स्थिति ठीक नहीं पाई जाएगी, उन्हें तुरंत बंद किया जाएगा या बदला जाएगा। इसके साथ ही ठेकेदारों और नाव मालिकों को सुरक्षा मानकों का पालन करने के निर्देश जारी किए जाएंगे।

क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर व्यापक मंथन

इस हादसे के बाद गोरखपुर प्रशासन ने क्षेत्र की सभी नदियों और घाटों की सुरक्षा की समीक्षा शुरू कर दी है। जल परिवहन विभाग को निर्देश दिया गया है कि वह नावों की तकनीकी जाँच, लाइफ जैकेट की उपलब्धता, और लाइसेंसधारी चालकों की नियुक्ति सुनिश्चित करे।

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