रूपंदेही ज़िले में नेपाल निषाद परिषद का ऐतिहासिक अधिवेशन सम्पन्न, शिक्षा-रोजगार और राजनीतिक भागीदारी

दुत : कोटो न्यूज़ नेटवर्क (KNN) | लुंबिनी प्रदेश के रूपंदेही ज़िले में सोमवार को नेपाल निषाद परिषद का ऐतिहासिक अधिवेशन बड़े उत्साह और गरिमा के साथ सम्पन्न हुआ। इस अधिवेशन की अध्यक्षता परिषद के वरिष्ठ सामाजिक नेता भगवती केवट निषाद ने की। कार्यक्रम में निषाद समाज के विभिन्न प्रांतों और जिलों से आए प्रतिनिधियों,…

लुंबिनी प्रदेश के रूपंदेही में नेपाल निषाद परिषद का अधिवेशन सम्पन्न। शिक्षा, रोजगार, महिला भागीदारी और राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर जोर।

दुत : कोटो न्यूज़ नेटवर्क (KNN) | लुंबिनी प्रदेश के रूपंदेही ज़िले में सोमवार को नेपाल निषाद परिषद का ऐतिहासिक अधिवेशन बड़े उत्साह और गरिमा के साथ सम्पन्न हुआ। इस अधिवेशन की अध्यक्षता परिषद के वरिष्ठ सामाजिक नेता भगवती केवट निषाद ने की। कार्यक्रम में निषाद समाज के विभिन्न प्रांतों और जिलों से आए प्रतिनिधियों, महिला कार्यकर्ताओं, छात्र नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। अधिवेशन का मुख्य उद्देश्य समाज को संगठित करना, संगठन को मज़बूत बनाना और आने वाले समय में सामाजिक, शैक्षिक तथा राजनीतिक भागीदारी को सुदृढ़ करना था। अधिवेशन में उपस्थित गणमान्य लोगों में भगवती केवट निषाद, जीवन मल्लाह निषाद, शिवचरण निषाद, उदयराज केवट निषाद, राजू मल्लाह निषाद, रामदेव मल्लाह निषाद, फूलचंद चाई निषाद, विनोद कुमार साहनी सहित और कई अन्य प्रमुख कार्यकर्ता शामिल रहे। इसके अलावा महिलाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही, जिसमें लालमति निषाद, बसंती केवट निषाद, स्मृति केवट निषाद, शीला केवट निषाद, प्रमिला केवट निषाद, निर्मला केवट निषाद, शांति केवट निषाद, फूल कुमारी निषाद, प्रेम केवट निषाद, रीता देवी निषाद, सुरती केवट निषाद, आशा केवट निषाद, गीता केवट निषाद, रंभा केवट निषाद और कई अन्य सक्रिय रूप से सम्मिलित हुईं।

सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि नेपाल के सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य में निषाद समाज का योगदान ऐतिहासिक रहा है, लेकिन आज भी यह समुदाय पिछड़ेपन, अशिक्षा और सामाजिक असमानता से जूझ रहा है। वक्ताओं ने यह भी कहा कि संगठन के ज़रिए ही समाज की आवाज़ बुलंद की जा सकती है। इस मौके पर शिवसागर केवट निषाद, विजय कुमार केवट निषाद, कपिल केवट निषाद, बाबूराम केवटी, चौधरी केवट निषाद, बिंदु केवट निषाद, जनार्दन निषाद, राम केवट निषाद और गिराऊ प्रसाद निषाद ने भी समाज की मजबूती पर जोर दिया और युवाओं को शिक्षा एवं सामाजिक कार्यों में आगे बढ़ने की अपील की। अधिवेशन का माहौल एकता और भाईचारे का प्रतीक रहा। इसमें पारंपरिक मूल्यों की झलक भी दिखाई दी और आधुनिक समय की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नए प्रस्ताव भी पारित किए गए। अधिवेशन के दौरान यह संकल्प लिया गया कि समाज को शिक्षा, रोजगार और राजनीतिक भागीदारी के क्षेत्र में और अधिक मज़बूत बनाया जाएगा। महिला एवं युवाओं की सक्रिय भागीदारी को संगठन की शक्ति बताया गया। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिनिधियों ने मिलकर समाज की प्रगति और एकता के लिए काम करने का वचन लिया।

अधिवेशन की भव्यता

लुंबिनी प्रदेश के रूपंदेही ज़िले में सोमवार को नेपाल निषाद परिषद का वार्षिक अधिवेशन ऐतिहासिक उत्साह और गरिमा के साथ सम्पन्न हुआ। यह अधिवेशन केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह समाज की एकजुटता, जागरूकता और भविष्य की योजनाओं का प्रतीक साबित हुआ। इस अवसर पर सैकड़ों कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी, महिलाएं और युवा प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता समाज के वरिष्ठ नेता भगवती केवट निषाद ने की। उनका नेतृत्व न केवल पारंपरिक अनुभव से जुड़ा है बल्कि समाज में प्रेरणा का स्रोत भी है। उनके संबोधन में संगठन की मजबूती और सामाजिक एकता का संदेश बार-बार गूंजता रहा।

अधिवेशन में चर्चा के मुख्य मुद्दे

सभा में शिक्षा, रोजगार, संगठन की मजबूती और राजनीतिक भागीदारी जैसे विषयों पर गहन विमर्श हुआ।

शिक्षा: वक्ताओं ने कहा कि निषाद समाज की तरक्की का मूल आधार शिक्षा है। ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में आज भी विद्यालयों की स्थिति संतोषजनक नहीं है। बच्चों की संख्या अधिक होने के बावजूद संसाधन और सुविधाओं की कमी शिक्षा को बाधित करती है। अधिवेशन ने यह संकल्प लिया कि समाज के भीतर शैक्षिक आंदोलन को और गति दी जाएगी तथा गरीब छात्रों के लिए छात्रवृत्ति और कोचिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

रोजगार: रोजगार की समस्या समाज में सबसे बड़ी चुनौती के रूप में उभरी। युवाओं ने स्वरोज़गार और कौशल विकास कार्यक्रमों की आवश्यकता पर बल दिया। अधिवेशन में यह भी चर्चा हुई कि यदि तकनीकी शिक्षा और सरकारी योजनाओं तक समाज की पहुँच सुनिश्चित हो, तो रोजगार की समस्या काफी हद तक हल की जा सकती है।

संगठन की मजबूती: वक्ताओं ने कहा कि संगठन ही शक्ति है। यदि समाज संगठित होगा तो ही सरकार और प्रशासन से अपनी मांगें मनवा सकेगा। परिषद की स्थानीय और प्रांतीय इकाइयों को और मज़बूत बनाने पर जोर दिया गया।

राजनीतिक भागीदारी: निषाद समाज की आबादी बड़ी संख्या में होने के बावजूद राजनीतिक प्रतिनिधित्व नगण्य है। वक्ताओं ने इस स्थिति पर चिंता जताई और आने वाले चुनावों में निषाद समाज को एकजुट होकर अपनी ताकत दिखाने की अपील की।

महिला भागीदारी: समाज की धड़कन

इस अधिवेशन की सबसे बड़ी विशेषता रही—महिलाओं की सक्रिय भागीदारी।
महिला प्रतिनिधियों में लालमति निषाद, बसंती केवट, स्मृति केवट, शीला केवट, प्रमिला केवट, निर्मला केवट सहित कई अन्य ने मंच साझा किया। उन्होंने अपने वक्तव्यों में स्पष्ट कहा कि यदि समाज को प्रगति की राह पर ले जाना है, तो महिलाओं की भागीदारी को बराबरी का दर्जा देना होगा।

महिला प्रतिनिधियों ने शिक्षा में लड़कियों के लिए विशेष अभियान चलाने की बात रखी। इसके अलावा उन्होंने समाज में  भेदभाव जैसी बुराइयों के खिलाफ संघर्ष करने का भी संकल्प लिया।

उनकी यह सक्रियता यह दर्शाती है कि अब निषाद समाज की महिलाएं केवल श्रोता नहीं, बल्कि निर्णय लेने वाली भी बन रही हैं।

छात्र राजनीति और शिक्षा में निषाद समाज के युवाओं की कमज़ोर स्थिति पर चिंता जताई और छात्रवृत्ति, तकनीकी शिक्षा तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सहायता की आवश्यकता पर जोर दिया।
अमित कुमार माला निषाद ने यह प्रस्ताव रखा कि युवाओं को डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर संगठन की आवाज़ को राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाना चाहिए।

युवा प्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया, आईटी और तकनीकी प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर निषाद समाज अपने मुद्दों को अधिक प्रभावशाली तरीके से उठा सकता है।

समाज का साझा संकल्प

अधिवेशन का समापन एक साझा संकल्प के साथ हुआ। इस संकल्प में निम्नलिखित बिंदु प्रमुख रहे—

समाज को शिक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना।

युवाओं को तकनीकी शिक्षा और रोजगारपरक कौशल से लैस करना।

महिलाओं को समाज की मुख्यधारा में बराबरी की भागीदारी दिलाना।

राजनीतिक अधिकारों के लिए संगठित आंदोलन करना।

सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाना।

संगठन को गांव-गांव और शहर-शहर तक मजबूत बनाना।

यह संकल्प केवल शब्दों का खेल नहीं था, बल्कि यह समाज की सामूहिक भावना और भविष्य की दिशा का स्पष्ट संदेश था।

अधिवेशन का वातावरण

अधिवेशन का माहौल भाईचारे, उत्साह और अनुशासन का मिश्रण रहा।
सभा स्थल पर विभिन्न जिलों से आए कार्यकर्ताओं का मिलन एकता की मिसाल बना। मंच पर जहां बुज़ुर्ग नेताओं ने अनुभव साझा किए, वहीं युवाओं ने जोश और ऊर्जा से भरे विचार प्रस्तुत किए।

रिपोर्ट : कोटो न्यूज़ नेटवर्क (KNN)

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