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कुर्खिला में नशा मुक्ति अभियान, महिलाओं और युवाओं को स्वरोजगार की दिशा

भारत, 28 फरवरी 2026 |ग्रामीण समाज में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति, महिलाओं की सामाजिक भागीदारी और युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए देवा ब्लॉक स्थित कुर्खिला ग्राम पंचायत में “जलांचल प्रगति पथ” के बैनर तले एक महत्वपूर्ण ग्राम स्तरीय बैठक आयोजित की गई। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नशा उन्मूलन, महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार…

कुर्खिला ग्राम पंचायत में नशा उन्मूलन, महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार पर ग्राम स्तरीय बैठक आयोजित, ग्रामीणों को योजनाओं व आत्मनिर्भरता का संदेश।

भारत, 28 फरवरी 2026 |ग्रामीण समाज में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति, महिलाओं की सामाजिक भागीदारी और युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए देवा ब्लॉक स्थित कुर्खिला ग्राम पंचायत में “जलांचल प्रगति पथ” के बैनर तले एक महत्वपूर्ण ग्राम स्तरीय बैठक आयोजित की गई। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नशा उन्मूलन, महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना था।
बैठक में ग्रामीणों, युवाओं, महिलाओं तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं की उल्लेखनीय भागीदारी रही। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने सामाजिक सुधार, आत्मनिर्भरता और शिक्षा के महत्व पर जोर दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत जिला स्तर के पदाधिकारियों के परिचय और स्वागत से हुई। बाराबंकी जिला अध्यक्ष अंगद कुमार कश्यप ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए नशे के दुष्परिणामों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि नशा केवल व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज को प्रभावित करता है।
उन्होंने ग्रामीणों को प्रेरित करते हुए कहा कि नशे से दूर रहना ही स्वस्थ और सम्मानजनक जीवन की पहली शर्त है। इस अवसर पर उन्होंने सभी उपस्थित लोगों को नशा छोड़ने की सामूहिक शपथ भी दिलाई। शपथ ग्रहण के दौरान ग्रामीणों ने नशामुक्त समाज बनाने का संकल्प लिया, जिससे कार्यक्रम का वातावरण भावनात्मक और प्रेरणादायक बन गया।

संस्था के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अंगद कुमार निषाद ने अपने उद्बोधन में युवाओं और अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि आज का समय नौकरी खोजने का नहीं, बल्कि अवसर बनाने का है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि ग्रामीण परिवार अपने बच्चों को स्वरोजगार की दिशा में प्रेरित करें, तो वे आत्मनिर्भर बन सकते हैं।
उन्होंने सरकार द्वारा संचालित योजनाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि बकरी पालन, दुग्ध डेयरी, मुर्गी पालन, मधुमक्खी पालन और छोटे उद्योगों के माध्यम से गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। इन योजनाओं में कई प्रकार की आर्थिक सहायता और सब्सिडी भी उपलब्ध है, जिसका लाभ उठाकर ग्रामीण आर्थिक रूप से सशक्त बन सकते हैं।
उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर गांव ही मजबूत राष्ट्र की नींव होते हैं। यदि ग्रामीण युवा खेती के साथ-साथ स्वरोजगार अपनाएं, तो पलायन की समस्या भी कम होगी और गांवों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी।

कार्यक्रम के संस्थापक उदयराज निषाद ने अपने समापन संबोधन में सामाजिक एकता और सांस्कृतिक मूल्यों पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि समाज में सकारात्मक बदलाव तभी संभव है जब हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी को समझे।
उन्होंने सभी ग्रामीणों को आगामी होली पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि त्योहार आपसी प्रेम, भाईचारे और सद्भाव का संदेश देते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि त्योहारों को नशामुक्त और सुरक्षित वातावरण में मनाएं, जिससे समाज में शांति और सौहार्द बना रहे।
उन्होंने यह भी कहा कि संस्था भविष्य में भी शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और रोजगार जैसे मुद्दों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करती रहेगी।

इस अवसर पर कार्यक्रम के आयोजक शिवम कश्यप सहित कई गणमान्य ग्रामीण उपस्थित रहे। जिनमें जितेंद्र कश्यप, उमा शंकर कश्यप, कौशल किशोर, रूप चन्द, हंसराज, अनुरुद्ध कश्यप, दीपू कश्यप, सरवन कश्यप तथा अन्य स्थानीय नागरिक शामिल थे।
ग्रामीणों ने इस प्रकार के कार्यक्रमों को गांव के विकास के लिए अत्यंत आवश्यक बताया और भविष्य में भी ऐसे सामाजिक अभियानों को जारी रखने की मांग की। महिलाओं ने विशेष रूप से नारी सशक्तिकरण विषय पर चर्चा को सराहा और कहा कि इससे उन्हें समाज में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।

गांव स्तर पर नशा उन्मूलन अभियान की शुरुआत

देवा ब्लॉक के कुर्खिला ग्राम पंचायत में सामाजिक जागरूकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई, जहां जलांचल प्रगति पथ के बैनर तले नशा उन्मूलन अभियान की औपचारिक शुरुआत की गई। इस अभियान का उद्देश्य गांव के लोगों को नशे के दुष्परिणामों से अवगत कराना और समाज को नशामुक्त बनाने की दिशा में सामूहिक प्रयास शुरू करना था।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने बताया कि नशा केवल स्वास्थ्य को ही नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति, बच्चों की शिक्षा और सामाजिक सम्मान को भी प्रभावित करता है। ग्रामीणों को समझाया गया कि नशा व्यक्ति की सोच, व्यवहार और निर्णय क्षमता को कमजोर कर देता है, जिससे घरेलू हिंसा, गरीबी और अपराध जैसी समस्याएं बढ़ती हैं।

इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से नशा छोड़ने का संकल्प लिया और गांव में नशामुक्त वातावरण बनाने का वादा किया। वक्ताओं ने यह भी कहा कि जब गांव के लोग स्वयं जागरूक होंगे, तभी समाज में स्थायी बदलाव संभव है।

महिलाओं की भागीदारी पर विशेष जोर

कार्यक्रम में महिलाओं की भागीदारी को विशेष महत्व दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि महिला केवल परिवार की आधारशिला नहीं, बल्कि समाज परिवर्तन की सबसे मजबूत शक्ति है। यदि महिलाएं जागरूक हों और निर्णय प्रक्रिया में भाग लें, तो नशा जैसी सामाजिक बुराइयों को समाप्त करना आसान हो जाता है।

महिलाओं से अपील की गई कि वे अपने परिवार के सदस्यों, विशेषकर युवाओं और बच्चों को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करें। उन्हें बताया गया कि शिक्षित और जागरूक महिला अपने घर को सुरक्षित और संस्कारित बना सकती है।

कार्यक्रम में कई महिलाओं ने अपने विचार भी रखे और कहा कि वे गांव में नशामुक्ति अभियान को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाएंगी। इससे कार्यक्रम में उत्साह और सहभागिता का माहौल बना रहा।

युवाओं को स्वरोजगार की दिशा में प्रेरित किया गया

बैठक में युवाओं के भविष्य पर भी गंभीर चर्चा की गई। संस्था के पदाधिकारियों ने कहा कि बेरोजगारी अक्सर युवाओं को गलत रास्ते की ओर धकेल देती है, इसलिए उन्हें स्वरोजगार के अवसरों की ओर बढ़ाना आवश्यक है।

राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अंगद कुमार निषाद ने कहा कि आज का युवा यदि छोटे-छोटे व्यवसाय, कृषि आधारित उद्योग, पशुपालन, डेयरी, मुर्गी पालन, सिलाई, कुटीर उद्योग जैसे कार्य अपनाए, तो वह आर्थिक रूप से मजबूत बन सकता है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर युवा ही समाज को आगे बढ़ाते हैं और अपने परिवार को सम्मानजनक जीवन दे सकते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि गांवों में रोजगार के अवसर मौजूद हैं, जरूरत केवल सही दिशा और मार्गदर्शन की है। यदि युवा अपने कौशल को पहचानकर काम शुरू करें, तो वे शहरों की ओर पलायन से बच सकते हैं और गांव में ही सफलता हासिल कर सकते हैं।

सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई

कार्यक्रम में ग्रामीणों को विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी भी विस्तार से दी गई। वक्ताओं ने बताया कि सरकार स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है, जिनमें आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण और सब्सिडी की व्यवस्था भी शामिल है।

ग्रामीणों को बताया गया कि बकरी पालन, डेयरी, मुर्गी पालन, मत्स्य पालन, हस्तशिल्प, छोटे व्यापार आदि के लिए सरकारी विभागों द्वारा ऋण और अनुदान उपलब्ध कराया जाता है। इन योजनाओं का लाभ उठाकर ग्रामीण अपनी आय बढ़ा सकते हैं और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकते हैं।

लोगों से अपील की गई कि वे इन योजनाओं की सही जानकारी लें और पंचायत तथा संबंधित विभागों से संपर्क कर अपने जीवन स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में कदम उठाएं।

रिपोर्ट : कोटो न्यूज़ नेटवर्क (KNN) |

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