नेपाल निषाद परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जितेन्द्र सहनी ने काठमांडू में युवा आंदोलन का किया जोरदार समर्थन

संवादाताः कोटो न्यूज़ नेटवर्क (KNN) |  नेपाल में युवा वर्ग के अधिकार और उनके विकास को लेकर उठ रहे आंदोलनों का समर्थन करते हुए नेपाल निषाद परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जितेन्द्र सहनी ने मिति 09.09.2025 सिंहदरबार में एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में उन्होंने युवाओं के संगठित संघर्ष को समय की…

नेपाल निषाद परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जितेन्द्र सहनी

संवादाताः कोटो न्यूज़ नेटवर्क (KNN) |  नेपाल में युवा वर्ग के अधिकार और उनके विकास को लेकर उठ रहे आंदोलनों का समर्थन करते हुए नेपाल निषाद परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जितेन्द्र सहनी ने मिति 09.09.2025 सिंहदरबार में एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में उन्होंने युवाओं के संगठित संघर्ष को समय की मांग बताया और सरकार से निष्पक्ष कदम उठाने की अपील की। कार्यक्रम में विभिन्न युवा संगठन, राजनीतिक दल और सामाजिक कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे। नेपाल निषाद परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जितेन्द्र सहनी ने कहा कि वर्तमान समय में युवा वर्ग देश के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक बदलाव का सबसे बड़ा हिस्सा हैं। उन्होंने बताया कि युवाओं का यह आंदोलन उनके अधिकारों की मांग के साथ-साथ समाज में पारदर्शिता, समानता और न्याय की स्थापना के लिए भी है। श्री सहनी ने कहा, “युवाओं की आवाज़ को दबाना नहीं बल्कि उसे सुनना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।” उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह युवाओं के साथ संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं का समाधान करें। इस अवसर पर श्री जितेन्द्र सहनी ने बताया कि निषाद समुदाय के युवाओं को भी अन्य समाज के युवाओं के समान अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा, “हमारा आंदोलन सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय की लड़ाई भी है। निषाद समुदाय के युवा शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सम्मान के क्षेत्र में समान अधिकार चाहते हैं।” उन्होंने आगे बताया कि निषाद परिषद लगातार इस दिशा में सरकार और समाज के अन्य वर्गों से सहयोग की अपेक्षा करता है।

कार्यक्रम में उपस्थित अन्य प्रमुख वक्ताओं ने भी युवाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार से त्वरित कदम उठाने की अपील की। युवा नेता सुषमा मगर ने कहा, “युवा शक्ति देश के विकास की रीढ़ है। अगर युवाओं के सवालों पर सरकार समय रहते ध्यान नहीं देती तो यह आंदोलन और भी व्यापक स्वरूप ले सकता है।” कार्यक्रम में युवाओं ने हाथों में प्लेकार्ड्स और बैनर लिए अपने संदेश को जोरदार तरीके से सरकार तक पहुँचाया। कार्यक्रम के अंत में श्री जितेन्द्र सहनी ने निषाद समुदाय के युवाओं को भी इस आंदोलन में संगठित होने का आह्वान किया। उन्होंने निषाद युवाओं से आग्रह किया कि वे शांतिपूर्ण और सकारात्मक तरीके से अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ें। उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य समाज में एकता, समानता और न्याय स्थापित करना है। निषाद समाज का हर युवा इस आंदोलन का हिस्सा बने।” इस अवसर पर निषाद परिषद ने आगामी दिनों में व्यापक जनजागरण अभियान चलाने की भी योजना बनाई है।

1. रोजगार में आरक्षण

नेपाल में युवाओं को स्थायी और समान अवसर के साथ रोजगार मिलना आज के समय की एक प्रमुख आवश्यकता बन गई है। विशेष रूप से निषाद समुदाय के युवा अनेक क्षेत्रों में सरकारी और निजी रोजगार के लिए आवेदन करते समय समान प्रतिस्पर्धा का सामना करते हैं, लेकिन सामाजिक भेदभाव, पारंपरिक संरचनात्मक असमानताओं और नीति निर्माण में अभाव के कारण उन्हें समान अवसर नहीं मिल पाता। युवा आंदोलन के तहत यह प्रमुख मांग की जा रही है कि निषाद समुदाय सहित सभी सामाजिक वर्गों के युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों में विशेष आरक्षण दिया जाए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि समाज के सभी हिस्सों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जाए और बेरोजगारी की समस्या पर प्रभावी रूप से काबू पाया जा सके। आरक्षण नीति के माध्यम से युवाओं को नौकरी प्राप्त करने का अधिकार सुनिश्चित किया जाना चाहिए ताकि वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर सकें और समाज के विकास में अपना योगदान दे सकें।

2. शिक्षा में समान अवसर

शिक्षा एक ऐसा माध्यम है, जिसके द्वारा समाज का हर वर्ग समान रूप से प्रगति कर सकता है। वर्तमान समय में भी नेपाल में विशेषकर निषाद समुदाय के युवा शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसरों से वंचित हैं। उच्च गुणवत्ता की शिक्षा प्राप्त करने, छात्रवृत्ति योजना का लाभ लेने, प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लेने और समुचित शिक्षा संसाधनों तक पहुँच प्राप्त करने में निषाद समुदाय के युवाओं को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इस आंदोलन के माध्यम से यह माँग की जा रही है कि शिक्षा प्रणाली को पूरी तरह से न्यायसंगत बनाया जाए। सरकार को निषाद समाज के विद्यार्थियों के लिए विशेष छात्रवृत्ति योजनाएं बनानी चाहिए, शिक्षा संस्थानों में आरक्षण लागू करना चाहिए, और ग्रामीण व पिछड़े क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए पर्याप्त संसाधन मुहैया कराने चाहिए। ताकि निषाद समुदाय के युवा भी समान प्रतिस्पर्धा के योग्य बनें और उनके सामने आने वाली सामाजिक व आर्थिक बाधाएं कम हों।

3. सामाजिक न्याय और समानता

नेपाल का समाज विभिन्न जाति, धर्म और समुदायों का मिश्रण है, जिसमें निषाद समुदाय सहित कई पिछड़े वर्ग वर्षों से सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक भेदभाव का सामना कर रहे हैं। समाज के मुख्य धारा से वंचित निषाद समुदाय की पहचान, अधिकार और सम्मान को सुनिश्चित करना इस आंदोलन की एक महत्वपूर्ण माँग है। युवा आंदोलन में यह माँग जोर-शोर से उठाई जा रही है कि निषाद समाज को समान नागरिक अधिकार मिले। इसके तहत सामाजिक भेदभाव, जातिगत अत्याचार, वंचना, और अनुचित व्यवहार पर रोक लगाने के लिए कड़े कानून बनाए जाएं। साथ ही, समाज में निषाद समुदाय के प्रति व्याप्त पूर्वाग्रह को दूर करने हेतु व्यापक जनजागरण अभियान चलाने की भी अपील की जा रही है। न्यायपालिका, प्रशासन और सामाजिक संस्थानों में निषाद समुदाय का उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाना चाहिए ताकि निर्णय प्रक्रिया में निष्पक्षता बनी रहे। सामाजिक समानता के लिए केवल कागजी सुधार ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक कदम भी उठाए जाने चाहिए ताकि निषाद समाज का हर नागरिक समाज के अन्य वर्गों के समान सम्मानपूर्वक जीवन जी सके।

4 . निष्पक्ष प्रतिनिधित्व

नेपाल के लोकतांत्रिक ढांचे में सभी समाज के वर्गों, जातियों और समुदायों को समान अधिकार और अवसर मिलना चाहिए। परंतु वर्तमान समय में निषाद समाज सहित कई पिछड़े और वंचित समुदायों का राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक क्षेत्र में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है। निष्पक्ष प्रतिनिधित्व का अर्थ केवल राजनीतिक सत्ता में हिस्सेदारी नहीं, बल्कि समाज के हर क्षेत्र में सभी समुदायों का न्यायपूर्ण और संतुलित भागीदारी सुनिश्चित करना है।

निष्पक्ष प्रतिनिधित्व के अंतर्गत यह सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है कि नेपाल की संसद, राज्य सरकारें, पंचायतें, सरकारी विभाग, न्यायपालिका, प्रशासनिक निकाय, विकास परियोजनाओं की निगरानी समितियां और अन्य महत्वपूर्ण संस्थाएं समाज के हर वर्ग का प्रतिबिंब हों। आज भी बहुत से निर्णय ऐसे होते हैं, जो मुख्यधारा की जातियों व समाज के प्रभावशाली वर्गों के हित में लिए जाते हैं, जबकि निषाद समाज और अन्य पिछड़े वर्गों की आवाज़ अक्सर अनसुनी रह जाती है।

युवा आंदोलन की एक प्रमुख माँग यह है कि संविधान और अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत निष्पक्ष प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए। इसका अर्थ यह है कि हर समाज के प्रतिनिधियों को उनके जनसंख्या अनुपात के अनुसार राजनीतिक पद, सरकारी नियुक्तियां, न्यायिक नियुक्तियां और अन्य प्रशासनिक भूमिकाओं में उचित स्थान दिया जाए। निषाद समुदाय के युवा, जो सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक क्षेत्र में समान अधिकारों की माँग कर रहे हैं, चाहते हैं कि उनके प्रतिनिधि नीति निर्माण से लेकर उसके कार्यान्वयन तक हर चरण में सम्मिलित रहें।

इसके पीछे यह विश्वास है कि जब तक समाज के सभी वर्ग समान रूप से प्रशासनिक एवं नीति निर्माण प्रक्रिया में शामिल नहीं होंगे, तब तक न्यायपूर्ण शासन का लक्ष्य पूरा नहीं हो सकता। निष्पक्ष प्रतिनिधित्व से ही निषाद समाज जैसे पिछड़े वर्गों के मुद्दे सही तरीके से सामने आ सकते हैं और उनके समाधान के लिए स्थायी कदम उठाए जा सकते हैं।

युवाओं का यह आंदोलन निष्पक्ष प्रतिनिधित्व को केवल एक राजनीतिक आवश्यकता नहीं मानता, बल्कि इसे सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक अधिकार की नींव भी मानता है। उनका मानना है कि प्रतिनिधित्व की अनिवार्यता तब सिद्ध होगी, जब प्रत्येक समुदाय का हर नागरिक सरकारी निर्णय प्रक्रिया में हिस्सेदार बनेगा, जिससे शासन व्यवस्था अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और समावेशी बनेगी।

इस दिशा में निषाद परिषद सरकार से यह मांग कर रहा है कि वे संविधान में स्पष्ट रूप से आरक्षण का प्रावधान करें, ताकि निषाद समाज के युवाओं को न केवल संसद और स्थानीय निकायों में प्रतिनिधित्व मिले, बल्कि न्यायपालिका, पुलिस, शिक्षा प्रणाली, विकास परियोजनाओं और प्रशासनिक विभागों में भी निष्पक्ष भागीदारी सुनिश्चित हो। साथ ही, इस प्रतिनिधित्व को केवल संख्या में सीमित न रखते हुए वास्तविक प्रभावशाली पदों तक पहुंच प्रदान की जाए, ताकि निर्णय प्रक्रिया में निषाद समाज का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे।

 

रिपोर्ट : कोटो न्यूज़ नेटवर्क (KNN) 

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