, ,

IT सेक्टर की उल्टी गिनती शुरू? AI की दौड़ में पिछड़ता भारत

कोटो महासंघ देश संवाददाता, 22 मई 2026 | दुनियाभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की क्रांति तेजी से आगे बढ़ रही है। तकनीक का यह नया दौर उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग, मीडिया, सुरक्षा और रोजगार के स्वरूप को बदल रहा है। अमेरिका, चीन, जापान और यूरोप जैसे देशों ने AI तकनीक को भविष्य की सबसे बड़ी…

भारत में तेजी से बढ़ती AI तकनीक और IT सेक्टर की चुनौतियों के बीच आधुनिक कंप्यूटर सिस्टम पर काम करते युवा तकनीकी विशेषज्ञ।

कोटो महासंघ देश संवाददाता, 22 मई 2026 | दुनियाभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की क्रांति तेजी से आगे बढ़ रही है। तकनीक का यह नया दौर उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग, मीडिया, सुरक्षा और रोजगार के स्वरूप को बदल रहा है। अमेरिका, चीन, जापान और यूरोप जैसे देशों ने AI तकनीक को भविष्य की सबसे बड़ी ताकत मानते हुए अरबों डॉलर का निवेश शुरू कर दिया है। वहीं भारत, जो कभी दुनिया का IT हब माना जाता था, अब AI क्षेत्र में पिछड़ता दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत ने समय रहते रिसर्च, इनोवेशन, टेक्निकल शिक्षा और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर गंभीरता से काम नहीं किया, तो आने वाले वर्षों में देश का IT सेक्टर बड़ी चुनौतियों का सामना कर सकता है। AI आधारित ऑटोमेशन और मशीन लर्निंग के बढ़ते प्रभाव से पारंपरिक नौकरियों पर संकट गहराने की आशंका भी जताई जा रही है।

दुनिया में AI की तेज रफ्तार बीते कुछ वर्षों में AI तकनीक ने पूरी दुनिया में अभूतपूर्व बदलाव लाया है। बड़ी टेक कंपनियां AI आधारित चैटबॉट, रोबोटिक्स, ऑटोमेशन सिस्टम, मेडिकल एनालिसिस, साइबर सिक्योरिटी और स्मार्ट डाटा मैनेजमेंट पर लगातार काम कर रही हैं। अमेरिका की कई कंपनियों ने AI रिसर्च पर भारी निवेश किया है, जबकि चीन ने AI को राष्ट्रीय विकास नीति का हिस्सा बना लिया है। विश्व स्तर पर AI का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। कई रिपोर्टों के अनुसार आने वाले दस वर्षों में AI उद्योग ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन सकता है। ऐसे समय में भारत जैसे विशाल युवा आबादी वाले देश से उम्मीद की जा रही थी कि वह इस क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाएगा, लेकिन स्थिति उतनी मजबूत दिखाई नहीं दे रही। तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन रिसर्च और इनोवेशन को पर्याप्त समर्थन नहीं मिल पा रहा। अधिकांश युवा केवल नौकरी आधारित तकनीकी शिक्षा तक सीमित रह जाते हैं, जबकि विकसित देशों में AI रिसर्च को स्कूल स्तर से ही बढ़ावा दिया जा रहा है।

भारतीय IT सेक्टर पर बढ़ता दबाव भारत का IT सेक्टर लंबे समय से देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता रहा है। लाखों युवाओं को रोजगार देने वाला यह क्षेत्र विदेशी मुद्रा अर्जित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, नोएडा और गुरुग्राम जैसे शहर IT उद्योग के बड़े केंद्र बन चुके हैं। लेकिन अब AI आधारित तकनीकों के बढ़ते उपयोग ने पारंपरिक IT नौकरियों पर दबाव बढ़ा दिया है। कई कंपनियां डेटा एंट्री, बेसिक कोडिंग, कस्टमर सपोर्ट और रिपिटेटिव प्रोसेस को AI सिस्टम के जरिए संचालित करने लगी हैं। इससे कम स्किल वाली नौकरियों में कटौती की आशंका बढ़ गई है। कई युवा इंजीनियरों का कहना है कि कॉलेजों में अब भी पुराना सिलेबस पढ़ाया जा रहा है। AI, मशीन लर्निंग, क्लाउड कंप्यूटिंग और साइबर सिक्योरिटी जैसी आधुनिक तकनीकों पर पर्याप्त व्यावहारिक प्रशिक्षण नहीं मिल पाता। परिणामस्वरूप भारतीय छात्र वैश्विक प्रतिस्पर्धा में पीछे रह जाते हैं। IT कंपनियों के सामने भी चुनौती बढ़ रही है। कई विदेशी कंपनियां अब केवल आउटसोर्सिंग के बजाय AI आधारित ऑटोमेशन मॉडल पर काम कर रही हैं। इससे भारतीय IT सर्विस सेक्टर की पारंपरिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

शिक्षा और रिसर्च में कमी बनी बड़ी चुनौती विशेषज्ञों के अनुसार भारत में AI क्षेत्र में पिछड़ने का सबसे बड़ा कारण रिसर्च और उच्च गुणवत्ता वाली तकनीकी शिक्षा की कमी है। देश में बड़ी संख्या में इंजीनियरिंग कॉलेज जरूर हैं, लेकिन उनमें से बहुत कम संस्थानों में विश्वस्तरीय रिसर्च की सुविधाएं उपलब्ध हैं। AI तकनीक के लिए हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग, आधुनिक लैब, बड़े डेटा सेंटर और रिसर्च फंडिंग की आवश्यकता होती है। भारत में अभी भी कई विश्वविद्यालय संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं। निजी क्षेत्र में कुछ स्टार्टअप जरूर AI क्षेत्र में काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए पर्याप्त सहयोग नहीं मिल पाता। शिक्षाविदों का कहना है कि केवल डिग्री देने से काम नहीं चलेगा। छात्रों को प्रैक्टिकल स्किल, इनोवेशन और रिसर्च आधारित शिक्षा से जोड़ना होगा। ग्रामीण और छोटे शहरों के छात्रों तक भी आधुनिक तकनीकी शिक्षा पहुंचाना जरूरी है। इसके अलावा विशेषज्ञों ने मातृभाषा आधारित AI तकनीक विकसित करने पर भी जोर दिया है। भारत भाषाई विविधता वाला देश है, इसलिए हिंदी सहित क्षेत्रीय भाषाओं में AI प्लेटफॉर्म विकसित करना भविष्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

क्या भारत संभाल पाएगा तकनीकी भविष्य? AI तकनीक को लेकर पूरी दुनिया में अवसर और खतरे दोनों पर चर्चा हो रही है। एक ओर यह तकनीक स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और उद्योग में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है, वहीं दूसरी ओर रोजगार और डेटा सुरक्षा जैसे मुद्दे भी गंभीर चिंता का विषय बने हुए हैं। भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी है। यदि इस युवा शक्ति को सही दिशा, आधुनिक प्रशिक्षण और रिसर्च का अवसर मिला, तो भारत AI क्षेत्र में बड़ी ताकत बन सकता है। लेकिन यदि वर्तमान चुनौतियों को नजरअंदाज किया गया, तो भविष्य में देश केवल तकनीक का उपभोक्ता बनकर रह जाएगा। विशेषज्ञों ने सरकार, निजी कंपनियों और शैक्षणिक संस्थानों से संयुक्त प्रयास करने की अपील की है। उनका कहना है कि AI शिक्षा को स्कूल स्तर से शुरू किया जाए, रिसर्च फंडिंग बढ़ाई जाए, स्टार्टअप को प्रोत्साहन दिया जाए और भारतीय भाषाओं में तकनीक विकसित की जाए। तकनीकी जानकारों का मानना है कि आने वाला दशक AI का दशक होगा। ऐसे में भारत को केवल दर्शक नहीं, बल्कि वैश्विक नेतृत्वकर्ता बनने की दिशा में काम करना होगा। यदि समय रहते ठोस कदम उठाए गए, तो भारत फिर से तकनीकी दुनिया में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है।

AI क्षेत्र में भारत के सामने प्रमुख चुनौतियां

भारत तेजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है, लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में अभी भी कई बड़ी चुनौतियां मौजूद हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन समस्याओं पर समय रहते गंभीरता से काम नहीं किया गया, तो भारत वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में पीछे रह सकता है। AI तकनीक केवल भविष्य की जरूरत नहीं, बल्कि वर्तमान समय की सबसे बड़ी तकनीकी शक्ति बनती जा रही है। ऐसे में भारत के सामने मौजूद चुनौतियों को समझना बेहद जरूरी हो गया है।

1. रिसर्च और डेवलपमेंट में कम निवेश

दुनिया के विकसित देश AI रिसर्च और डेवलपमेंट पर अरबों डॉलर खर्च कर रहे हैं। अमेरिका, चीन और यूरोपीय देश लगातार नई तकनीकों पर प्रयोग कर रहे हैं, जबकि भारत में रिसर्च पर खर्च अपेक्षाकृत बहुत कम है। देश के अधिकांश विश्वविद्यालय और तकनीकी संस्थान सीमित संसाधनों में काम कर रहे हैं। आधुनिक रिसर्च लैब, सुपर कंप्यूटर और हाई-लेवल AI प्रोजेक्ट्स की कमी साफ दिखाई देती है। निजी कंपनियां भी बड़े स्तर पर रिसर्च में निवेश करने से बचती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक भारत रिसर्च और इनोवेशन पर गंभीर निवेश नहीं करेगा, तब तक केवल आउटसोर्सिंग आधारित IT मॉडल से आगे बढ़ना मुश्किल होगा।

2. इंजीनियरिंग शिक्षा में पुराना सिलेबस

भारत में हर साल लाखों छात्र इंजीनियरिंग की पढ़ाई करते हैं, लेकिन कई कॉलेजों में अब भी वर्षों पुराना सिलेबस पढ़ाया जा रहा है। AI, मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, रोबोटिक्स और साइबर सिक्योरिटी जैसी आधुनिक तकनीकों को कई संस्थानों में पर्याप्त महत्व नहीं मिल रहा। छात्रों को थ्योरी तो पढ़ाई जाती है, लेकिन प्रैक्टिकल ट्रेनिंग और इंडस्ट्री एक्सपोजर की कमी रहती है। परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में इंजीनियर डिग्री लेने के बाद भी उद्योग की जरूरतों के अनुसार तैयार नहीं हो पाते। तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षा प्रणाली को तेजी से बदलती तकनीक के अनुसार अपडेट करना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।

3. हाई-एंड कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी

AI तकनीक को विकसित करने के लिए अत्याधुनिक कंप्यूटिंग सिस्टम, बड़े डेटा सेंटर और हाई-परफॉर्मेंस प्रोसेसर की आवश्यकता होती है। भारत में अभी भी ऐसे संसाधनों की भारी कमी देखी जा रही है। कई रिसर्च संस्थानों और स्टार्टअप कंपनियों के पास पर्याप्त कंप्यूटिंग क्षमता नहीं है। AI मॉडल को ट्रेन करने के लिए भारी मात्रा में डेटा और शक्तिशाली सर्वर चाहिए, लेकिन इनकी लागत बहुत अधिक होती है। इसके अलावा भारत अब भी कई मामलों में विदेशी चिप और तकनीक पर निर्भर है। इससे तकनीकी आत्मनिर्भरता का लक्ष्य प्रभावित होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि देश को अपने डेटा सेंटर और स्वदेशी तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर पर तेजी से काम करना होगा।

4. AI विशेषज्ञों की सीमित संख्या

भारत में प्रतिभाशाली युवाओं की कमी नहीं है, लेकिन AI क्षेत्र में प्रशिक्षित विशेषज्ञों की संख्या अभी भी सीमित है। बड़ी कंपनियां अनुभवी AI इंजीनियरों और डेटा साइंटिस्ट की तलाश में रहती हैं, लेकिन योग्य पेशेवरों की उपलब्धता कम है। कई भारतीय विशेषज्ञ बेहतर अवसरों और उच्च वेतन के कारण विदेशों का रुख कर लेते हैं। इससे देश में “ब्रेन ड्रेन” की समस्या भी बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत को AI सुपरपावर बनना है, तो बड़े स्तर पर स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रम शुरू करने होंगे और युवाओं को आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण देना होगा।

5. स्टार्टअप को पर्याप्त वित्तीय सहायता नहीं

भारत में AI आधारित कई स्टार्टअप उभर रहे हैं, लेकिन उन्हें शुरुआती स्तर पर वित्तीय सहायता और तकनीकी समर्थन की कमी का सामना करना पड़ता है। AI रिसर्च और प्रोडक्ट डेवलपमेंट में भारी निवेश की जरूरत होती है। छोटे स्टार्टअप के लिए महंगे सर्वर, रिसर्च टीम और तकनीकी उपकरण जुटाना आसान नहीं होता। कई अच्छे आइडिया फंडिंग के अभाव में आगे नहीं बढ़ पाते। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार और निजी निवेशकों को AI स्टार्टअप के लिए विशेष योजनाएं और आसान वित्तीय सहायता उपलब्ध करानी चाहिए। इससे देश में इनोवेशन को नई गति मिल सकती है।

6. विदेशी तकनीक पर बढ़ती निर्भरता

भारत का डिजिटल सिस्टम अभी भी कई विदेशी कंपनियों की तकनीक पर आधारित है। AI सॉफ्टवेयर, क्लाउड प्लेटफॉर्म, चिप टेक्नोलॉजी और एडवांस्ड टूल्स के लिए देश काफी हद तक बाहरी कंपनियों पर निर्भर है। यह स्थिति भविष्य में आर्थिक और रणनीतिक चुनौतियां पैदा कर सकती है। यदि भारत अपनी स्वदेशी तकनीक विकसित नहीं करता, तो वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में आत्मनिर्भर बनना मुश्किल होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि “मेक इन इंडिया” की तर्ज पर “AI इन इंडिया” अभियान को बढ़ावा देने की जरूरत है, ताकि भारत अपनी खुद की AI तकनीक और प्लेटफॉर्म तैयार कर सके।

7. ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल शिक्षा की कमी

भारत की बड़ी आबादी गांवों और छोटे शहरों में रहती है, लेकिन वहां अब भी डिजिटल शिक्षा और तकनीकी संसाधनों की भारी कमी है। कई ग्रामीण स्कूलों में कंप्यूटर लैब, इंटरनेट और आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण उपलब्ध नहीं है। AI और डिजिटल तकनीक का लाभ केवल बड़े शहरों तक सीमित रह गया है। यदि ग्रामीण युवाओं को समय पर तकनीकी शिक्षा नहीं मिली, तो डिजिटल असमानता और बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को गांव-गांव तक डिजिटल शिक्षा पहुंचानी होगी। इंटरनेट कनेक्टिविटी, स्मार्ट क्लास, तकनीकी प्रशिक्षण और स्थानीय भाषा आधारित AI शिक्षा को बढ़ावा देना भविष्य के लिए बेहद जरूरी है।

रिपोर्ट : कोटो न्यूज़ नेटवर्क (KNN) |

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About the Author

Easy WordPress Websites Builder: Versatile Demos for Blogs, News, eCommerce and More – One-Click Import, No Coding! 1000+ Ready-made Templates for Stunning Newspaper, Magazine, Blog, and Publishing Websites.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports