नेपाल माओवादी केंद्र का ऐतिहासिक बयान जनरेशन जी पीढ़ी आंदोलन लोकतंत्र की मजबूती की दिशा

संवादाताः कोटो न्यूज़ नेटवर्क (KNN) |  काठमाडौं में आयोजित एक महत्वपूर्ण वक्तव्य में नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी केंद्र) ने जनरेशन जी पीढ़ी के आंदोलन को ऐतिहासिक संघर्ष बताते हुए उनके संघर्षों को सलाम किया। पार्टी के केंद्रीय कार्यालय से जारी पत्र में यह स्पष्ट किया गया कि वर्तमान अस्थिर राजनीतिक परिस्थिति के बीच युवा वर्ग…

नेपाल माओवादी केंद्र

संवादाताः कोटो न्यूज़ नेटवर्क (KNN) |  काठमाडौं में आयोजित एक महत्वपूर्ण वक्तव्य में नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी केंद्र) ने जनरेशन जी पीढ़ी के आंदोलन को ऐतिहासिक संघर्ष बताते हुए उनके संघर्षों को सलाम किया। पार्टी के केंद्रीय कार्यालय से जारी पत्र में यह स्पष्ट किया गया कि वर्तमान अस्थिर राजनीतिक परिस्थिति के बीच युवा वर्ग ने लोकतंत्र, सुशासन और सामाजिक न्याय के लिए अपने बलिदानों का इतिहास रचा है। पत्र संख्या [निर्धारित नहीं] और दिनांक 2082।5।26 को जारी इस वक्तव्य में समृद्ध लोकतंत्र की स्थापना हेतु जनरेशन जी पीढ़ी द्वारा किए गए प्रयासों का संपूर्ण मूल्यांकन प्रस्तुत किया गया।

केंद्रीय समिति के तरफ से जनरेशन जी पीढ़ी के सभी शहीदों और घायलों के प्रति हार्दिक संवेदना व्यक्त की गई। यह आंदोलन समृद्ध लोकतंत्र के आदर्श को साकार करने के लिए किया गया था, लेकिन दुर्भाग्यवश इसने कई निर्दोष जीवन की आहुति ले ली। पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया कि यह आंदोलन सरकार की जन विरोधी नीतियों के खिलाफ खड़ा हुआ था। कांग्रेस और यूएमएल द्वारा गठित असंवैधानिक गठबंधन ने समाज के हर स्तर पर अराजकता और भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया, जिसके परिणामस्वरूप युवा वर्ग ने अपने अधिकारों की रक्षा हेतु सड़कों पर उतरना उचित समझा।

विरोध प्रदर्शन के दूसरे दिन विभिन्न सार्वजनिक संस्थानों, निजी संपत्तियों, होटल, बैंक, राजनीतिक दलों के कार्यालय, राष्ट्रपति निवास, सिंहदरबार, सर्वोच्च न्यायालय सहित दर्जनों महत्वपूर्ण इमारतों में हिंसा, लूटपाट, आगजनी और शारीरिक हमले हुए। पार्टी ने स्पष्ट किया कि ये घटनाएँ जनरेशन जी पीढ़ी के आदर्शों के अनुरूप नहीं थीं। इस संदर्भ में उच्च-स्तरीय न्यायिक जांच की मांग भी उठाई गई। पार्टी ने यह भी स्वीकार किया कि इन घटनाओं ने आंदोलन की शुद्धता पर सवाल खड़े कर दिए, लेकिन असली मुद्दा भ्रष्टाचार, सुशासन की कमी और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का दमन था।

केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने विश्वास मत के समय संसद में यह चेतावनी दी थी कि यह गठबंधन सरकार देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को गहरे संकट में डाल सकती है। लेकिन सरकार ने आलोचनाओं को अनसुना किया और निरंकुश तरीके से शासन किया। पत्र में यह भी बताया गया कि जनरेशन जी पीढ़ी के आंदोलन को कुचलने के लिए न केवल हिंसा का सहारा लिया गया, बल्कि युवा वर्ग की आवाज़ को दबाकर उन्हें नरसंहार का शिकार बनाया गया। इसके बावजूद, पार्टी ने संघर्षरत युवाओं के साहस को सलाम करते हुए संविधान के अनुरूप बदलाव की वकालत की।

पत्र में यह बताया गया कि पिछली सरकार में भी पार्टी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ निर्णायक कदम उठाए थे। प्रत्यक्ष निर्वाचित कार्यपालिकाओं और सांसदों को मंत्री बनने से रोकने, उच्च पदस्थ नेताओं की संपत्ति की जांच हेतु मानवाधिकार आयोग के गठन, ऐसे कई प्रस्ताव समय-समय पर पार्टी द्वारा संसद में प्रस्तुत किए गए थे। आज की पीढ़ी भी इन्हीं बुनियादी मुद्दों पर संघर्ष कर रही है। पत्र में विशेष रूप से यह बात कही गई कि अवांछनीय तत्वों की घुसपैठ के कारण प्रदर्शन में हिंसा की घटनाएँ हुईं, लेकिन ये हिंसक कार्य जनरेशन जी के आंदोलन का हिस्सा नहीं थे।

पत्र में जनयुद्ध और जनआंदोलन का ऐतिहासिक महत्व स्पष्ट किया गया। यह संघर्ष नेपाली समाज के सबसे वंचित वर्गों, जातियों, क्षेत्रों और समुदायों के अधिकारों के लिए था। गिरिजा प्रसाद कोइराला और पार्टी के अन्य नेताओं द्वारा हस्ताक्षरित 12 सूत्री समझौते और 19 दिनों के जनआंदोलन के माध्यम से व्यापक शांति समझौता प्राप्त हुआ। इसके परिणामस्वरूप दलितों, महिलाओं, मूलनिवासियों, मधेशियों, मुसलमानों, थारू, कर्णाली व सुदूरपश्चिमी क्षेत्रों के नागरिकों को संविधान द्वारा संरक्षण प्राप्त हुआ। सिंहदरबार में केंद्रीकृत सत्ता का ग्रामीण क्षेत्रों तक विस्तार भी इसी संघर्ष का परिणाम था।

पत्र में यह स्वीकार किया गया कि संविधान लागू करते समय पार्टी के अलग-अलग विचार थे। प्रत्यक्ष कार्यकारी चुनाव प्रणाली, दलितों, महिलाओं, आदिवासियों के अतिरिक्त अधिकार सुनिश्चित करना, सांसदों को मंत्री बनने से रोकना – ये विचार पहले भी प्रस्तुत किए गए थे। वर्तमान राजनीतिक अस्थिरता का मूल कारण संविधान के प्रभावी क्रियान्वयन में गंभीरता की कमी बताई गई। साथ ही, यह भी बताया गया कि जेनरेशन जी पीढ़ी की माँगें लोकतंत्र और संसदीय प्रक्रिया के अनुरूप ही पूरी हो सकती हैं। पार्टी ने स्पष्ट किया कि वह संवैधानिक प्रक्रिया के पूर्ण समर्थन में है।

पत्र में यह बात जोर-शोर से कही गई कि जेन-जी आंदोलन का उद्देश्य एक उन्नत लोकतंत्र और मजबूत गणतंत्र की स्थापना है। पार्टी ने इस आंदोलन के एजेंडे को सकारात्मक रूप में स्वीकार करते हुए अन्य राजनीतिक दलों द्वारा फैलाए जा रहे प्रचार के खिलाफ सचेत रहने का आह्वान किया। पार्टी ने कहा कि वह लोकतंत्र, गणतंत्र, संविधान, सामाजिक न्याय और समावेशिता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहेगी। इसके साथ ही, सभी प्रगतिशील बदलावों, पहलों और आंदोलनों का समर्थन करने का भी विश्वास व्यक्त किया गया।

पत्र में सभी राजनीतिक दलों, सुरक्षा एजेंसियों और आम जनता से यह अपील की गई कि वे संयम और समझदारी से आगे बढ़ें। प्रतिगामी भ्रष्ट तंत्र के खिलाफ एकजुट होकर काम करें। पार्टी ने निर्देश दिया कि पार्टी के सदस्य जनता के साथ खड़े रहें और उनके किसी भी समस्या का समाधान करने के लिए तत्पर रहें। तोड़फोड़, आगजनी और लूटपाट जैसी घटनाओं से दूरी बनाकर लोकतंत्र को सुरक्षित बनाए रखना सभी का कर्तव्य होना चाहिए। अंततः, पार्टी ने माननीय राष्ट्रपति जी और अन्य सुरक्षा एजेंसियों द्वारा जनरेशन जी पीढ़ी द्वारा उठाई गई मांगों को संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से पूरा करने की पहल की सराहना की। सभी पक्षों से संयम, उच्च समझ, व्यापक संवाद और शांतिपूर्ण समाधान का आह्वान किया गया। भविष्य के प्रति आशावादी रहने, लोकतंत्र व संविधान की रक्षा करने, और देश को प्रगतिशील लोकतंत्र की ओर अग्रसर करने का संकल्प जताया गया।

नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी केंद्र) ने जनरेशन जी पीढ़ी आंदोलन को लोकतंत्र की मजबूती के लिए ऐतिहासिक बताया

नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी केंद्र) ने जनरेशन जी पीढ़ी द्वारा उठाए गए आंदोलन को केवल एक सामाजिक या राजनीतिक प्रदर्शन नहीं बल्कि लोकतंत्र की मजबूती और उसकी संवैधानिक प्रक्रिया को सुदृढ़ करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम के रूप में परिभाषित किया है। पार्टी ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन जन-जन के अधिकारों की रक्षा, लोकतांत्रिक संस्थाओं को सुदृढ़ करने और भ्रष्टाचार तथा अनियमितताओं के खिलाफ जनांदोलन की भूमिका निभाने वाला था। जनरेशन जी पीढ़ी के युवा अपने भविष्य के लिए देशव्यापी परिवर्तन की मांग कर रहे हैं, जिससे केवल वर्तमान राजनीतिक व्यवस्थाओं का विरोध नहीं हो रहा, बल्कि एक नए लोकतांत्रिक युग की नींव रखी जा रही है। पार्टी ने इस आंदोलन को नेपाल के राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ बताया, जिसने युवा वर्ग की ऊर्जा, साहस और दृष्टिकोण को नए लोकतांत्रिक संरचनाओं की ओर मोड़ा है।

भ्रष्टाचार और सुशासन की कमी को मुख्य कारण बताया

नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी केंद्र) ने यह स्पष्ट किया कि जनरेशन जी पीढ़ी के आंदोलन के पीछे मुख्य कारण देश में व्याप्त भ्रष्टाचार और सुशासन की गंभीर कमी थी। पार्टी ने बताया कि पिछले गठबंधन सरकारों ने निजी स्वार्थ और सत्ता की दौड़ में लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी की, जिससे सरकारी व्यवस्थाएं जनहित के बजाय व्यक्तिगत लाभ के लिए संचालित हो गईं। भ्रष्टाचार ने समाज के हर स्तर पर गहरी पैठ बना ली थी – चाहे वह सार्वजनिक सेवाओं का वितरण हो, सरकारी संपत्ति का प्रबंधन हो या लोक नीति निर्माण। भ्रष्टाचार की यह विकराल समस्या आम जनता के साथ-साथ युवाओं को भी बेबस कर रही थी। इसके विरोध में उठी जनरेशन जी पीढ़ी की आवाज़ ने यह साबित कर दिया कि युवा वर्ग केवल व्यवस्था विरोधी नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक सुधार के लिए प्रतिबद्ध था। पार्टी ने इस आंदोलन को भ्रष्टाचार के विरुद्ध जन संघर्ष का प्रतीक बताया, जिससे देश के समग्र लोकतंत्र और सामाजिक न्याय व्यवस्था को पुनर्जीवित करने की दिशा में मजबूती मिली।

उच्च-स्तरीय न्यायिक जाँच की माँग

नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी केंद्र) ने आंदोलन के दौरान हुई हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाओं की निष्पक्ष उच्च-स्तरीय न्यायिक जाँच की ज़ोरदार माँग की। पार्टी ने स्पष्ट किया कि इन घटनाओं का आडम्बर नहीं बल्कि गहराई से जांच होना आवश्यक है, ताकि आंदोलन की सच्चाई जनता के सामने पूरी तरह से आ सके। उनका मानना है कि आंदोलनकारियों के आदर्शों से असंगत तत्वों की घुसपैठ के कारण हिंसा की घटनाएँ घटित हुईं, जिन्हें बिना जांच के राजनीतिक रूप से प्रभावित आंकलन नहीं किया जा सकता। पार्टी ने न्यायपालिका से आग्रह किया कि वह स्वतंत्र, निष्पक्ष और पूरी पारदर्शिता के साथ इन घटनाओं की जांच करे, ताकि दोषियों को सजा दी जा सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। इस उच्च-स्तरीय जांच की माँग से यह भी संकेत मिलता है कि पार्टी केवल जन-आंदोलन का समर्थन नहीं कर रही, बल्कि उसके भीतर हुई गलतियों और अपराधों की जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से समझने और जवाबदेही सुनिश्चित करने के पक्ष में है।

लोकतंत्र के संवैधानिक सुधारों की आवश्यकता पर जोर

पत्र में नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी केंद्र) ने लोकतंत्र की मजबूती और शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और उत्तरदायी बनाने के लिए संवैधानिक सुधारों की आवश्यकता पर विशेष रूप से जोर दिया। पार्टी ने यह स्पष्ट किया कि वर्तमान संविधान में कई ऐसे प्रावधान हैं जो समय की मांग के अनुरूप नहीं हैं। उदाहरण स्वरूप, प्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित कार्यपालिका और सांसदों को बिना किसी कठोर नियंत्रण के मंत्री पदों पर आसीन होने की आज़ादी ने सत्ता के केंद्रीकरण को बढ़ावा दिया है। साथ ही, दलितों, महिलाओं, आदिवासियों, मधेशियों और अन्य उत्पीड़ित वर्गों के अधिकारों के संरक्षण में भी गंभीर कमियाँ पाई गईं। पार्टी ने संविधान में ऐसे प्रावधानों के सम्मिलन की वकालत की, जो लोकतंत्र को और अधिक समावेशी, उत्तरदायी, पारदर्शी और समय-समय पर जनता की आवाज़ को प्रभावी रूप से शासन प्रणाली में स्थान दिला सकें। इसके साथ ही, पार्टी ने यह भी कहा कि संवैधानिक संशोधन के जरिए ही ही ऐसी राजनीतिक व्यवस्था स्थापित की जा सकती है, जो प्रत्यक्ष रूप से कार्यपालिका हो, न्यायपालिका और विधायिका के बीच संतुलन बनाए रखे, तथा संविधान के तहत सभी वर्गों को अधिकार सुनिश्चित करे।

शांति, संयम और संवैधानिक प्रक्रिया का समर्थन

नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी केंद्र) ने अपने वक्तव्य में सभी पक्षों से संयम, शांति और संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से आगे बढ़ने का आह्वान किया। पार्टी ने स्पष्ट किया कि जनरेशन जी पीढ़ी के आंदोलन की मांगें किसी भी स्थिति में संविधान या लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ नहीं थीं, बल्कि समावेशी लोकतंत्र और सुशासन की स्थापना के पक्ष में थीं। पार्टी ने कहा कि भविष्य के लिए सभी राजनीतिक दलों, नागरिक संगठनों और आम जनता को मिलकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि देश की प्रगति संवैधानिक ढांचे के तहत ही हो। हिंसा, आगजनी, तोड़फोड़ या विध्वंस जैसे कदमों की बजाय संवाद, समझौता और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के माध्यम से समाधान खोजा जाना चाहिए। पार्टी ने भविष्य में लोकतंत्र की रक्षा के लिए संयमित कदम उठाने, व्यापक संवाद स्थापित करने और शांतिपूर्ण समाधान को प्राथमिकता देने की बात कही। इसके साथ ही उन्होंने सभी पक्षों से अपील की कि वे एकजुट होकर भ्रष्ट तंत्र और प्रतिगामी ताकतों के खिलाफ खड़े हों, ताकि नेपाल का लोकतांत्रिक परिवर्तन स्थायी और सफल हो सके।

रिपोर्ट : कोटो न्यूज़ नेटवर्क (KNN) 

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