मुजरी डाक बंगले, महाराजगंज में आयोजित कार्यक्रम में मंच पर मौजूद विभिन्न संगठनों के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं कार्यकर्ता।
भारत, 20 अप्रैल 2026 | महराजगंज जनपद के मुजरी डाक बंगले पर रविवार को पूर्वांचल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखने को मिला, जब पूर्वांचल भागीदारी संकल्प मोर्चा के तत्वावधान में एक विशाल कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का नेतृत्व अभय समाज पार्टी के संस्थापक माननीय शत्रुधन सिंह निषाद ने किया। कार्यक्रम में क्षेत्र के विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और किसान संगठनों के राष्ट्रीय अध्यक्षों, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की भारी उपस्थिति रही, जिससे पूरे इलाके में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई।
यह आयोजन आगामी 2027 के चुनाव को ध्यान में रखते हुए गठित पूर्वांचल भागीदारी संकल्प मोर्चा की रणनीति और शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान मंच से एकजुटता, सामाजिक न्याय और वंचित वर्गों के अधिकारों की लड़ाई को तेज करने का आह्वान किया गया।
कार्यक्रम में देश और प्रदेश के कई प्रमुख संगठनों के राष्ट्रीय अध्यक्षों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इनमें राजन सिंह सूर्यवंशी (भारतीय अपना समाज पार्टी), जनार्दन चौहान (लौकिक समाज पार्टी), पिंटू साहनी (जनशक्ति सेना), सुनील श्रीवास्तव (अखिल भारतीय संविदा कर्मचारी महासंघ), राकेश सिंह (राष्ट्रीय दिव्यांग एकता संघ), अरविंद सिंह सैथवार (भारतीय किसान यूनियन पार्टी), संतोष सिंह चौहान (क्रांतिकारी स्वराज दल), विजय ज़ुआठा (पानी बचाओ महासंघ), मनोज सिंह सैथवार (भारतीय किसान यूनियन पार्टी), चन्द्रभान निषाद (फिशरमैन आर्मी), सुधांशु श्रीवास्तव (राष्ट्रीय समाज पार्टी) तथा बी.एम. त्रिपाठी (भारतीय ग्रामवासी पार्टी) प्रमुख रूप से शामिल रहे |इन सभी नेताओं ने अपने संबोधन में पूर्वांचल के पिछड़े, दलित, किसान और मजदूर वर्ग की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया और एकजुट होकर संघर्ष करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि पूर्वांचल लंबे समय से विकास और भागीदारी के मुद्दों पर उपेक्षित रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यधारा की राजनीति में गरीब, किसान, मजदूर और पिछड़े वर्गों की आवाज को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जाता। ऐसे में पूर्वांचल भागीदारी संकल्प मोर्चा एक मजबूत विकल्प के रूप में उभर रहा है, जो इन वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष करेगा।
नेताओं ने जोर देते हुए कहा कि यह मोर्चा केवल एक राजनीतिक गठबंधन नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का एक आंदोलन है, जिसका उद्देश्य समाज के हर वर्ग को समान अधिकार और सम्मान दिलाना है।
कार्यक्रम के दौरान संगठन की मजबूती, बूथ स्तर तक विस्तार और कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी पर विशेष चर्चा की गई। सभी दलों के नेताओं ने आगामी समय में संयुक्त रूप से जनसंपर्क अभियान चलाने, गांव-गांव तक पहुंच बनाने और आम जनता की समस्याओं को सुनकर समाधान के लिए संघर्ष करने की रणनीति बनाई।
वक्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्ष 2027 के चुनाव में यह मोर्चा एक मजबूत विकल्प के रूप में सामने आएगा और पूर्वांचल की राजनीति में नई दिशा देने का कार्य करेगा। कार्यक्रम के अंत में सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में संकल्प लिया कि वे जनता के हक, सम्मान और अधिकारों की लड़ाई को पूरी निष्ठा और ईमानदारी से आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि पूर्वांचल भागीदारी संकल्प मोर्चा का उद्देश्य केवल सत्ता प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज के वंचित वर्गों को न्याय दिलाना है। कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए आयोजकों ने सभी अतिथियों, कार्यकर्ताओं और समर्थकों का आभार व्यक्त किया और भविष्य में भी इसी तरह के सहयोग की अपेक्षा जताई।

पूर्वांचल भागीदारी संकल्प मोर्चा
पूर्वांचल भागीदारी संकल्प मोर्चा एक ऐसा व्यापक गठबंधन है, जिसमें क्षेत्र के विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक, किसान, श्रमिक और वंचित वर्गों से जुड़े संगठनों ने एक मंच पर आकर साझा संघर्ष का संकल्प लिया है। यह मोर्चा केवल चुनावी गठबंधन नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की सोच के साथ गठित एक संगठित प्रयास है, जिसका उद्देश्य पूर्वांचल के उपेक्षित वर्गों को मुख्यधारा में लाना है।
यह मंच उन समुदायों की आवाज को मजबूत करने के लिए बनाया गया है, जो लंबे समय से विकास, प्रतिनिधित्व और संसाधनों के उचित बंटवारे से वंचित रहे हैं। मोर्चा का गठन वर्ष 2027 के चुनाव को ध्यान में रखते हुए किया गया है, लेकिन इसकी नींव सामाजिक न्याय और समान भागीदारी के सिद्धांतों पर आधारित है।

सामाजिक न्याय और अधिकारों की लड़ाई
मोर्चा का मुख्य उद्देश्य समाज के हर वर्ग को समान अवसर और सम्मान दिलाना है। इसके अंतर्गत—पिछड़े, दलित और वंचित समाज को राजनीतिक भागीदारी दिलाना,किसानों और मजदूरों के अधिकारों की रक्षा करना, शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य सेवाओं में समान अवसर सुनिश्चित करना ,सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना मोर्चा के नेताओं का मानना है कि जब तक समाज के कमजोर वर्गों को बराबरी का अधिकार और सम्मान नहीं मिलेगा, तब तक वास्तविक लोकतंत्र की स्थापना संभव नहीं है।

किन वर्गों पर विशेष ध्यान
पूर्वांचल भागीदारी संकल्प मोर्चा का मुख्य फोकस उन वर्गों पर है, जो समाज में सबसे अधिक संघर्ष कर रहे हैं। इनमें शामिल हैं—किसान: जिनकी आय, फसल का उचित मूल्य और कर्ज जैसी समस्याएं प्रमुख हैं
मजदूर: जिन्हें रोजगार, न्यूनतम वेतन और सुरक्षा की आवश्यकता है
पिछड़ा वर्ग: जिन्हें सामाजिक और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में हिस्सेदारी कम मिलती है
दलित समाज: जिनके अधिकार और सम्मान की रक्षा आवश्यक है
वंचित वर्ग: जो मुख्यधारा से दूर रह गए हैं और जिन्हें अवसरों की जरूरत है
मोर्चा का लक्ष्य इन सभी वर्गों को एकजुट कर उनकी आवाज को मजबूत बनाना है, ताकि वे अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर संघर्ष कर सकें।

लक्ष्य: 2027 में मजबूत राजनीतिक विकल्प
मोर्चा का दीर्घकालिक लक्ष्य वर्ष 2027 के चुनाव में एक मजबूत और प्रभावी राजनीतिक विकल्प के रूप में उभरना है। इसके लिए संगठन अभी से जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और जनसमर्थन जुटाने में लगा हुआ है।नेताओं का कहना है कि यह मोर्चा केवल सत्ता प्राप्ति के लिए नहीं, बल्कि व्यवस्था में बदलाव लाने के लिए कार्य करेगा। वे चाहते हैं कि पूर्वांचल की जनता को ऐसा विकल्प मिले, जो उनकी समस्याओं को समझे और उनके समाधान के लिए ईमानदारी से काम करे।
कार्यक्रम की प्रमुख बातें
1. मुजरी डाक बंगले पर विशाल जनसमागम
कार्यक्रम में भारी संख्या में कार्यकर्ताओं, समर्थकों और स्थानीय नागरिकों की उपस्थिति देखने को मिली। मुजरी डाक बंगला पूरी तरह से जनसमूह से भरा हुआ नजर आया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि मोर्चा को जमीनी स्तर पर व्यापक समर्थन मिल रहा है।
2. कई राष्ट्रीय अध्यक्षों की भागीदारी
कार्यक्रम की खास बात यह रही कि इसमें विभिन्न संगठनों के कई राष्ट्रीय अध्यक्षों ने भाग लिया। इससे यह संदेश गया कि मोर्चा केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी स्वीकार्यता और विस्तार हो रहा है।
3. सामाजिक न्याय और अधिकारों पर जोर
सभी वक्ताओं ने अपने-अपने संबोधन में सामाजिक न्याय, समानता और अधिकारों की बात को प्रमुखता दी। उन्होंने कहा कि समाज के हर वर्ग को बराबरी का हक मिलना चाहिए और इसके लिए संघर्ष करना जरूरी है।
4. 2027 के चुनाव को लेकर रणनीति
कार्यक्रम में आगामी 2027 के चुनाव को लेकर विस्तृत रणनीति पर चर्चा की गई। नेताओं ने संगठन को मजबूत करने, नए कार्यकर्ताओं को जोड़ने और जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं को समझने पर जोर दिया।
रिपोर्ट : कोटो न्यूज़ नेटवर्क (KNN) |