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गोरखपुर के समाजसेवी श्री दिनेश निषाद बोले शिक्षा सेवा और एकता ही सच्चे दीपावली के प्रतीक

सम्पादक : निषाद कोटो न्यूज़ नेटवर्क (KNN) | गोरखपुर के सामाजिक और शैक्षणिक विकास में अहम भूमिका निभाने वाले प्रसिद्ध समाजसेवी श्री दिनेश निषाद ने दीपावली और छठ महापर्व के पावन अवसर पर अपने क्षेत्र सहित समस्त देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित की हैं। उन्होंने अपने विशेष संदेश में कहा कि “यह प्रकाश पर्व हम…

समाजसेवी श्री दिनेश निषाद का दीपावली संदेश

सम्पादक : निषाद कोटो न्यूज़ नेटवर्क (KNN) | गोरखपुर के सामाजिक और शैक्षणिक विकास में अहम भूमिका निभाने वाले प्रसिद्ध समाजसेवी श्री दिनेश निषाद ने दीपावली और छठ महापर्व के पावन अवसर पर अपने क्षेत्र सहित समस्त देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित की हैं। उन्होंने अपने विशेष संदेश में कहा कि “यह प्रकाश पर्व हम सभी के जीवन में खुशहाली, समृद्धि, स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आए। दीपावली का यह त्यौहार केवल दीप जलाने का नहीं बल्कि अपने मन के अंधकार को मिटाने का प्रतीक है।

समाजसेवी श्री दिनेश निषाद ने आगे कहा कि समाज के विकास के लिए शिक्षा सबसे बड़ा माध्यम है, और वे स्वयं “समाजसेवी श्री दिनेश निषाद एजुकेशन सेंटर” के माध्यम से निशुल्क शिक्षा अभियान चला रहे हैं। उनका मानना है कि “शिक्षा ही वास्तविक शक्ति है जो हर व्यक्ति को सशक्त बनाती है और समाज को ऊँचाइयों तक पहुँचाती है। आप सभी का सहयोग और आशीर्वाद ही मेरी सबसे बड़ी पूंजी है,” यह कहते हुए श्री दिनेश निषाद ने अपने संदेश में जनता जनार्दन के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि समाज के हर वर्ग का साथ और विश्वास ही उनके कार्यों की प्रेरणा है। दीपावली जैसे पर्वों का अर्थ केवल रोशनी और मिठास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक संदेश भी देता है  कि हम सब मिलकर अपने समाज और क्षेत्र को बेहतर दिशा में आगे बढ़ाएं।

उन्होंने आगे कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि हम अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दें, समाज में समानता की भावना को बढ़ाएं और हर व्यक्ति को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर प्रदान करें |समाजसेवी श्री दिनेश निषाद ने विशेष रूप से यह भी कहा कि निषाद समाज को शिक्षा, स्वावलंबन और एकता के मार्ग पर चलने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य केवल अपने समाज को सशक्त बनाना नहीं बल्कि पूरे देश के विकास में भागीदारी निभाना है।वे लगातार निषाद धाम आयोजक समिति” के माध्यम से सामाजिक कार्यों, धार्मिक आयोजन, महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम और शिक्षा प्रसार जैसे कई महत्वपूर्ण अभियानों में सक्रिय हैं। उनके नेतृत्व में गोरखपुर के चारपानी क्षेत्र में “आदिशक्ति मां भवानी काली मंदिर” और “आदिशक्ति महाकाली सेवा शक्तिपीठ ट्रस्ट” की स्थापना की गई, जो न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है बल्कि समाजसेवा और शिक्षा का प्रतीक बन चुका है।

अपने संदेश के अंत में समाजसेवी श्री दिनेश निषाद ने कहा —आइए, इस दीपावली हम सब मिलकर समाज में प्रेम, सौहार्द और एकता का दीप जलाएं। एक-दूसरे की सहायता करें, कमजोर वर्गों के जीवन में रोशनी लाएं और अपने क्षेत्र को विकास की नई दिशा दें। जनसेवा ही मेरा धर्म है और यही मेरे जीवन का उद्देश्य है। उन्होंने सभी क्षेत्रवासियों से अपील की कि वे दीपावली के अवसर पर पर्यावरण का ध्यान रखते हुए स्वच्छ और हरित दीपावली मनाएं। साथ ही, बच्चों को पटाखों की जगह शिक्षा, संस्कृति और स्वच्छता के महत्व से परिचित कराएं।

श्री दिनेश निषाद का प्रेरक संदेश  “जनसेवा और शिक्षा ही मेरा सच्चा धर्म” गोरखपुर के सुप्रसिद्ध समाजसेवी और निषाद धाम आयोजक श्री दिनेश निषाद का जीवन समाज के लिए समर्पण और निःस्वार्थ सेवा की मिसाल है। उनका मानना है कि समाज की सेवा, शिक्षा का प्रसार और लोगों में जागरूकता लाना ही सच्चे जीवन का उद्देश्य है। वे कहते हैं  मैं किसी पद, सम्मान या प्रसिद्धि के लिए कार्य नहीं करता। मेरा उद्देश्य केवल समाज को सशक्त, शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाना है। जब समाज के हर घर में एक शिक्षित बालक और एक सशक्त महिला होगी, तभी हमारा क्षेत्र और देश सही मायने में आगे बढ़ेगा।

निःशुल्क शिक्षा के लिए मिशन निषाद एजुकेशन सेंटर

समाजसेवी श्री दिनेश निषाद ने वर्षों पहले गोरखपुर के चारपानी क्षेत्र में “निषाद एजुकेशन सेंटर” की स्थापना की थी, जो आज सैकड़ों गरीब, वंचित और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए शिक्षा का दीप बन चुका है। यह संस्थान पूरी तरह निःशुल्क शिक्षा प्रदान करता है, जहाँ बच्चों को न केवल पाठ्य ज्ञान बल्कि नैतिक शिक्षा, अनुशासन, स्वच्छता और सामाजिक मूल्यों की भी शिक्षा दी जाती है। उनका मानना है कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है। यह व्यक्ति के भीतर सोचने, समझने और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने की भावना जगाती है। अगर हम एक बच्चे को शिक्षित करते हैं, तो हम पूरे परिवार और समाज के भविष्य को उजाला देते हैं। निषाद एजुकेशन सेंटर में पढ़ने वाले अनेक छात्र आज विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। कई बच्चे जिन्होंने कभी स्कूल का चेहरा तक नहीं देखा था, आज उच्च शिक्षा की राह पर अग्रसर हैं। यह परिवर्तन श्री दिनेश निषाद की सामाजिक सोच और अथक परिश्रम का परिणाम है।

धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का संवाहक निषाद धाम आयोजक समिति

सिर्फ शिक्षा ही नहीं, समाजसेवी श्री दिनेश निषाद समाज की सांस्कृतिक और धार्मिक चेतना को भी जीवंत रखने में विश्वास रखते हैं। उन्होंने “निषाद धाम आयोजक समिति” का गठन किया, जिसके माध्यम से हर वर्ष कई धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य समाज में एकता, सामूहिकता और भारतीय परंपराओं के संरक्षण को बढ़ावा देना है। चारपानी, गोरखपुर स्थित “आदिशक्ति मां भवानी काली मंदिर” और “आदिशक्ति महाकाली सेवा शक्तिपीठ ट्रस्ट” उनकी इसी सोच का परिणाम हैं। यह स्थल आज भक्ति और सेवा दोनों का संगम बन चुका है, जहाँ हर वर्ग, हर उम्र और हर जाति के लोग एक साथ आकर मानवता का संदेश देते हैं। इन आयोजनों में न केवल पूजा-अर्चना होती है, बल्कि गरीबों को भोजन वितरण, छात्र-छात्राओं को कॉपी-किताबें देना, महिलाओं को आत्मरक्षा प्रशिक्षण और पर्यावरण जागरूकता अभियानों जैसी कई सामाजिक गतिविधियाँ भी चलाई जाती हैं।

 शिक्षा और आत्मनिर्भरता का सपना

समाजसेवी श्री दिनेश निषाद का सपना बहुत स्पष्ट है — वे चाहते हैं कि केवल गोरखपुर ही नहीं, बल्कि पूरा निषाद समाज शिक्षा और आत्मनिर्भरता की मिसाल बने। उनका कहना है कि जब तक हर व्यक्ति शिक्षित नहीं होगा, तब तक समाज सशक्त नहीं बन सकता।
वे कहते हैं — हमारे समाज के बच्चे डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, अधिकारी बनें — यही मेरा सपना है। मैं चाहता हूँ कि कोई भी बच्चा गरीबी या संसाधनों की कमी के कारण अपनी पढ़ाई न छोड़ दे। वे स्वयं गाँव-गाँव जाकर लोगों को शिक्षित होने के लिए प्रेरित करते हैं और माता-पिता से बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की अपील करते हैं। उनके अनुसार, “शिक्षा केवल नौकरी पाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह आत्मविश्वास और सम्मान के साथ जीवन जीने की कुंजी है।

हर बच्चे के अधिकार की आवाज़

अपने संदेश में समाजसेवी श्री दिनेश निषाद ने यह भी कहा कि हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पाने का समान अवसर मिलना चाहिए, चाहे उसका परिवार कितना भी गरीब क्यों न हो। शिक्षा एक बेहतर जीवन की कुंजी है, और हर बच्चे को इसका अधिकार है। हमें समाज में ऐसे माहौल का निर्माण करना चाहिए जहाँ किसी बच्चे को आर्थिक स्थिति के कारण शिक्षा से वंचित न रहना पड़े।” वे मानते हैं कि यदि समाज के सभी लोग थोड़ा-थोड़ा योगदान करें, तो शिक्षा का दीप हर घर में जल सकता है। उनके अनुसार, “सरकार की योजनाएँ तभी सफल होंगी जब समाज भी उसमें सक्रिय भूमिका निभाएगा।

 

रिपोर्ट : निषाद कोटो न्यूज़ नेटवर्क (KNN) |

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